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पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण

पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण SSC CGL सामान्य जागरूकता अनुभाग का एक महत्वपूर्ण विषय है। प्रश्न पारिस्थितिकी तंत्र, जैव-विविधता, राष्ट्रीय उद्यान, प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन परत और पर्यावरण कानूनों को कवर करते हैं। हर साल 2 से 5 प्रश्न आते हैं।

 


 

1. पारिस्थितिकी तंत्र

 

1.1 पारिस्थितिकी क्या है?

पारिस्थितिकी जीव विज्ञान की एक शाखा है जो जीव समुदायों का उसके वातावरण के साथ पारस्परिक संबंधों का अध्ययन करती है। प्रत्येक जन्तु या वनस्पति एक निश्चित वातावरण में रहता है। पारिस्थितिकी शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग अर्नेस्ट हेकेल ने किया था। पारिस्थितिकीविद् हेनरी चांडलर काउल्स 1896 में इंडियाना ड्यून्स में पादपों के जीवन का अध्ययन करने के लिए प्रसिद्ध हैं।

 

1.2 पारिस्थितिकी तंत्र के घटक

किसी भी पारिस्थितिकी तंत्र के घटकों को दो समूहों में वर्गीकृत किया जाता है:

अजैविक घटक (निर्जीव): प्रकाश, वर्षण, तापमान, आर्द्रता एवं जल, अक्षांश, ऊंचाई, उच्चावच आदि। किसी पारिस्थितिकी तंत्र में पाए जाने वाले सभी निर्जीव पदार्थ उसके अजैविक घटक कहलाते हैं।

जैविक घटक (सजीव): पौधे, प्राणी (मानव, जंतु, परजीवी सूक्ष्म जीव आदि), अपघटक (Decomposer)।

पौधा अजैविक घटक नहीं है - यह जैविक घटक है।

 

1.3 खड़ी फसल

किसी विशेष पोषी स्तर पर खड़ी फसल को बायोमास के रूप में मापा जाता है। एक विशिष्ट समय पर प्रत्येक पोषण स्तर का जीवित पदार्थ की कुछ खास मात्रा होती है, जिसे स्थित शस्य या खड़ी फसल कहा जाता है।

 

1.4 वायवीय और अवायवीय

वायवीय एक ऐसे वातावरण को संदर्भित करता है जिसमें ऑक्सीजन आसानी से उपलब्ध हो। अवायवीय एक ऐसे वातावरण को संदर्भित करता है जिसमें ऑक्सीजन आसानी से उपलब्ध न हो।

 

1.5 संबंधों का अध्ययन

आस-पास के वातावरण में पशुओं और पौधों के संबंध के अध्ययन को पारिस्थितिक विज्ञान (Ecology) कहते हैं। पारिस्थितिकी जीव विज्ञान की एक शाखा है।

 

1.6 पारिस्थितिकीय संबंध

सहभोजिता (Commensalism): अलग-अलग जाति के दो जीवों के बीच ऐसा संबंध जिसमें एक जाति के जीव को दूसरी जाति के जीव से लाभ होता है लेकिन दूसरी जाति के जीव को पहली जाति के जीव से ना ही कोई लाभ होता है और ना कोई हानि होती है - दूसरी जाति का जीव सदैव अप्रभावित रहता है।

परजीविता (Parasitism): अलग-अलग जाति के दो जीवों के बीच ऐसा संबंध जिसमें एक जाति के जीव को दूसरी जाति के जीव से लाभ प्राप्त होता है जबकि दूसरी जाति के जीव को पहली जाति के जीव से हानि होती है।

सहजीविता (Mutualism): दोनों जीव एक-दूसरे से लाभान्वित होते हैं।

शाव परजीविता (Brood Parasitism): एक प्रजनन रणनीति है जिसमें परजीवी एक ही प्रजाति या विभिन्न प्रजातियों के अन्य जीवों की देखभाल का लाभ उठाते हैं जिससे वे अपने बच्चों को पाल सकें।

 


 

2. पर्यावरण संरक्षण

 

2.1 भारतीय गौर

भारतीय बाइसन या गौर (बोस गॉरस) भारत में पाए जाने वाले जंगली मवेशियों की सबसे बड़ी प्रजाति है। भारत में वे मुख्य रूप से नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान, हिल्स में पाए जाते हैं। मूलतः दक्षिण और दक्षिण पूर्ण एशिया में पाया जाता है।

 

2.2 रियो शिखर सम्मेलन

रियो शिखर सम्मेलन (पृथ्वी शिखर सम्मेलन) दक्षिण अमेरिकी देश ब्राजील के शहर रियो डी जेनेरो में 3-14 जून 1992 के मध्य हुआ। इसे पृथ्वी शिखर सम्मेलन या रियो सम्मेलन के नाम से भी जाना जाता है। 116 देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भाग लिया। तीन बाध्यकारी समझौते: (1) जैव विविधता पर अभिसमय, (2) जलवायु परिवर्तन पर फ्रेमवर्क अभिसमय, (3) मरुस्थलीकरण से निपटने हेतु संयुक्त राष्ट्र अभिसमय

 

2.3 पर्यावरण पुरस्कार

गोल्डन पांडा पुरस्कार पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहन देने के लिए प्रदान किया जाने वाला विश्व का सर्वोच्च पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार है। इसे 'ग्रीन आस्कर' के नाम से भी जाना जाता है।

 

2.4 रेड डेटा बुक

रेड डेटा बुक (IUCN रेड सूची) संकटग्रस्त पौधों एवं जीवों के संबंध में सूचना प्रदान करती है। IUCN (अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ) विश्व स्तर पर विभिन्न जातियों की संरक्षण स्थिति पर निगरानी रखने वाला सर्वोच्च संगठन है। IUCN का मुख्यालय स्विटजरलैंड की राजधानी जेनेवा के निकट ग्लैंड नामक स्थान पर है। रेड डेटा सूची की शुरुआत वर्ष 1964 में की गई थी। इस सूची में विलुप्त वन, संकटग्रस्त, घोर संकटग्रस्त श्रेणियों के अंतर्गत पौधों एवं जीवों की स्थिति को दर्शाया जाता है।

 

2.5 चिपको आंदोलन

चिपको नारा "पारिस्थितिकी की स्थायी अर्थव्यवस्था है" सुन्दरलाल बहुगुणा ने गढ़ा था। सुन्दरलाल बहुगुणा का जन्म 9 जनवरी 1927 को वर्तमान उत्तराखंड में हुआ था। बहुगुणा को चिपको आंदोलन और बड़े बांध बनाए जाने के विरोधी आंदोलनों का प्रमुख नेता माना जाता है। बहुगुणा के प्रयासों का ही नतीजा रहा कि आंदोलन के बाद 15 सालों तक के लिए उत्तराखंड में सरकार ने पेड़ काटने पर रोक लगा दिया। चिपको आंदोलन के दौरान लोग पेड़ों से चिपक जाते थे और पेड़ों को कटने से बचाते थे।

 

2.6 विश्व आर्द्रभूमि दिवस

रामसर कन्वेंशन के अनुसार, विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2 फरवरी को मनाया जाता है। रामसर सम्मेलन ईरान के शहर रामसर में 2 फरवरी 1971 को हुआ। आर्द्रभूमि को पृथ्वी का किडनी भी कहा जाता है।

 

2.7 जैव-विविधता हॉटस्पॉट

हॉटस्पॉट ऐसे स्थान हैं जहां पर जातियों की पर्याप्तता तथा स्थानीय जातियों की अधिकता पायी जाती है लेकिन साथ ही इन जीव जातियों के अस्तित्व पर निरन्तर संकट बना रहता है - जहां स्थानीय एवं वैश्विक दृष्टि से जातियों की समृद्धता है लेकिन आवास विनाश का संकट बना हुआ है। हॉट स्पॉट शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग प्रसिद्ध ब्रिटिश पारिस्थितिकविद् नॉर्मन मायर्स ने 1988 में किया था। भारत के हॉटस्पॉट: पश्चिमी घाट, पूर्वी हिमालय

 

2.8 ग्रेट बैरियर रीफ

ग्रेट बैरियर रीफ प्रशांत महासागर में स्थित है। यह कोरल रीफ ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड द्वीप के सहारे 2300 किमी लंबे क्षेत्र में फैला है। यूनेस्को द्वारा राष्ट्रीय धरोहर में शामिल इस पार्क का क्षेत्रफल 344,400 वर्ग किमी है।

 

2.9 ISO 14001

ISO 14001 प्रमाणन पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली से संबंधित है। यह एक व्यवस्थित दृष्टिकोण है जो उत्पाद के पहले चरण से उपभोक्ता तक हर चरण में पर्यावरणीय प्रभावों को ध्यान में रखते हुए उत्पादन सुनिश्चित करता है। इसकी स्थापना का उद्देश्य संगठनों की गतिविधियों के दौरान प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को कम करना है।

 

2.10 संयुक्त वन प्रबंधन (JFM)

संयुक्त वन प्रबंधन (Joint Forest Management) भारत में राज्य के वन विभागों और स्थानीय समुदायों के बीच वन प्रबंधन में एक साझेदारी है। इस साझेदारी को वर्ष 1988 की भारतीय राष्ट्रीय वन नीति में प्रतिपादित किया गया था।

 

2.11 वनीकरण

वनीकरण मुख्य रूप से वृक्षारोपण को संदर्भित करता है। वनीकरण से बाढ़ को रोका जा सकता है और हमारे पारितंत्र को संतुलित किया जा सकता है। वन मिट्टी का कटाव, बाढ़ तथा सूखा जैसी आपदाओं को रोकते हैं। वन पृथ्वी के वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन के संतुलन को बनाए रखने, जल संभरण एवं संरक्षण, जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने आदि में भी मदद करते हैं। इसलिए पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बनाए रखने के लिए वन बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 


 

3. जैव-विविधता

 

3.1 प्रोजेक्ट टाइगर

प्रोजेक्ट टाइगर भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के कार्यकाल में 1 अप्रैल 1973 को भारत में शुरू किया गया था। इस परियोजना का उद्देश्य भारत में बाघों की आबादी को उनके प्राकृतिक आवासों में सुनिश्चित करना, बाघों को विलुप्त होने से बचाना और बाघों हेतु जैविक महत्व के क्षेत्रों को प्राकृतिक विरासत के रूप में संरक्षित करना है। वर्तमान में भारत में कुल 54 टाइगर रिजर्व हैं (54वां - धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व)।

 

3.2 राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य

जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान - उत्तराखंड (नैनीताल जिला)। भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान (1936)। 1936 में गवर्नर मैलकम हैली ने इसे जैविक उद्यान घोषित किया। 1936 में गवर्नर मैलकम हैली के नाम पर 'हैली नेशनल पार्क' का नाम दिया गया। 1956 में इस पार्क का नाम जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय पार्क रखा गया।

सरिस्का टाइगर रिजर्व - राजस्थान (अलवर जिला)। 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत बाघ संरक्षित क्षेत्र घोषित।

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान - राजस्थान (सवाई माधोपुर जिला)। 1980 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित।

बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान - मध्य प्रदेश। 1968 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया।

बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान - कर्नाटक। सन् 1974 में एक टाइगर रिजर्व के रूप में स्थापित।

साइलेंट वैली नेशनल पार्क - केरल (पलक्कड़ जिला)। नीलगिरि पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है। यहां उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वन तथा कई दुर्लभ जन्तुओं व वनस्पतियों की प्रजातियां पाई जाती हैं।

नामदफा राष्ट्रीय उद्यान - अरुणाचल प्रदेश (चांगलांग जिला)। पूर्वी हिमालयी उप-क्षेत्र में सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र। पूर्वी हिमालय को जैव विविधता का हॉट स्पॉट घोषित किया गया है।

राजगीर चिड़ियाघर (प्राणि उद्यान) - बिहार (नालंदा जिला)। फरवरी 2022 को जनता के लिए खोला गया।

 

3.3 भारत में हाथी रिजर्व

मयूरभंज हाथी रिजर्व - ओडिशा। संबलपुर हाथी रिजर्व - ओडिशा। महानदी हाथी रिजर्व - ओडिशा। सोनितपुर हाथी रिजर्व - असम (ओडिशा में नहीं)।

 

3.4 बायोस्फीयर रिजर्व

नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व भारत में वर्ष 1986 में स्थापित पहला बायोस्फीयर रिजर्व था। दक्षिण भारत में पश्चिमी घाट और नीलगिरि पर्वत श्रृंखला में स्थित है। तमिलनाडु, कर्नाटक एवं केरल राज्य में लगभग 5520 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है। वर्ष 2012 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।

नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व - उत्तराखंड। सुंदरवन बायोस्फीयर रिजर्व - पश्चिम बंगाल। मन्नार की खाड़ी बायोस्फीयर रिजर्व - तमिलनाडु।

 

3.5 ब्रह्मगिरि वन्यजीव अभयारण्य

ब्रह्मगिरि वन्यजीव अभयारण्य कर्नाटक के कोडागू जिले में स्थित है। पश्चिमी घाट का भाग है। 181 वर्ग किमी में फैला है। केरल के 'अरलम वन्यजीव अभयारण्य' के निकट है। यहां भालू, हाथी, हिरन, चीता, जंगली बिल्ली, शेर जैसी पूंछ वाला बन्दर आदि पाए जाते हैं।

 

3.6 लोधी गार्डन

लोधी गार्डन दिल्ली शहर के दक्षिण मध्य इलाके में बना एक सुन्दर उद्यान है। ब्रिटिश काल में इस बाग का नाम 'द लेडी विलिंगडन पार्क' था। यहां के उद्यान के बीच-बीच में लोदी वंश के मकबरे हैं। इस उद्यान क्षेत्र का विस्तार लगभग 90 एकड़ में है।

 

3.7 चीता पुनर्वास

सितंबर 2022 में, मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 8 चीते (5 मादा, 3 नर) छोड़े गए। यह 'भारत में चीतों की पुनः स्थापना के लिए कार्य योजना' के पहले चरण में था। चीता पुनर्वास योजना को प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत भारत सरकार ने धन आवंटित किया है।

 

3.8 राष्ट्रीय उद्यानों की संख्या

2019 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत में 104 राष्ट्रीय उद्यान थे (प्रश्नकाल के दौरान)। वर्तमान में भारत में 106 राष्ट्रीय उद्यान और 565 वन्यजीव अभयारण्य हैं।

 


 

4. प्रदूषण

 

4.1 ई-अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2022

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के तहत ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम 2022 को अधिसूचित किया है। ई-कचरे का अर्थ बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है - इनमें सोलर फोटो-वोल्टाइक मॉड्यूल या ऐसे पैनल या सेल शामिल हैं जिन्हें अपशिष्ट के रूप में फेंक दिया जाता है। यह अधिसूचित अधिनियम 1 अप्रैल 2023 से लागू है।

 

4.2 जल प्रदूषण अधिनियम

जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम - 1974 में संसद द्वारा पारित किया गया।

 

4.3 सीवेज उपचार

अपशिष्ट जल उपचार की प्रक्रिया को सामान्यतः सीवेज उपचार कहा जाता है। सीवेज उपचार नगरपालिका अपशिष्ट जल संस्थान द्वारा प्रदूषित पदार्थों को हटाने की प्रक्रिया है, जिसमें मुख्य रूप से घरेलू मल और कुछ औद्योगिक अपशिष्ट जल शामिल होता है।

 

4.4 उपशमन

उपशमन का तात्पर्य है प्रदूषण की डिग्री या तीव्रता को कम करना या समाप्त करना। प्राकृतिक संसाधनों की बहाली, सुधार या अच्छा होना, प्रदूषण की डिग्री या तीव्रता को कम करने के तरीकों का उदाहरण है।

 

4.5 फ्लिपफ्लॉपी

फ्लिपफ्लॉपी पूरी तरह से प्लास्टिक कचरे से बनी दुनिया की पहली पाल नौका है। जिसका उद्देश्य महासागरों में प्लास्टिक प्रदूषण के बारे में लोगों की जागरूकता बढ़ाना है।

 

4.6 स्लज (Sludge)

तरल अपशिष्ट जल के ऊपर तैरने वाले वसा, ग्रीस और तेल जैसे ठोस पदार्थ स्लज (कीचड़) कहलाते हैं। स्लज एक अर्ध-बेस घोल है। स्लज को 'ठोस अपशिष्ट' (Solid Waste) के नाम से भी जाना जाता है। मलजल उपचार प्रक्रिया के अंतर्गत अपशिष्ट के रूप में गाढ़ा कीचड़ एक टैंक में एकत्रित कर लिया जाता है जिसका उपयोग बायो गैस एवं खाद बनाने में किया जाता है।

 

4.7 अपशिष्ट जल

अपशिष्ट जल वह जल है जो रसोई से निकालने वाला अपशिष्ट जल है - झाग से भरपूर, तेल मिश्रित, काले-भूरे रंग का जल जो सिंक, शौचालय, लॉन्ड्री आदि से नालियों में जाता है।

 

4.8 कार्बन मोनोऑक्साइड - प्रदूषक क्यों है?

कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) एक रंगहीन, गंधहीन एवं स्वादहीन गैस है। जब वायु में इस गैस की सांद्रता 35 PPM से अधिक होती है तब यह गैस मनुष्य एवं पशुओं के लिए हानिकारक सिद्ध होती है। यह गैस रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन के साथ आक्सोहीमोग्लोबिन नामक पदार्थ का निर्माण करती है। जिससे मनुष्य के रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है और उसकी मृत्यु हो जाती है। CO प्रदूषक है क्योंकि यह हीमोग्लोबिन के साथ अभिक्रिया करता है

 

4.9 लाइकेन - जैव-सूचक

लाइकेन वायु प्रदूषण के जैव-सूचक होते हैं। जहां वायु प्रदूषण अधिक होता है वहां पर लाइकेन नहीं उगते हैं - इसलिए ये शहरों के पास नहीं पाए जाते हैं। लाइकेन थैलोफाइटा प्रकार की वनस्पति है, जो कवक तथा शैवाल दोनों से मिलकर बने होते हैं।

 

4.10 जैव उपचारीकरण (Bioremediation)

जैव उपचारीकरण कचरा प्रबंधन की एक प्रणाली है, जिसमें प्रदूषण को निष्प्रभावी करने के लिए सूक्ष्म जीवों का प्रयोग किया जाता है। इस प्रबंधन प्रणाली में सूक्ष्म जीव कचरे में उपस्थित विषैले पदार्थों से विष को कम करते हैं, या बिलकुल खत्म कर देते हैं।

 

4.11 जल कुंभी

जल कुंभी (Eichhornia crassipes) गर्म देशों में पाया जाने वाला एक जलीय खरपतवार है। जो जलीय पौधों की फैमली पोंटेडेरिएसी का सदस्य है। यह पौधा यूरोप को छोड़कर सारी दुनिया में पाया जाता है। जल कुंभी औद्योगिक बहिःस्राव से होने वाले जल प्रदूषण को नियंत्रित करती है। पार्थेनियम को गाजर घास या चटक चांदनी के नाम से भी जाना जाता है - यह एकवर्षीय शाकीय पौधा है और जीव जन्तुओं के लिए अत्यन्त विनाशकारी खरपतवार है।

 

4.12 नाइट्रस ऑक्साइड - सामान्यतः वायु प्रदूषक नहीं

नाइट्रस ऑक्साइड (N2O) जिसको सामान्यतया लाफिंग गैस के रूप में जाना जाता है। यह अम्लीय वर्षा (Acid Rain) के लिए भी जाना जाता है। इसके अतिरिक्त इसका उपयोग निश्चेतक (Anesthesia) के रूप में किया जाता है। यह रॉकेट में ऑक्सीकारक के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। नाइट्रस ऑक्साइड सामान्यतः वायु प्रदूषक नहीं है (सामान्य मात्रा में)।

 

4.13 हाइड्रोजन - सबसे स्वच्छ ईंधन

ईंधनों में से हाइड्रोजन से सबसे कम पर्यावरण प्रदूषण होता है। यह ऊर्जा का एक स्वच्छ और प्रभावी माध्यम है। इसका व्यापक उपयोग जीवाश्म ईंधन के विकल्प के रूप में किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा हाइड्रोजन ऊर्जा के रोड मैप तैयार करने के लिए 'राष्ट्रीय हाइड्रोजन ऊर्जा बोर्ड' का गठन किया गया है।

 

4.14 प्रतिवर्ती परासरण - जल उपचार

प्रतिवर्ती परासरण (Reverse Osmosis) जल शुद्ध करने की एक तकनीक है। इसमें अर्ध पारगम्य झिल्ली का प्रयोग कर जल में विलेय आयन एवं अन्य ठोस कड़ों को जल से अलग कर लिया जाता है। प्रतिवर्ती परासरण जल में विलेय अशुद्धियों के साथ-साथ जीवाणुओं को भी दूर करता है। प्रतिवर्ती परासरण जल प्रदूषण का उपचार है

 

4.15 सबसे अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करने वाला

उत्पादन उद्योग (Manufacturing Industry) सबसे अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करता है।

 

4.16 जल में लोहे और मैगनीज

क्लोरीनीकरण द्वारा जल में उपस्थित लोहे और मैगनीज को नहीं हटाया जा सकता क्योंकि क्लोरीन का उपयोग जल में उपस्थित सूक्ष्मजीवों को मारने के लिए किया जाता है। लोहे और मैगनीज को हटाया जा सकता है: आयन विनिमय प्रक्रिया, निस्पंदक ऑक्सीकरण क्रिया, चूना सोडा प्रक्रिया, मैगनीज जियोलाइट प्रक्रिया द्वारा।

 

4.17 भारत में आर्सेनिक समस्या

भारत में आर्सेनिक समस्या का मुख्य कारण प्रभावित क्षेत्रों में भू-जल का अत्यधिक दोहन है। सामान्यतः रासायनिक कीटनाशकों तथा चूहे आदि मारने की दवाओं का लेड आर्सिनेट और कॉपर आर्सिनेट के रूप में प्रयोग करने से भूजल में आर्सेनिक प्रदूषण हुआ है।

 

4.18 ऑटोमोबाइल में कार्बन मोनोऑक्साइड

ऑटोमोबाइल की परिचालन स्थिति में एग्जहॉस्ट गैस में कार्बन मोनोऑक्साइड का अंश निष्क्रिय चालन (Idle Running) में अधिकतम होता है।

 

4.19 मार्बल कैंसर

मार्बल कैंसर अम्लीय वर्षा (Acid Rain) के कारण मार्बल का क्षरण है। जब वर्षा जल का pH मान 5.6 से कम हो तो वर्षा अम्लीय वर्षा होती है। इसका मुख्य कारण वर्षा जल में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड व नाइट्रस ऑक्साइड का मिला होना है। अम्ल वर्षा के कारण संगमरमर से बनी इमारतों का धीरे-धीरे क्षरण होता है तो इस क्रिया को संगमरमर कैंसर कहा जाता है। अंतर्राष्ट्रीय अम्ल वर्षा सूचना केन्द्र ओस्लो में है।

 

4.20 गैर-जैवनिम्नीकरणीय अपशिष्ट

गैर-जैवनिम्नीकरणीय अपशिष्ट वे पदार्थ होते हैं जो जीवाणुओं द्वारा अपघटित नहीं होते हैं। यह कई वर्षों तक अपनी मूल अवस्था में बने रहते हैं। जैसे - प्लास्टिक, पॉलिथीन, कांच आदि।

 


 

5. भू-ऊष्मन एवं जलवायु परिवर्तन

 

5.1 वैश्विक तापन

वैश्विक तापन (Global Warming) पूर्व-औद्योगिक काल से देखी गई पृथ्वी की सतह का दीर्घकालिक तापन है जो मानव गतिविधियों, मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन के जलने के कारण होता है - जो पृथ्वी के वायुमंडल में ऊष्मा-अवशोषण करने वाले ग्रीनहाउस गैस के स्तर को बढ़ाता है। वैश्विक तापन जलवायु परिवर्तन का कारण बनता है जो व्यापक बाढ़ और चरम मौसम के रूप में पृथ्वी पर जीवन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करता है। इसके कारण विश्व के ग्लेशियर पिघल सकते हैं जो समुद्र के जल स्तर को बढ़ा देंगे और कई छोटे द्वीप डूब सकते हैं। वैश्विक तापन के संबंध में दोनों कथन A और B सही हैं।

 

5.2 ग्रीनहाउस गैसें

ग्रीनहाउस गैसें वायुमंडल में गर्मी फैलाती हैं जिससे पृथ्वी गर्म होती है और ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनती हैं। ग्रीन हाउस गैसों में से सर्वाधिक ऊष्मा-रोधी क्षमता क्लोरोफ्लोरो कार्बन (CFC) गैस में होती है - कार्बन डाईऑक्साइड की तुलना में एक हजार गुना ज्यादा हानिकारक है। हरित ग्रीन (ग्रीन हाउस) गैसों में कार्बन डाईऑक्साइड सबसे प्रमुख गैस है। CO2 के अलावा CH4 (मीथेन) ग्रीन हाउस गैस है।

 

5.3 ग्रीनहाउस प्रभाव

ग्रीनहाउस प्रभाव एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसके द्वारा वातावरण में उपस्थित गैसें वातावरण के तापमान को बढ़ाने में मदद करती हैं। ग्रीन हाउस गैसों में कार्बन डाईऑक्साइड तथा मीथेन प्रमुख है। ग्रीन हाउस प्रभाव की खोज 1824 में जोसेफ फुरियर ने की थी, तथा इसका प्रयोग सन् 1858 में जॉन टिंडल ने किया। ग्रीनहाउस प्रभाव का अर्थ है वायुमंडल गैसों के कारण सौर ऊर्जा को रोकना

 

5.4 वैश्विक तापन - कम प्रभाव

वैश्विक तापन के प्रभावों में से वनस्पति में प्रकाश-संश्लेषण की दर में कमी होना सबसे कम प्रभाव होने की संभावना है।

 

5.5 भू-तापीय ऊर्जा

भू-तापीय ऊर्जा वह ऊर्जा है, जो पृथ्वी में संग्रहित तापन से निकलती है। यह ऊर्जा ग्रहों के मूल गठन से लेकर आंतरिक खनिज के रेडियोधर्मी क्षय से उत्पन्न होती है। भू-तापीय ऊर्जा वह ऊर्जा स्रोत है जो सबसे कम भूमंडलीय तापमान बढ़ाता है

 


 

6. ओजोन परत

 

6.1 ओजोन के प्रमुख तथ्य

ओजोन (O3) ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बना हुआ एक अणु है। ओजोन परत समताप मंडल में लगभग 15-35 km ऊंचाई के बीच पायी जाती है। ओजोन साधारण वायु में अत्यल्प मात्रा में पायी जाती है। इसका अधिकतम सान्द्रण समुद्रतल से लगभग 30 किमी ऊंचाई पर अधिक होता है। इसका निर्माण ऑक्सीजन पर सूर्य की अल्ट्रावायलेट विकिरण के प्रभाव से होता है।

 

6.2 ओजोन परत निर्माण अभिक्रिया

ओजोन परत ऑक्सीजन और पराबैंगनी किरणों की अभिक्रिया से बनती है। अभिक्रिया: O2 + hv → O + O; O + O2 + M → O3 + M (जहां M = वायुमंडल में उपस्थित N2 अथवा अन्य गैसें)। यह परत सूर्य के प्रकाश से आने वाली पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है और इस प्रकार पृथ्वी पर रहने वाले जीव-जन्तुओं की हानिकारक विकिरणों से रक्षा करती है।

 

6.3 ओजोन क्षरण के प्रभाव

ओजोन परत में कमी के कारण अधिक मात्रा में पराबैंगनी किरणें पृथ्वी तक पहुंचती हैं - जिसके कारण मनुष्य में त्वचा कैंसर होता है। इसके साथ ही पराबैंगनी किरणों से आंखों तथा प्रतिरक्षी तंत्र को भी नुकसान पहुंचता है। ज्ञातव्य है कि रेफ्रीजरेटर, अग्निशमन यंत्र तथा एरोसोल स्प्रे में उपयोग किए जाने वाले क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन (CFC) से ओजोन परत का ह्रास होता है।

 

6.4 ओजोन परत को नष्ट करने वाले पदार्थ

क्लोरीन (CFC - क्लोरोफ्लोरोकार्बन) ओजोन परत को नष्ट करता है। CFC में हैलान गैसें और कार्बन टेट्राक्लोराइड शामिल हैं। ये रसायन ओजोन गैस को ऑक्सीजन में विघटित कर देते हैं। क्लोरीन का 1 परमाणु ओजोन (O3) के हजारों अणुओं को नष्ट कर सकता है

 

6.5 मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल

मॉन्ट्रियल सम्मेलन 1987 के तहत ओजोन परत के संरक्षण हेतु समझौता हुआ जिसके तहत क्लोरो-फ्लोरो कार्बन (CFC) तथा हैलोजन गैसों पर नियंत्रण लगाने की बात की गयी जिनसे ओजोन परत की हानि होती थी। वातावरण में क्लोरो-फ्लोरोकार्बन उत्सर्जन पर प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रथम प्रोटोकॉल मॉन्ट्रियल में बना था

 

6.6 महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण संधियां

स्टॉकहोम सम्मेलन (1972): UNEP की स्थापना; 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की घोषणा।

रियो (पृथ्वी) सम्मेलन (1992): एजेंडा 21 की स्वीकृति; UNFCCC का जन्म।

हेलसिंकी सम्मेलन (1974): सामुद्रिक पर्यावरण की सुरक्षा।

कानकुन सम्मेलन (2010): हरित जलवायु कोश (Green Climate Fund) की स्थापना का निर्णय।

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987): ओजोन परत की सुरक्षा हेतु CFC पर नियंत्रण।

 


 

7. विविध

 

7.1 संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य (SDGs)

दिए गए सभी विकल्प संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में शामिल हैं: शून्य भुखमरी, जलवायु कारवाई, जल के नीचे जीवन, गुणवत्तापरक शिक्षा। SDGs वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र की 70वीं बैठक (पेरिस) में अगले 15 वर्षों के लिए निर्धारित किए गए।

 

7.2 अर्थ आवर

अर्थ आवर वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड फॉर नेचर (WWF) की वार्षिक पहल है, जो वर्ष 2007 में शुरू हुई थी। यह प्रतिवर्ष मार्च माह के अंतिम शनिवार को आयोजित किया जाता है। इस दौरान दुनियाभर के लोग एक घंटे के लिए अनावश्यक लाइट बंद करके जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एकजुट होते हैं। यह जलवायु परिवर्तन की रोकथाम और ऊर्जा संरक्षण के लिए जमीनी स्तर पर विश्व का सबसे बड़ा आंदोलन है। थीम 2022: शेप आवर फ्यूचर।

 

7.3 कंटेनर-आधारित स्वच्छता

कंटेनर-आधारित स्वच्छता एक स्वच्छता प्रणाली को संदर्भित करता है, जिसमें शौचालय मानव मल को सील करने, हटाने योग्य कार्ट्रिज में एकत्रित करता है जिसे उपचार केंद्रों पर ले जाया जाता है।

 

7.4 सिक्किम - पूर्णतया ऑर्गेनिक बनने वाला प्रथम राज्य

सिक्किम पूर्णतया कार्बनिक (ऑर्गेनिक) बनने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। कृषि भूमि का लगभग 75,000 हेक्टेयर भूमि पर जैविक प्रथा लागू करने वाला भारत का प्रथम राज्य बना।

 

7.5 ठोस अपशिष्ट निपटान - कम पसंदीदा

नगर पालिका द्वारा ठोस अपशिष्ट के निपटान में कम से कम पसंदीदा तकनीक ब्रिकेटिंग है। जो आदातर हरे कचरे और अन्य कार्बनिक पदार्थों से बने होते हैं। इसका उपयोग बिजली उत्पादन एवं खाना पकाने के लिए इंधन के रूप में किया जाता है।

 

7.6 जैव अवक्रमणीय अपशिष्ट का रूपांतरण

जैव अवक्रमणीय अवशिष्ट को जीवाणुओं की सहायता से उपयोगी पदार्थों में बदला जा सकता है। कुछ जीवाणु जैसे बैसिलस मायक्वाइड्स, बैसिलस रेमोसस, बैसिलस बलगेरिस आदि पौधों और जंतुओं के मृत शरीर पर आक्रमण करके उनके जटिल यौगिक को सरल पदार्थों में बदल देते हैं। कुछ जीवाणु कार्बनिक पदार्थों जैसे गोबर, मल व पेड़ पौधों की सड़ी गली पत्तियों को खाद तथा ह्यूमस में बदलकर उपयोगी बनाते हैं।

 


 

8. महत्वपूर्ण एक-पंक्ति तथ्य - SSC CGL के लिए

  1. पारिस्थितिकी शब्द सर्वप्रथम अर्नेस्ट हेकेल द्वारा प्रयुक्त
  2. हेनरी चांडलर काउल्स 1896 में इंडियाना ड्यून्स में पादपों के जीवन का अध्ययन करने के लिए प्रसिद्ध
  3. पौधा जैविक घटक है - अजैविक नहीं
  4. खड़ी फसल बायोमास के रूप में मापी जाती है
  5. वायवीय = ऑक्सीजन आसानी से उपलब्ध; अवायवीय = ऑक्सीजन आसानी से उपलब्ध नहीं
  6. सहभोजिता = एक को लाभ, दूसरा अप्रभावित
  7. परजीविता = एक को लाभ, दूसरे को हानि
  8. शाव परजीविता = दूसरों की देखभाल का उपयोग करके अपने बच्चों को पालने की प्रजनन रणनीति
  9. भारतीय गौर = भारत में सबसे बड़ी जंगली मवेशी प्रजाति; नागरहोल राष्ट्रीय उद्यान में पाई जाती है
  10. रियो सम्मेलन 1992 = रियो डी जेनेरो, ब्राजील; 116 देश; 3 बाध्यकारी समझौते
  11. गोल्डन पांडा पुरस्कार = विश्व का सर्वोच्च पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार; ग्रीन ऑस्कर भी कहते हैं
  12. IUCN रेड डेटा बुक = संकटग्रस्त पौधों और जीवों की जानकारी; 1964 में शुरू; HQ ग्लैंड, जेनेवा के निकट
  13. चिपको आंदोलन का नारा "पारिस्थितिकी की स्थायी अर्थव्यवस्था है" = सुन्दरलाल बहुगुणा ने गढ़ा
  14. विश्व आर्द्रभूमि दिवस = 2 फरवरी (रामसर कन्वेंशन 1971)
  15. हॉट स्पॉट शब्द सर्वप्रथम नॉर्मन मायर्स ने 1988 में प्रयोग किया
  16. भारत के जैव-विविधता हॉटस्पॉट = पश्चिमी घाट, पूर्वी हिमालय
  17. ग्रेट बैरियर रीफ = प्रशांत महासागर; 2300 किमी; क्वींसलैंड, ऑस्ट्रेलिया
  18. ISO 14001 = पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली
  19. JFM = 1988 की राष्ट्रीय वन नीति में शुरू
  20. प्रोजेक्ट टाइगर 1 अप्रैल 1973 को इंदिरा गांधी द्वारा शुरू; वर्तमान में 54 टाइगर रिजर्व
  21. जिम कॉर्बेट = भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान (1936), उत्तराखंड
  22. सरिस्का = अलवर, राजस्थान; 1973 में टाइगर रिजर्व
  23. रणथम्भौर = सवाई माधोपुर, राजस्थान; 1980 में राष्ट्रीय उद्यान
  24. बांदीपुर = कर्नाटक; 1974 से टाइगर रिजर्व
  25. साइलेंट वैली = केरल, पलक्कड़ जिला
  26. नामदफा = अरुणाचल प्रदेश; पूर्वी हिमालयी उप-क्षेत्र में सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र
  27. नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व = भारत का पहला बायोस्फीयर रिजर्व 1986 में; 2012 में UNESCO विश्व धरोहर
  28. ब्रह्मगिरि वन्यजीव अभयारण्य = कोडागू जिला, कर्नाटक
  29. लोधी गार्डन = पहले "द लेडी विलिंगडन पार्क" के नाम से जाना जाता था
  30. चीता पुनर्वास सितंबर 2022 = मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 8 चीते
  31. भारत में वर्तमान में 106 राष्ट्रीय उद्यान और 565 वन्यजीव अभयारण्य हैं
  32. ई-अपशिष्ट नियम 2022 = 1 अप्रैल 2023 से प्रभावी
  33. जल प्रदूषण अधिनियम 1974 = संसद द्वारा पारित
  34. सीवेज उपचार = अपशिष्ट जल के लिए उपचार प्रक्रिया
  35. फ्लिपफ्लॉपी = महासागर जागरूकता के लिए विश्व की पहली प्लास्टिक अपशिष्ट से बनी नौका
  36. स्लज = अपशिष्ट जल पर तैरने वाले ठोस पदार्थ; ठोस अपशिष्ट भी कहते हैं
  37. CO (कार्बन मोनोऑक्साइड) प्रदूषक है क्योंकि यह हीमोग्लोबिन के साथ अभिक्रिया करता है
  38. लाइकेन = वायु प्रदूषण का जैव-सूचक; प्रदूषित शहरों के पास नहीं पाया जाता
  39. जैव उपचारीकरण = प्रदूषकों को निष्प्रभावी करने के लिए सूक्ष्म जीवों का उपयोग
  40. जल कुंभी = औद्योगिक जल प्रदूषण को नियंत्रित करती है
  41. N2O (नाइट्रस ऑक्साइड) = सामान्यतः वायु प्रदूषक नहीं; लाफिंग गैस भी कहते हैं
  42. हाइड्रोजन = सबसे कम पर्यावरण प्रदूषण करने वाला ईंधन
  43. प्रतिवर्ती परासरण = जल प्रदूषण उपचार की तकनीक
  44. उत्पादन उद्योग = सबसे अधिक ठोस अपशिष्ट उत्पन्न करता है
  45. क्लोरीनीकरण जल से लोहा और मैगनीज नहीं हटा सकता
  46. भारत में आर्सेनिक समस्या = मुख्यतः प्रभावित क्षेत्रों में भू-जल का अत्यधिक दोहन
  47. ऑटोमोबाइल में CO = निष्क्रिय चालन (Idle Running) में अधिकतम
  48. मार्बल कैंसर = अम्लीय वर्षा के कारण मार्बल का क्षरण
  49. गैर-जैवनिम्नीकरणीय अपशिष्ट = प्लास्टिक, पॉलिथीन, कांच
  50. ग्रीनहाउस प्रभाव की खोज जोसेफ फुरियर 1824 में; प्रयोग जॉन टिंडल 1858 में
  51. CFC = ग्रीनहाउस गैसों में सर्वाधिक ऊष्मा-रोधी क्षमता वाली
  52. CO2 सबसे प्रमुख ग्रीनहाउस गैस; CH4 दूसरी ग्रीनहाउस गैस
  53. भू-तापीय ऊर्जा = पृथ्वी का तापमान सबसे कम बढ़ाने वाला ऊर्जा स्रोत
  54. ओजोन (O3) = 3 ऑक्सीजन परमाणुओं से बना
  55. ओजोन परत = समताप मंडल में 15-35 किमी ऊंचाई पर
  56. ओजोन क्षरण से त्वचा कैंसर होता है
  57. ओजोन परत ऑक्सीजन और पराबैंगनी किरणों की अभिक्रिया से बनती है
  58. CFC ओजोन परत को नष्ट करता है; 1 क्लोरीन परमाणु O3 के हजारों अणु नष्ट करता है
  59. मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987 = CFC पर प्रतिबंध का पहला प्रोटोकॉल
  60. स्टॉकहोम सम्मेलन 1972 = UNEP की स्थापना; पर्यावरण दिवस = 5 जून
  61. संयुक्त राष्ट्र SDGs 2015 = पेरिस में अगले 15 वर्षों के लिए निर्धारित
  62. अर्थ आवर = WWF की पहल; 2007 में शुरू; मार्च के अंतिम शनिवार
  63. सिक्किम = भारत का पहला पूर्णतया ऑर्गेनिक राज्य
  64. ब्रिकेटिंग = नगरपालिका द्वारा ठोस अपशिष्ट निपटान की कम पसंदीदा तकनीक
  65. जीवाणु जैव अवक्रमणीय अपशिष्ट को उपयोगी पदार्थों में बदलने में मदद करते हैं