एसएससी सीजीएल
भारतीय राजव्यवस्था
भारतीय राजव्यवस्था SSC CGL, CHSL, CPO, Railway, CDS, NDA एवं सभी राज्य PCS परीक्षाओं में सर्वाधिक अंक दिलाने वाला विषय है। प्रतिवर्ष इस विषय से 4 से 8 प्रश्न सीधे पूछे जाते हैं। मूल अधिकार, संवैधानिक संशोधन, संसद, राष्ट्रपति, आपातकालीन प्रावधान, पंचायती राज एवं संवैधानिक निकायों से प्रश्न बार-बार आते हैं। जो विद्यार्थी संविधान की संरचना एवं महत्वपूर्ण अनुच्छेद व संशोधन संख्याएं याद कर लेता है, वह इस भाग में पूरे अंक प्राप्त कर सकता है।
1. भारत में संवैधानिक विकास
1.1 परिचय
भारत के स्वतंत्र गणराज्य बनने से पहले लगभग 175 वर्षों तक इसके शासन को अनेक ब्रिटिश अधिनियमों और विनियमों ने आकार दिया। इन अधिनियमों की तिथियाँ, विशेषताएं एवं उनसे जुड़े व्यक्तित्व परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं।
1.2 प्रमुख अधिनियम एवं उनकी विशेषताएं
| अधिनियम / घटना | वर्ष | मुख्य विशेषताएं |
|---|---|---|
| रेगुलेटिंग एक्ट | 1773 | ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को नियंत्रित करने का पहला कदम; गवर्नर-जनरल का पद सृजित; वारेन हेस्टिंग्स पहले गवर्नर-जनरल; कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना (1774) |
| पिट्स इंडिया एक्ट | 1784 | बोर्ड ऑफ कंट्रोल का गठन; राजनीतिक नियंत्रण क्राउन को, व्यापारिक कार्य कंपनी को; पहली बार "भारत में ब्रिटिश संपत्ति" शब्द प्रयोग |
| चार्टर एक्ट | 1813 | कंपनी का व्यापार एकाधिकार समाप्त (चाय और चीन व्यापार को छोड़कर); ईसाई मिशनरियों को भारत में अनुमति |
| चार्टर एक्ट | 1833 | बंगाल के गवर्नर-जनरल को भारत का गवर्नर-जनरल बनाया — पहले लॉर्ड विलियम बेंटिक; कंपनी की व्यापारिक गतिविधियां समाप्त; भारत औपचारिक रूप से ब्रिटिश उपनिवेश बना |
| चार्टर एक्ट | 1853 | अंतिम चार्टर एक्ट; पहली बार विधायी और कार्यकारी कार्यों का पृथक्करण; सिविल सेवाओं के लिए खुली प्रतियोगी परीक्षा |
| गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट | 1858 | कंपनी शासन स्थायी रूप से समाप्त; ब्रिटिश क्राउन का प्रत्यक्ष शासन; भारत सचिव का पद; भारत परिषद (15 सदस्य); वायसराय का पद — पहले लॉर्ड कैनिंग |
| इंडियन कौंसिल्स एक्ट (मार्ले-मिंटो सुधार) | 1909 | मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन की शुरुआत — सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व; पहली बार भारतीयों को वायसराय की कार्यकारी परिषद में स्थान |
| गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार) | 1919 | प्रांतों में द्विशासन प्रणाली (Dyarchy) — विषयों को आरक्षित एवं हस्तांतरित श्रेणियों में बांटा; केंद्र में द्विसदनीय विधानमंडल; लोक सेवा आयोग की स्थापना |
| गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट | 1935 | स्वतंत्रता से पूर्व का सबसे बड़ा अधिनियम; प्रांतीय स्वायत्तता; संघीय न्यायालय; RBI; 1950 का अधिकांश संविधान इसी से लिया गया |
| क्रिप्स मिशन | 1942 | सर स्टैफोर्ड क्रिप्स आए; WWII के बाद डोमिनियन स्टेटस का प्रस्ताव; भारतीय नेताओं ने अस्वीकार किया |
| कैबिनेट मिशन | 1946 | संविधान सभा का ढांचा प्रस्तावित किया; संविधान-निर्माण प्रक्रिया का वास्तविक आरंभ |
| माउंटबेटन योजना | 3 जून 1947 | भारत का दो अधिराज्यों — भारत और पाकिस्तान में विभाजन की घोषणा |
| भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम | 1947 | ब्रिटिश संसद ने 18 जुलाई 1947 को पारित किया; दो अधिराज्यों का निर्माण; रियासतों पर ब्रिटिश सर्वोच्चता समाप्त |
1.3 संवैधानिक विकास की कालक्रम
- 1773 — रेगुलेटिंग एक्ट — कंपनी का पहला विनियमन
- 1784 — पिट्स इंडिया एक्ट — बोर्ड ऑफ कंट्रोल
- 1833 — चार्टर एक्ट — भारत ब्रिटिश उपनिवेश बना
- 1853 — अंतिम चार्टर एक्ट — सिविल सेवा परीक्षा
- 1858 — क्राउन का शासन — वायसराय प्रणाली आरंभ
- 1909 — मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन
- 1919 — प्रांतों में द्विशासन
- 1935 — सबसे व्यापक अधिनियम
- 1942 — क्रिप्स मिशन असफल
- 1946 — कैबिनेट मिशन — संविधान सभा का गठन
- 1947 — स्वतंत्रता और विभाजन
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — संवैधानिक विकास
- भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल: लॉर्ड विलियम बेंटिक (चार्टर एक्ट 1833)
- भारत के प्रथम वायसराय: लॉर्ड कैनिंग (GoI Act 1858)
- स्वतंत्र भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल: सी. राजगोपालाचारी
- मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन: Indian Councils Act 1909
- 1950 संविधान का अधिकांश भाग: GoI Act 1935 से लिया गया
- भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम: 18 जुलाई 1947
- माउंटबेटन योजना: 3 जून 1947
2. संविधान सभा
2.1 गठन एवं मूल तथ्य
- संविधान सभा की मांग सर्वप्रथम एम. एन. रॉय ने 1934 में की
- इसे आधिकारिक रूप से 1935 में INC ने मांग की
- कैबिनेट मिशन योजना (1946) ने संविधान सभा के गठन को स्वीकृति दी
- प्रारंभ में निर्वाचित सदस्यों की संख्या: 389 (292 प्रांतों से + 93 रियासतों से + 4 मुख्य आयुक्त प्रांतों से)
- विभाजन के बाद सदस्यता घटकर: 299
- संविधान सभा की प्रथम बैठक: 9 दिसंबर 1946
- प्रथम बैठक में अस्थायी अध्यक्ष: डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा
- 11 दिसंबर 1946 को स्थायी अध्यक्ष निर्वाचित: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- उपाध्यक्ष: एच. सी. मुखर्जी एवं वी. टी. कृष्णमाचारी
- संवैधानिक सलाहकार: सर बी. एन. राव
- कुल सत्र: 11 सत्र
- संविधान अंगीकृत: 26 नवंबर 1949 (संविधान दिवस / विधि दिवस)
- संविधान लागू: 26 जनवरी 1950 (गणतंत्र दिवस)
- निर्माण में लगा समय: 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन
- संविधान पर हस्ताक्षर करने वाले सदस्य: 284 (299 में से)
2.2 प्रारूप समिति (Drafting Committee)
| सदस्य | भूमिका |
|---|---|
| डॉ. बी. आर. अम्बेडकर | अध्यक्ष — "भारतीय संविधान के जनक" |
| अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर | सदस्य |
| एन. गोपालस्वामी अय्यंगार | सदस्य |
| के. एम. मुंशी | सदस्य |
| टी. टी. कृष्णमाचारी | सदस्य (बी. एल. मित्तर के स्थान पर) |
| मोहम्मद सादुल्लाह | सदस्य |
| डी. पी. खेतान | सदस्य (1948 में निधन; स्थान पर T.T.K.) |
2.3 अन्य महत्वपूर्ण समितियां
| समिति | अध्यक्ष |
|---|---|
| संघ शक्ति समिति | जवाहरलाल नेहरू |
| संघ संविधान समिति | जवाहरलाल नेहरू |
| प्रांतीय संविधान समिति | सरदार वल्लभभाई पटेल |
| मूल अधिकार एवं अल्पसंख्यक सलाहकार समिति | सरदार वल्लभभाई पटेल |
| प्रक्रिया नियम समिति | डॉ. राजेंद्र प्रसाद |
| संचालन समिति | डॉ. राजेंद्र प्रसाद |
| ध्वज समिति | जे. बी. कृपलानी |
| प्रारूप समिति | डॉ. बी. आर. अम्बेडकर |
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — संविधान सभा
- संविधान सभा की पहली मांग: एम. एन. रॉय, 1934
- अस्थायी अध्यक्ष: डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा
- स्थायी अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
- प्रारूप समिति अध्यक्ष: डॉ. बी. आर. अम्बेडकर
- संविधान अंगीकृत: 26 नवंबर 1949
- संविधान लागू: 26 जनवरी 1950
- निर्माण समय: 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन
- हस्ताक्षरकर्ता सदस्य: 284
3. भारतीय संविधान के स्रोत
| देश / स्रोत | उधार ली गई विशेषताएं |
|---|---|
| 🇬🇧 ब्रिटेन (UK) | संसदीय शासन; विधि का शासन; कैबिनेट प्रणाली; लोकसभा अध्यक्ष का पद; एकल नागरिकता; द्विसदनीय विधानमंडल; रिट (संशोधित रूप में) |
| 🇺🇸 अमेरिका (USA) | प्रस्तावना की अवधारणा ("We the People"); मूल अधिकार; न्यायिक समीक्षा; न्यायपालिका की स्वतंत्रता; राष्ट्रपति पर महाभियोग; लिखित संविधान |
| 🇮🇪 आयरलैंड | राज्य के नीति निर्देशक तत्व (DPSP); निर्वाचक मंडल द्वारा राष्ट्रपति का अप्रत्यक्ष निर्वाचन; राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा में मनोनीत सदस्य |
| 🇨🇦 कनाडा | अर्ध-संघीय व्यवस्था (सशक्त केंद्र); अवशिष्ट शक्तियां केंद्र को; राज्यपाल की नियुक्ति विधि; सर्वोच्च न्यायालय का परामर्शी क्षेत्राधिकार |
| 🇦🇺 ऑस्ट्रेलिया | समवर्ती सूची; अंतर्राज्यीय व्यापार एवं वाणिज्य की स्वतंत्रता; दोनों सदनों की संयुक्त बैठक |
| 🇩🇪 जर्मनी (वाइमर गणराज्य) | आपातकालीन प्रावधान; आपातकाल में मूल अधिकारों का निलंबन |
| 🇫🇷 फ्रांस | गणराज्य की अवधारणा; स्वतंत्रता, समता, बंधुता के आदर्श; विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया |
| 🇷🇺 सोवियत संघ (USSR) | मूल कर्तव्य; पंचवर्षीय योजनाएं; प्रस्तावना में सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक न्याय के आदर्श |
| 🇿🇦 दक्षिण अफ्रीका | संविधान संशोधन प्रक्रिया (अनुच्छेद 368); राज्यसभा सदस्यों के निर्वाचन की विधि |
| 🇯🇵 जापान | "विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया" — अनुच्छेद 21 का आधार |
🧠 स्मृति युक्ति — स्रोत: "BUSICAGSF" = Britain, USA, South Africa, Ireland, Canada, Australia, Germany, Soviet Union, France
- DPSP → आयरलैंड
- आपातकालीन प्रावधान → जर्मनी
- मूल कर्तव्य → सोवियत संघ
- न्यायिक समीक्षा → अमेरिका
- संसदीय शासन → ब्रिटेन
4. संविधान के भाग एवं अनुसूचियां
4.1 संविधान की संक्षिप्त जानकारी
| विशेषता | मूल (1950) | वर्तमान |
|---|---|---|
| कुल भाग | 22 | 25 |
| कुल अनुच्छेद | 395 | ~448 |
| कुल अनुसूचियां | 8 | 12 |
4.2 महत्वपूर्ण भाग
| भाग | अनुच्छेद | विषय |
|---|---|---|
| भाग I | 1–4 | संघ और उसका राज्यक्षेत्र |
| भाग II | 5–11 | नागरिकता |
| भाग III | 12–35 | मूल अधिकार |
| भाग IV | 36–51 | राज्य के नीति निर्देशक तत्व |
| भाग IV-A | 51A | मूल कर्तव्य (42वें संशोधन द्वारा जोड़ा) |
| भाग V | 52–151 | संघ — राष्ट्रपति, संसद आदि |
| भाग VI | 152–237 | राज्य |
| भाग IX | 243–243O | पंचायतें (73वां संशोधन) |
| भाग IX-A | 243P–243ZG | नगरपालिकाएं (74वां संशोधन) |
| भाग XI | 245–263 | केंद्र-राज्य संबंध |
| भाग XV | 324–329 | निर्वाचन |
| भाग XVII | 343–351 | राजभाषा |
| भाग XVIII | 352–360 | आपातकालीन प्रावधान |
| भाग XX | 368 | संविधान का संशोधन |
4.3 सभी 12 अनुसूचियां
| अनुसूची | विषय |
|---|---|
| 1वीं | राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नाम |
| 2वीं | संवैधानिक पदाधिकारियों के वेतन एवं भत्ते |
| 3वीं | शपथ एवं प्रतिज्ञान के प्रारूप |
| 4वीं | राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को राज्यसभा में सीटों का आवंटन |
| 5वीं | अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातियों का प्रशासन |
| 6वीं | असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन |
| 7वीं | तीन सूचियां — संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची |
| 8वीं | 22 मान्यता प्राप्त भाषाएं |
| 9वीं | न्यायिक समीक्षा से बाहर रखे गए कानून (प्रथम संशोधन 1951) |
| 10वीं | दल-बदल विरोधी कानून (52वां संशोधन 1985) |
| 11वीं | पंचायतों की शक्तियां — 29 विषय (73वां संशोधन) |
| 12वीं | नगरपालिकाओं की शक्तियां — 18 विषय (74वां संशोधन) |
4.4 सातवीं अनुसूची — तीन सूचियां
| सूची | विषयों की संख्या | कानून बनाने का अधिकार | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| संघ सूची (सूची I) | 98 विषय (मूलतः 97) | केवल संसद | रक्षा, विदेश मामले, मुद्रा, रेलवे, परमाणु ऊर्जा, बंदरगाह |
| राज्य सूची (सूची II) | 61 विषय (मूलतः 66) | केवल राज्य विधानमंडल | पुलिस, सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि, भूमि, स्थानीय सरकार |
| समवर्ती सूची (सूची III) | 52 विषय (मूलतः 47) | दोनों; विरोध की स्थिति में संसद को वरीयता | शिक्षा, विवाह, वन, श्रम संघ, दंड विधि, दिवालियापन |
5. संविधान की प्रस्तावना
5.1 प्रस्तावना का पाठ
"हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को: न्याय — सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक; स्वतंत्रता — विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की; समता — प्रतिष्ठा और अवसर की; तथा उन सब में बंधुता — बढ़ाने के लिए जो व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करे..."
5.2 प्रमुख शब्दों का अर्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| प्रभुत्व सम्पन्न (Sovereign) | भारत पूर्णतः स्वतंत्र है; किसी भी बाहरी शक्ति के अधीन नहीं; सर्वोच्च सत्ता जनता में निहित |
| समाजवादी (Socialist) | 42वें संशोधन 1976 द्वारा जोड़ा गया; संसाधनों का न्यायसंगत वितरण; मिश्रित अर्थव्यवस्था |
| पंथनिरपेक्ष (Secular) | 42वें संशोधन 1976 द्वारा जोड़ा गया; राज्य का कोई राजकीय धर्म नहीं; सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार |
| लोकतंत्रात्मक (Democratic) | जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा शासन; स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव |
| गणराज्य (Republic) | राष्ट्राध्यक्ष (राष्ट्रपति) निर्वाचित; पद वंशानुगत नहीं |
| न्याय | सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय — रूसी क्रांति के आदर्शों से प्रेरित |
| स्वतंत्रता | विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता |
| समता | सभी नागरिकों को समान प्रतिष्ठा और अवसर |
| बंधुता | सभी नागरिकों में भाईचारे की भावना; व्यक्ति की गरिमा सुनिश्चित करना |
5.3 प्रस्तावना के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य
- प्रस्तावना को संविधान की "आत्मा एवं मर्म" कहा जाता है — के. एम. मुंशी
- सर्वोच्च न्यायालय ने बेरुबारी मामले (1960) में कहा — प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है
- सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानंद भारती मामले (1973) में निर्णय दिया — प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है
- "समाजवादी" और "पंथनिरपेक्ष" शब्द 42वें संशोधन, 1976 द्वारा जोड़े गए
- "राष्ट्र की एकता" को बदलकर "राष्ट्र की एकता और अखंडता" किया गया — 42वें संशोधन, 1976 द्वारा
- प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार संशोधन — 42वें संशोधन द्वारा
- "We the People" की अवधारणा अमेरिकी संविधान से प्रेरित है
🧠 स्मृति युक्ति — प्रस्तावना के मुख्य शब्द: "SSSDR — SLSB" = Soveign (प्रभुत्व), Socialist (समाजवादी), Secular (पंथनिरपेक्ष), Democratic (लोकतंत्र), Republic (गणराज्य) = Samajik nyay (न्याय), Liberty (स्वतंत्रता), Samata (समता), Bandhuta (बंधुता)
6. नागरिकता
6.1 संवैधानिक प्रावधान
- संविधान के भाग II में अनुच्छेद 5 से 11 तक नागरिकता से संबंधित प्रावधान
- वर्तमान में नागरिकता का संचालन नागरिकता अधिनियम 1955 द्वारा
- भारत में केवल एकल नागरिकता का प्रावधान (अमेरिका की तरह दोहरी नागरिकता नहीं)
- अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता को विनियमित करने का अधिकार देता है
6.2 नागरिकता प्राप्त करने के तरीके (नागरिकता अधिनियम 1955)
- जन्म द्वारा — 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्मा व्यक्ति; या 1 जुलाई 1987 के बाद भारत में जन्मा जिसके माता या पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक हो
- वंश द्वारा — भारत के बाहर भारतीय नागरिक माता या पिता से जन्मा (पंजीकरण की शर्तों के साथ)
- पंजीकरण द्वारा — विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति; भारतीय नागरिक के जीवनसाथी (7 वर्ष निवास के बाद)
- देशीयकरण द्वारा — वह विदेशी नागरिक जो भारत में 11 वर्ष निवास कर चुका हो (अंतिम 12 माह निरंतर)
- क्षेत्र सम्मिलन द्वारा — जब कोई नया क्षेत्र भारत में शामिल हो
6.3 नागरिकता की समाप्ति
- त्याग — नागरिक स्वेच्छा से भारतीय नागरिकता छोड़ता है
- समाप्ति — किसी अन्य देश की नागरिकता स्वतः स्वीकार करने पर
- वंचन — सरकार धोखे, राजद्रोह या अपराधिक गतिविधि द्वारा प्राप्त नागरिकता छीन सकती है
6.4 OCI और PIO
- PIO (Person of Indian Origin) कार्ड 2015 में OCI में विलय कर दिया गया
- OCI (Overseas Citizen of India) — आजीवन बहु-प्रवेश वीज़ा; दोहरी नागरिकता नहीं; OCI धारक भारतीय चुनाव में मत नहीं दे सकते; संवैधानिक पद नहीं संभाल सकते; कृषि भूमि नहीं खरीद सकते
- भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है
7. मूल अधिकार (अनुच्छेद 12–35)
7.1 परिचय
मूल अधिकार वाद योग्य हैं — इन्हें न्यायालयों में लागू कराया जा सकता है। मूलतः संविधान में 7 मूल अधिकार थे। 44वें संशोधन 1978 द्वारा संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों से हटाकर अनुच्छेद 300A के अंतर्गत कानूनी अधिकार के रूप में रखा गया। अब भारत में 6 मूल अधिकार हैं।
7.2 छः मूल अधिकार
| अधिकार | अनुच्छेद | मुख्य प्रावधान |
|---|---|---|
| समता का अधिकार | 14–18 | अनु. 14: विधि के समक्ष समता एवं विधि का समान संरक्षण; अनु. 15: धर्म, वंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध; अनु. 16: सार्वजनिक नियोजन में समान अवसर; अनु. 17: अस्पृश्यता का उन्मूलन; अनु. 18: उपाधियों का उन्मूलन |
| स्वतंत्रता का अधिकार | 19–22 | अनु. 19: छः स्वतंत्रताएं; अनु. 20: दोषसिद्धि से संरक्षण; अनु. 21: जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता; अनु. 21A: 6–14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त शिक्षा; अनु. 22: मनमाने गिरफ्तारी से संरक्षण |
| शोषण के विरुद्ध अधिकार | 23–24 | अनु. 23: मानव व्यापार और बेगार का निषेध; अनु. 24: 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों का कारखानों, खदानों में कार्य निषेध |
| धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार | 25–28 | अनु. 25: अंतःकरण की स्वतंत्रता एवं धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता; अनु. 26: धार्मिक मामलों के प्रबंध की स्वतंत्रता; अनु. 27: किसी धर्म के प्रचार के लिए कर न देने की स्वतंत्रता; अनु. 28: राज्य वित्तपोषित शिक्षण संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा का निषेध |
| संस्कृति एवं शिक्षा का अधिकार | 29–30 | अनु. 29: अल्पसंख्यकों की भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार; अनु. 30: अल्पसंख्यकों को शैक्षणिक संस्था स्थापित करने एवं प्रशासन करने का अधिकार |
| संवैधानिक उपचारों का अधिकार | 32–35 | अनु. 32: मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए सर्वोच्च न्यायालय में जाने का अधिकार — डॉ. अम्बेडकर ने इसे "संविधान का हृदय एवं आत्मा" कहा |
7.3 पांच संवैधानिक रिट
| रिट | शाब्दिक अर्थ | उद्देश्य |
|---|---|---|
| बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) | "शरीर उपस्थित करो" | अवैध हिरासत के विरुद्ध; बंदी व्यक्ति को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना |
| परमादेश (Mandamus) | "हम आदेश देते हैं" | किसी सार्वजनिक अधिकारी, प्राधिकरण या निचली अदालत को कानूनी कर्तव्य पालन का निर्देश |
| उत्प्रेषण (Certiorari) | "प्रमाणित किया जाए" | किसी मामले को निचली अदालत से उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करना; अवैध आदेशों को रद्द करना |
| प्रतिषेध (Prohibition) | "रोको" | निचली अदालत या न्यायाधिकरण को अपने अधिकार क्षेत्र से परे जाने से रोकना; केवल न्यायिक एवं अर्ध-न्यायिक निकायों के विरुद्ध |
| अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto) | "किस अधिकार से" | किसी सार्वजनिक पद पर अवैध रूप से बैठे व्यक्ति को चुनौती देना |
🧠 स्मृति युक्ति — पांच रिट: "HMCPQ" = He Must Come Promptly for Questioning = Habeas Corpus, Mandamus, Certiorari, Prohibition, Quo Warranto
अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 में अंतर:
- अनुच्छेद 32 (सर्वोच्च न्यायालय) — केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर रिट
- अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय) — मूल अधिकारों के साथ-साथ किसी भी कानूनी अधिकार के उल्लंघन पर रिट; व्यापक क्षेत्राधिकार
7.4 महत्वपूर्ण तथ्य
- अनुच्छेद 12 — मूल अधिकारों के संदर्भ में "राज्य" की परिभाषा
- अनुच्छेद 13 — मूल अधिकारों से असंगत कानून शून्य होगा
- नागरिक एवं विदेशी दोनों को उपलब्ध: अनुच्छेद 14, 20, 21, 22, 23, 24, 25–28
- केवल नागरिकों को उपलब्ध: अनुच्छेद 15, 16, 19, 29, 30
- राष्ट्रीय आपातकाल में मूल अधिकार निलंबित हो सकते हैं — परंतु अनुच्छेद 20 और 21 कभी भी निलंबित नहीं हो सकते
- अनुच्छेद 32 स्वयं एक मूल अधिकार है
7.5 ऐतिहासिक संवैधानिक मामले
- केशवानंद भारती मामला (1973) — मूल ढांचे का सिद्धांत; संसद मूल ढांचे को नष्ट नहीं कर सकती
- मेनका गांधी मामला (1978) — अनुच्छेद 21 का विस्तार; जीवन एवं स्वतंत्रता को छीनने की प्रक्रिया "उचित, न्यायसंगत एवं तर्कसंगत" होनी चाहिए
- मिनर्वा मिल्स मामला (1980) — मूल अधिकारों और DPSP के बीच संतुलन मूल ढांचे का भाग
- इंद्रा साहनी मामला (1992) — आरक्षण पर 50% की सीमा; OBC के लिए क्रीमी लेयर की अवधारणा
- एस. आर. बोम्मई मामला (1994) — राष्ट्रपति शासन पर सख्त दिशानिर्देश; संघवाद मूल ढांचे का भाग
- के. एस. पुट्टास्वामी मामला (2017) — निजता का अधिकार अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मूल अधिकार घोषित
8. मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51A)
8.1 पृष्ठभूमि
- मूल कर्तव्य 42वें संशोधन, 1976 द्वारा संविधान में जोड़े गए
- स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर जोड़े गए
- भाग IV-A, अनुच्छेद 51A में स्थित
- सोवियत संघ के संविधान से प्रेरित
- मूलतः 10 कर्तव्य जोड़े गए; 86वें संशोधन, 2002 द्वारा 11वां कर्तव्य जोड़ा गया
- ये कर्तव्य गैर-वाद योग्य हैं — न्यायालय में लागू नहीं कराए जा सकते
- ये केवल नागरिकों पर लागू होते हैं, विदेशियों पर नहीं
8.2 सभी 11 मूल कर्तव्य
- संविधान का पालन करना; राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना
- स्वतंत्रता संग्राम के उन आदर्शों को संजोना जिन्होंने हमें प्रेरित किया
- भारत की प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना
- देश की रक्षा करना और राष्ट्रीय सेवा करना
- सभी लोगों में समरसता और भाईचारे की भावना विकसित करना; महिलाओं की गरिमा के विरुद्ध प्रथाओं का त्याग
- हमारी समन्वित संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को महत्त्व देना
- प्राकृतिक पर्यावरण — वन, झील, नदी, वन्यजीव — की रक्षा करना
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद एवं सुधार की भावना विकसित करना
- सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना; हिंसा से दूर रहना
- व्यक्तिगत और सामूहिक जीवन के हर क्षेत्र में उत्कर्ष की दिशा में प्रयास करना
- 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना — माता-पिता/अभिभावकों का कर्तव्य (86वें संशोधन 2002 द्वारा जोड़ा गया)
🧠 स्मृति युक्ति: 11वां कर्तव्य (शिक्षा) उसी 86वें संशोधन (2002) द्वारा जोड़ा गया जिसने अनुच्छेद 21A (6–14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त शिक्षा — मूल अधिकार) जोड़ा।
9. राज्य के नीति निर्देशक तत्व (DPSP)
9.1 परिचय
- संविधान के भाग IV में अनुच्छेद 36 से 51
- आयरलैंड के संविधान से लिया गया
- गैर-वाद योग्य — न्यायालय में लागू नहीं करा सकते परंतु शासन में मौलिक
- संविधान का समाजवादी एवं कल्याणकारी तत्व दर्शाते हैं
- राज्य पर सकारात्मक दायित्व — राज्य "क्या करेगा"
9.2 DPSP का वर्गीकरण
| श्रेणी | अनुच्छेद | प्रमुख प्रावधान |
|---|---|---|
| समाजवादी सिद्धांत | 38, 39, 39A, 41, 42, 43, 43A, 47 | अनु. 39: पुरुष और महिला के लिए समान काम के लिए समान वेतन; अनु. 39A: समान न्याय और मुफ्त कानूनी सहायता; अनु. 41: काम, शिक्षा और सार्वजनिक सहायता का अधिकार; अनु. 42: प्रसूति राहत; अनु. 43: जीवनयापन मजदूरी; अनु. 43A: प्रबंधन में कर्मकारों की भागीदारी; अनु. 47: पोषण स्तर उठाना |
| गांधीवादी सिद्धांत | 40, 43, 43B, 46, 47, 48 | अनु. 40: ग्राम पंचायतों का संगठन; अनु. 43: कुटीर उद्योगों का प्रोत्साहन; अनु. 43B: सहकारी समितियों का प्रोत्साहन (97वां संशोधन); अनु. 46: SC/ST के शैक्षणिक-आर्थिक हितों की अभिवृद्धि; अनु. 47: नशीले पदार्थों का निषेध; अनु. 48: कृषि और पशुपालन |
| उदारवादी-बौद्धिक सिद्धांत | 44, 45, 48A, 49, 50, 51 | अनु. 44: समान नागरिक संहिता (UCC); अनु. 45: बाल्यकाल देखभाल; अनु. 48A: पर्यावरण संरक्षण (42वां संशोधन); अनु. 49: राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों की रक्षा; अनु. 50: न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक करना; अनु. 51: अंतर्राष्ट्रीय शांति |
9.3 मूल अधिकार बनाम DPSP — तुलना तालिका
| विशेषता | मूल अधिकार | DPSP |
|---|---|---|
| प्रकृति | वाद योग्य (न्यायालय लागू करा सकते हैं) | गैर-वाद योग्य |
| दायित्व का प्रकार | नकारात्मक (राज्य नहीं करेगा) | सकारात्मक (राज्य करेगा) |
| केंद्र बिंदु | व्यक्तिगत अधिकार | समाज/समुदाय का कल्याण |
| संवैधानिक स्थान | भाग III (अनु. 12–35) | भाग IV (अनु. 36–51) |
| स्रोत | USA और UK से | आयरलैंड से |
| आपातकाल में | निलंबित हो सकते हैं (अनु. 20, 21 को छोड़कर) | निलंबित नहीं हो सकते |
10. राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति
10.1 राष्ट्रपति — मुख्य तथ्य (अनुच्छेद 52–78)
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| अनुच्छेद | अनु. 52 — "भारत का एक राष्ट्रपति होगा" |
| योग्यता | भारत का नागरिक; न्यूनतम 35 वर्ष आयु; लोकसभा का सदस्य बनने योग्य; लाभ का कोई पद नहीं |
| निर्वाचन विधि | अप्रत्यक्ष निर्वाचन — निर्वाचक मंडल द्वारा |
| निर्वाचक मंडल के सदस्य | संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य + सभी राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य (मनोनीत नहीं, MLC नहीं) |
| कार्यकाल | 5 वर्ष |
| शपथ | भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा (अनुपस्थिति में वरिष्ठतम न्यायाधीश) |
| महाभियोग | अनुच्छेद 61 के अंतर्गत; किसी भी सदन से; 14 दिन का नोटिस; उस सदन के कुल सदस्यों के 2/3 बहुमत से |
| वेतन | ₹5 लाख प्रतिमाह (2018 में संशोधित) |
| निवास | राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली |
10.2 राष्ट्रपति की वीटो शक्तियां
| वीटो का प्रकार | अर्थ |
|---|---|
| पूर्ण वीटो (Absolute Veto) | विधेयक को अनुमति स्थायी रूप से रोकना — विधेयक कानून नहीं बनता; निजी सदस्य विधेयकों पर प्रयोग |
| निलंबनकारी वीटो (Suspensive Veto) | विधेयक को पुनर्विचार के लिए संसद को लौटाना; यदि संसद दोबारा पास करे — अनुमति देनी होगी; धन विधेयक पर नहीं |
| जेब वीटो (Pocket Veto) | कोई कार्रवाई नहीं — विधेयक अनिश्चितकाल तक लंबित; भारतीय राष्ट्रपति का सबसे व्यापक जेब वीटो |
| योग्य वीटो (Qualified Veto) | भारतीय राष्ट्रपति को उपलब्ध नहीं (यह अमेरिकी राष्ट्रपति को उपलब्ध है) |
10.3 राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियां
- अनुच्छेद 352 — राष्ट्रीय आपातकाल (युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह)
- अनुच्छेद 356 — राज्य आपातकाल/राष्ट्रपति शासन (राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल)
- अनुच्छेद 360 — वित्तीय आपातकाल (भारत की वित्तीय स्थिरता को खतरा)
10.4 उपराष्ट्रपति (अनुच्छेद 63–71)
- संसद के दोनों सदनों के सदस्यों द्वारा निर्वाचन — निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्य
- यह राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल से भिन्न है (राष्ट्रपति में मनोनीत नहीं)
- कार्यकाल: 5 वर्ष
- राज्यसभा के पदेन सभापति
- राष्ट्रपति पद रिक्त होने या राष्ट्रपति के असमर्थ होने पर कार्यवाहक राष्ट्रपति
- हटाने की प्रक्रिया: राज्यसभा प्रभावी बहुमत से प्रस्ताव + लोकसभा की सहमति; 14 दिन का पूर्व नोटिस आवश्यक
10.5 राष्ट्रपति बनाम राज्यपाल — तुलना तालिका
| विशेषता | राष्ट्रपति | राज्यपाल |
|---|---|---|
| नियुक्ति | अप्रत्यक्ष निर्वाचन | राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति |
| हटाने की प्रक्रिया | महाभियोग (अनुच्छेद 61) | राष्ट्रपति की इच्छा पर (अनुच्छेद 156) |
| कार्यकाल | निश्चित 5 वर्ष | कोई निश्चित कार्यकाल नहीं — राष्ट्रपति की इच्छा पर |
| शपथ | भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा | संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा |
| माफी की शक्ति | मृत्युदंड माफ कर सकते हैं | मृत्युदंड माफ नहीं कर सकते |
| मंत्रिपरिषद | केंद्रीय मंत्रिपरिषद | राज्य मंत्रिपरिषद |
| आपातकाल | अनु. 352, 356, 360 उद्घोषित कर सकते हैं | केवल अनु. 356 की सिफारिश कर सकते हैं |
| विवेकाधीन शक्ति | बहुत सीमित | राष्ट्रपति से अधिक |
11. भारत की संसद
11.1 संरचना
भारत की संसद में तीन भाग हैं: राष्ट्रपति + राज्यसभा + लोकसभा (अनुच्छेद 79)
11.2 लोकसभा बनाम राज्यसभा — तुलना
| विशेषता | लोकसभा | राज्यसभा |
|---|---|---|
| अन्य नाम | जनता का सदन / निचला सदन | राज्यों की परिषद / उच्च सदन |
| अनुच्छेद | अनुच्छेद 81 | अनुच्छेद 80 |
| अधिकतम सदस्य संख्या | 552 | 250 (238 निर्वाचित + 12 मनोनीत) |
| वर्तमान संख्या | 543 | 245 |
| कार्यकाल | 5 वर्ष (पहले भी भंग हो सकती है) | स्थायी सदन; प्रत्येक सदस्य 6 वर्ष; 1/3 प्रत्येक 2 वर्ष में सेवानिवृत्त |
| पीठासीन अधिकारी | अध्यक्ष (Speaker) — सदस्यों द्वारा निर्वाचित | सभापति = भारत के उपराष्ट्रपति |
| सदस्यता के लिए न्यूनतम आयु | 25 वर्ष | 30 वर्ष |
| गणपूर्ति (Quorum) | कुल सदस्यता का 1/10वां | कुल सदस्यता का 1/10वां |
| धन विधेयक | केवल लोकसभा में प्रस्तुत; RS केवल 14 दिन रोक सकती है | धन विधेयक पेश या अस्वीकार नहीं कर सकती |
| अविश्वास प्रस्ताव | हां — मंत्रिपरिषद को हटा सकती है | नहीं |
| विशेष शक्ति | राष्ट्रीय आपातकाल अनुमोदन | राज्य सूची पर कानून (अनु. 249); नई अखिल भारतीय सेवाएं (अनु. 312) |
11.3 संसद के सत्र
- बजट सत्र — फरवरी से मई (वर्ष का सबसे लंबा सत्र)
- मानसून सत्र — जुलाई से अगस्त
- शीतकालीन सत्र — नवंबर से दिसंबर
- प्रत्येक वर्ष न्यूनतम 2 सत्र आवश्यक; दो सत्रों के बीच अधिकतम 6 माह का अंतर
- सत्रावसान (Prorogation) — सत्र समाप्त करना (राष्ट्रपति, कैबिनेट की सलाह पर)
- स्थगन (Adjournment) — बैठक का अस्थायी निलंबन (अध्यक्ष की शक्ति)
- विघटन (Dissolution) — केवल लोकसभा का; राज्यसभा कभी भंग नहीं होती
11.4 लोकसभा अध्यक्ष
- लोकसभा सदस्यों द्वारा अपने में से निर्वाचित
- पूरी लोकसभा के कार्यकाल तक पद पर रहते हैं
- मत बराबर होने पर निर्णायक मत (Casting Vote) देते हैं (सामान्य मतदान में भाग नहीं)
- हटाने की प्रक्रिया: लोकसभा के तत्कालीन सभी सदस्यों के प्रभावी बहुमत से प्रस्ताव (14 दिन का पूर्व नोटिस आवश्यक)
- लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष: जी. वी. मावलंकर
- लोकसभा की प्रथम महिला अध्यक्ष: मीरा कुमार
- सांसदों के विशेषाधिकार: अनुच्छेद 105
11.5 धन विधेयक (अनुच्छेद 110)
- विशेष रूप से कर, सरकारी उधार, संचित निधि, आकस्मिकता निधि से संबंधित
- लोकसभा अध्यक्ष द्वारा प्रमाणित
- केवल लोकसभा में पेश किया जा सकता है; राज्यसभा पेश, संशोधन या अस्वीकार नहीं कर सकती
- राज्यसभा को 14 दिन के भीतर लौटाना होगा (सुझाव मान्य या अमान्य — लोकसभा बाध्य नहीं)
- राष्ट्रपति केवल अनुमति या अस्वीकृति दे सकते हैं — धन विधेयक वापस नहीं कर सकते
11.6 संसद की संयुक्त बैठक (अनुच्छेद 108)
- राष्ट्रपति तीन स्थितियों में बुलाते हैं:
- विधेयक किसी सदन द्वारा अस्वीकृत
- दूसरे सदन ने अस्वीकार्य संशोधनों के साथ पास किया
- विधेयक 6 माह से अधिक समय से लंबित
- लोकसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में
- उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत से पास
- अब तक भारत में 3 बार संयुक्त बैठक:
- दहेज प्रतिषेध विधेयक (1961)
- बैंकिंग सेवा आयोग (निरसन) विधेयक (1978)
- आतंकवाद निरोधक विधेयक/POTA (2002)
- नहीं बुलाई जा सकती: धन विधेयक; संवैधानिक संशोधन विधेयक; वित्त विधेयक
12. राज्यपाल
12.1 राज्यपाल के बारे में मुख्य तथ्य
- राज्य का संवैधानिक प्रमुख (अनुच्छेद 153)
- राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त (अनुच्छेद 155)
- राष्ट्रपति की इच्छा पर पद पर रहता है (अनुच्छेद 156) — कार्यकाल की निश्चितता नहीं
- योग्यता: भारत का नागरिक; न्यूनतम 35 वर्ष; संसद या विधानमंडल का सदस्य नहीं; लाभ का पद नहीं
- वेतन राज्य की संचित निधि से
- एक व्यक्ति दो या अधिक राज्यों का राज्यपाल हो सकता है (अनुच्छेद 153)
12.2 राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियां
- अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश
- राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयक को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित करना (अनुच्छेद 200)
- विधानमंडल में स्पष्ट बहुमत न होने पर मुख्यमंत्री की नियुक्ति
- विश्वास खो देने पर मंत्रिपरिषद को बर्खास्त करना
- राज्य विधानसभा का विघटन
13. राज्य विधानमंडल
13.1 विधानसभा (Vidhan Sabha)
- राज्य विधानमंडल का निचला सदन (प्रत्यक्ष निर्वाचित)
- अधिकतम सदस्य: 500; न्यूनतम 60
- अपवाद: गोवा (40), सिक्किम (32), मिजोरम (40), पुदुचेरी (30)
- कार्यकाल: 5 वर्ष (विघटन के अधीन)
- न्यूनतम आयु: 25 वर्ष
- पीठासीन अधिकारी: अध्यक्ष (Speaker)
13.2 विधान परिषद (Vidhan Parishad)
- राज्य विधानमंडल का उच्च सदन (सभी राज्यों में नहीं)
- वर्तमान में 6 राज्यों में विधान परिषद: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना
- अधिकतम सदस्य: विधानसभा की कुल संख्या का 1/3; न्यूनतम 40
- स्थायी सदन — कभी भंग नहीं होता; प्रत्येक 2 वर्ष में 1/3 सेवानिवृत्त; प्रत्येक सदस्य 6 वर्ष कार्य
- न्यूनतम आयु: 30 वर्ष
- सृजन/उन्मूलन: राज्य विधानसभा के अनुरोध पर संसद द्वारा (अनुच्छेद 169)
14. न्यायपालिका
14.1 सर्वोच्च न्यायालय बनाम उच्च न्यायालय — तुलना
| विशेषता | सर्वोच्च न्यायालय | उच्च न्यायालय |
|---|---|---|
| स्थापित | अनुच्छेद 124 | अनुच्छेद 214 |
| न्यायाधीश | मुख्य न्यायाधीश + अधिकतम 33 अन्य | मुख्य न्यायाधीश + अन्य न्यायाधीश |
| नियुक्ति | कॉलेजियम की सिफारिश पर राष्ट्रपति | CJI और राज्यपाल के परामर्श से राष्ट्रपति |
| हटाने की प्रक्रिया | संसद द्वारा महाभियोग (अनु. 124(4)) | सर्वोच्च न्यायालय के समान (अनु. 218) |
| सेवानिवृत्ति आयु | 65 वर्ष | 62 वर्ष |
| रिट क्षेत्राधिकार | अनु. 32 — केवल मूल अधिकारों के लिए | अनु. 226 — मूल अधिकार + कोई भी कानूनी अधिकार |
| अभिलेख न्यायालय | हां — अनु. 129 | हां — अनु. 215 |
14.2 न्यायिक समीक्षा एवं न्यायिक सक्रियता
- न्यायिक समीक्षा — कानूनों और कार्यपालिका की कार्रवाइयों की संवैधानिक वैधता जांचने की शक्ति; अनुच्छेद 13, 32, 226, 246 से प्राप्त; अमेरिका से उधार ली गई
- न्यायिक सक्रियता — न्यायालय न्याय सुनिश्चित करने के लिए परंपरागत भूमिका से आगे जाते हैं
- जनहित याचिका (PIL) — कोई भी नागरिक सार्वजनिक हित के मामलों में सर्वोच्च या उच्च न्यायालय जा सकता है; भारत में न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी. आर. कृष्णा अय्यर द्वारा प्रारंभ
14.3 लोक अदालत
- विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत स्थापित
- लोक अदालत का निर्णय सिविल न्यायालय का डिक्री माना जाता है — अंतिम और बाध्यकारी
- लोक अदालत के निर्णय के विरुद्ध किसी भी न्यायालय में अपील नहीं होती
- कोई न्यायालय शुल्क नहीं — निपटारे पर वापस किया जाता है
15. संघ और राज्य
15.1 अनुच्छेद 1 से 4
| अनुच्छेद | प्रावधान |
|---|---|
| अनुच्छेद 1 | भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ होगा ("Federation" नहीं) |
| अनुच्छेद 2 | संसद नए राज्यों को संघ में प्रवेश दे सकती या नए राज्य स्थापित कर सकती है |
| अनुच्छेद 3 | संसद नए राज्य का निर्माण कर सकती है; राज्यों के नाम, क्षेत्र और सीमाएं बदल सकती है; राज्य विधानमंडल के विचार लिए जाएंगे परंतु वे बाध्यकारी नहीं |
| अनुच्छेद 4 | अनुच्छेद 2 और 3 के अंतर्गत बने कानून संवैधानिक संशोधन नहीं माने जाएंगे |
15.2 केंद्रशासित प्रदेश
वर्तमान में भारत में 8 केंद्रशासित प्रदेश:
- दिल्ली (NCT) — विधानमंडल सहित
- पुदुचेरी — विधानमंडल सहित
- जम्मू-कश्मीर — विधानमंडल सहित (J&K Reorganisation Act 2019)
- चंडीगढ़
- दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव (2020 में विलय)
- अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह
- लक्षद्वीप
- लद्दाख
16. पंचायती राज एवं शहरी स्थानीय निकाय
16.1 73वां संवैधानिक संशोधन (1992) — पंचायती राज
- भाग IX (अनुच्छेद 243 से 243O) और 11वीं अनुसूची (29 विषय) जोड़े गए
- पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक दर्जा दिया
- त्रिस्तरीय व्यवस्था: ग्राम पंचायत → पंचायत समिति (खंड/तालुका स्तर) → जिला परिषद
- ग्राम सभा — गांव के सभी मतदाताओं की आम सभा; पंचायती राज का आधार
- आरक्षण: SC/ST के लिए आनुपातिक; महिलाओं के लिए न्यूनतम 1/3 सीटें (अनेक राज्यों में 50% तक)
- कार्यकाल: 5 वर्ष
- राज्य निर्वाचन आयोग — चुनाव संपन्न कराता है
- राज्य वित्त आयोग — प्रत्येक 5 वर्ष में वित्तीय स्थिति की समीक्षा
पंचायती राज पर महत्वपूर्ण समितियां:
- बलवंत राय मेहता समिति (1957) — त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था की सिफारिश
- अशोक मेहता समिति (1977) — द्विस्तरीय व्यवस्था की सिफारिश
- एल. एम. सिंघवी समिति (1986) — पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा देने की सिफारिश
- पहली पंचायती राज व्यवस्था: राजस्थान (नागौर जिला), 2 अक्टूबर 1959 (PM नेहरू द्वारा उद्घाटन)
16.2 74वां संवैधानिक संशोधन (1992) — नगरीय स्थानीय निकाय
- भाग IX-A और 12वीं अनुसूची (18 विषय) जोड़े गए
- शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा दिया
- तीन प्रकार: नगर पंचायत (परिवर्तनकालीन क्षेत्र), नगर परिषद (छोटे शहरी क्षेत्र), नगर निगम (बड़े शहर)
- 3 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों में वार्ड समितियां अनिवार्य
- SC/ST और महिलाओं के लिए न्यूनतम 1/3 आरक्षण
17. आपातकालीन प्रावधान
17.1 तीन प्रकार के आपातकाल
| प्रकार | अनुच्छेद | आधार | अवधि | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|---|---|
| राष्ट्रीय आपातकाल | 352 | युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह (44वें संशोधन द्वारा "आंतरिक अशांति" से बदला) | प्रारंभ में 6 माह; संसद द्वारा प्रत्येक 6 माह में नवीनीकरण | केंद्रीय मंत्रिमंडल की लिखित सलाह पर राष्ट्रपति; 1 माह के भीतर संसद की विशेष बहुमत से स्वीकृति; लोकसभा साधारण बहुमत से रद्द कर सकती है; अनु. 20 और 21 को छोड़कर मूल अधिकार निलंबित |
| राज्य आपातकाल (राष्ट्रपति शासन) | 356 | राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल | प्रारंभ में 6 माह; अधिकतम 3 वर्ष | राज्यपाल की रिपोर्ट पर; संसद की साधारण बहुमत से स्वीकृति; राज्य विधानमंडल भंग या निलंबित; उच्च न्यायालय अप्रभावित |
| वित्तीय आपातकाल | 360 | भारत या उसके किसी भाग की वित्तीय साख को खतरा | जब तक रद्द न हो | 2 माह के भीतर संसद की साधारण बहुमत से स्वीकृति; न्यायाधीशों सहित सभी सरकारी कर्मचारियों का वेतन घटाया जा सकता है; भारत में कभी भी उद्घोषित नहीं |
17.2 राष्ट्रीय आपातकाल — 3 बार उद्घोषित
- 1962 — भारत-चीन युद्ध के दौरान
- 1971 — भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान
- 1975 — "आंतरिक अशांति" के आधार पर — सर्वाधिक विवादास्पद; PM इंदिरा गांधी; 1977 तक चला
18. संवैधानिक संशोधन
18.1 संशोधन प्रक्रिया (अनुच्छेद 368)
- साधारण बहुमत — सामान्य विधान द्वारा
- विशेष बहुमत — उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3 + प्रत्येक सदन की कुल सदस्यता का बहुमत
- विशेष बहुमत + कम से कम आधे राज्य विधानमंडलों की संपुष्टि — संघीय प्रावधानों के लिए
18.2 महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन
| संशोधन | वर्ष | मुख्य परिवर्तन |
|---|---|---|
| पहला | 1951 | 9वीं अनुसूची जोड़ी; भूमि सुधार कानूनों को न्यायिक समीक्षा से बाहर |
| 7वां | 1956 | भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन; भाग A, B, C, D राज्यों का भेद समाप्त |
| 24वां | 1971 | मूल अधिकारों सहित संविधान के किसी भी भाग को संशोधित करने की संसद की शक्ति की पुष्टि |
| 42वां | 1976 | "लघु संविधान"; "समाजवादी, पंथनिरपेक्ष" प्रस्तावना में; मूल कर्तव्य (अनु. 51A); DPSP को FR से ऊपर; अनु. 48A, 39A जोड़े; आपातकाल काल में |
| 44वां | 1978 | आपातकाल के बाद लोकतंत्र बहाल; संपत्ति का अधिकार FR से हटाया (अनु. 300A); "आंतरिक अशांति" → "सशस्त्र विद्रोह"; अनु. 20 और 21 कभी निलंबित नहीं |
| 52वां | 1985 | 10वीं अनुसूची — दल-बदल विरोधी कानून |
| 61वां | 1988 | मतदान आयु 21 से 18 वर्ष |
| 73वां | 1992 | पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा; भाग IX; 11वीं अनुसूची (29 विषय) |
| 74वां | 1992 | शहरी स्थानीय निकायों को संवैधानिक दर्जा; भाग IX-A; 12वीं अनुसूची (18 विषय) |
| 86वां | 2002 | अनु. 21A (6–14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त शिक्षा); 11वां मूल कर्तव्य |
| 91वां | 2003 | मंत्रिपरिषद का आकार लोकसभा/विधानसभा की संख्या के 15% से अधिक नहीं |
| 101वां | 2016 | GST — अनु. 246A, 269A, 279A जोड़े; GST परिषद का गठन |
| 102वां | 2018 | NCBC को संवैधानिक दर्जा — अनु. 338B और 342A |
| 103वां | 2019 | EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) को 10% आरक्षण |
| 104वां | 2020 | SC/ST के लिए आरक्षण 10 वर्ष और बढ़ाया; नामांकित एंग्लो-इंडियन सीटें समाप्त |
| 106वां | 2023 | महिला आरक्षण विधेयक — लोकसभा एवं विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए (जनगणना और परिसीमन के बाद) |
🧠 स्मृति युक्ति — प्रमुख संशोधन:
- 42 = अधिकतम (सर्वाधिक परिवर्तन — "लघु संविधान")
- 44 = बहाली (लोकतंत्र बहाल — संपत्ति अधिकार FR से हटाया)
- 52 = दल-बदल (दल-बदल विरोधी कानून)
- 61 = 18 पर वोट (मतदान आयु)
- 86 = स्कूल (शिक्षा का अधिकार)
- 101 = GST (एक देश, एक कर)
- 103 = EWS (10% आरक्षण)
19. संवैधानिक निकाय
| निकाय | अनुच्छेद | मुख्य बिंदु |
|---|---|---|
| भारत निर्वाचन आयोग | 324 | स्वतंत्र निकाय; CEC + निर्वाचन आयुक्त; CEC को SC न्यायाधीश की तरह हटाया जाता है; संसद, राज्य विधानमंडल, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति के चुनाव संचालित करता है |
| संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) | 315 | सिविल सेवाओं के लिए परीक्षाएं; अध्यक्ष और सदस्य राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त; 65 वर्ष तक सेवा |
| भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) | 148 | "सार्वजनिक पर्स का प्रहरी"; केंद्र और राज्य सरकारों के खातों का लेखापरीक्षण; SC न्यायाधीश की तरह हटाया जाता है; सेवानिवृत्ति के बाद सरकार के अंतर्गत पद नहीं; रिपोर्ट राष्ट्रपति/राज्यपाल को |
| भारत के महान्यायवादी (Attorney General) | 76 | भारत के प्रथम कानून अधिकारी; SC में सरकार का प्रतिनिधित्व; SC न्यायाधीश बनने योग्य; राष्ट्रपति की इच्छा पर पद; संसद में भाग ले सकते हैं पर मत नहीं दे सकते |
| वित्त आयोग | 280 | राष्ट्रपति द्वारा प्रत्येक 5 वर्ष में गठित; केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के वितरण की सिफारिश; 16वां वित्त आयोग 2026–31 के लिए |
| अनुसूचित जाति राष्ट्रीय आयोग | 338 | SC के लिए सुरक्षा उपायों की जांच; राष्ट्रपति को रिपोर्ट |
| अनुसूचित जनजाति राष्ट्रीय आयोग | 338A | ST के लिए सुरक्षा उपायों की जांच |
| पिछड़ा वर्ग राष्ट्रीय आयोग | 338B | 102वें संशोधन 2018 द्वारा संवैधानिक दर्जा |
| अंतर्राज्यीय परिषद | 263 | राज्यों के बीच समन्वय; PM की अध्यक्षता |
20. निर्वाचन व्यवस्था
20.1 भारत निर्वाचन आयोग
- स्थापना: 25 जनवरी 1950 (राष्ट्रीय मतदाता दिवस)
- अनुच्छेद 324 — निर्वाचनों का अधीक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण
- मूलतः एकल सदस्यीय निकाय; 1989 में बहु-सदस्यीय बनाया
- प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त: सुकुमार सेन
- टी. एन. शेषन (CEC 1990–96) ने आदर्श आचार संहिता को सख्ती से लागू किया
20.2 दल-बदल विरोधी कानून (10वीं अनुसूची)
- 52वें संशोधन, 1985 द्वारा जोड़ा गया
- सदस्य को अयोग्य ठहराया जाएगा यदि:
- स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़े
- पार्टी के व्हिप के विरुद्ध मतदान करे या अनुपस्थित रहे
- विलय छूट: यदि किसी विधायी दल के 2/3 सदस्य किसी अन्य दल में विलय करें
- अयोग्यता का निर्णय: सदन के अध्यक्ष/सभापति द्वारा
20.3 NOTA और EVM
- NOTA (उपरोक्त में से कोई नहीं) — 2013 में राज्य विधानसभा चुनावों में; 2014 लोकसभा से सभी के लिए
- EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) — 1982 में पहली बार (परूर, केरल); 2004 से राष्ट्रीय स्तर पर
- VVPAT — 2019 आम चुनावों से राष्ट्रीय स्तर पर
21. भारत के राष्ट्रीय प्रतीक
| प्रतीक | विवरण | अतिरिक्त जानकारी |
|---|---|---|
| राष्ट्रीय ध्वज | तिरंगा — केसरिया, सफेद, हरा + अशोक चक्र (24 तीलियां, नौसेना नीला) | अपनाया: 22 जुलाई 1947; पिंगली वेंकैया द्वारा डिजाइन; अनुपात 2:3 |
| राष्ट्रीय चिन्ह | चार सिंह, धर्म चक्र; "सत्यमेव जयते" | अपनाया: 26 जनवरी 1950; सारनाथ के अशोक स्तंभ से; मुंडक उपनिषद से |
| राष्ट्रगान | "जन गण मन" — रबींद्रनाथ टैगोर | अपनाया: 24 जनवरी 1950; पूर्ण: 52 सेकंड |
| राष्ट्रगीत | "वंदे मातरम" — बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय (आनंदमठ उपन्यास से) | अपनाया: 24 जनवरी 1950; राष्ट्रगान के समान दर्जा |
| राष्ट्रीय पशु | बंगाल बाघ (Panthera tigris tigris) | 1973 में शेर से बदला; प्रोजेक्ट टाइगर उसी वर्ष |
| राष्ट्रीय पक्षी | मोर (Pavo cristatus) | 1 फरवरी 1963 को घोषित |
| राष्ट्रीय फूल | कमल (Nelumbo nucifera) | पवित्रता का प्रतीक |
| राष्ट्रीय फल | आम (Mangifera indica) | "फलों का राजा" |
| राष्ट्रीय वृक्ष | बरगद / भारतीय बरगद (Ficus benghalensis) | राष्ट्रीय वृक्ष |
| राष्ट्रीय नदी | गंगा | नवंबर 2008 में घोषित |
| राष्ट्रीय जलीय जीव | नदी डॉल्फिन — गांगेय डॉल्फिन | — |
| राष्ट्रीय कैलेंडर | शक संवत | 22 मार्च 1957 को अपनाया; चैत्र पहला महीना |
| राष्ट्रीय मुद्रा चिन्ह | ₹ (रुपया) | डी. उदय कुमार द्वारा डिजाइन; 2010 में अपनाया |
21.1 8वीं अनुसूची की 22 भाषाएं
मूल 14 भाषाएं (1950) से बढ़कर वर्तमान में 22 भाषाएं
सभी 22 भाषाएं: असमिया, बांग्ला, बोडो, डोगरी, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मैथिली, मलयालम, मणिपुरी, मराठी, नेपाली, ओड़िया, पंजाबी, संस्कृत, संताली, सिंधी, तमिल, तेलुगु, उर्दू
92वें संशोधन 2003 द्वारा जोड़ी गई 4 भाषाएं: बोडो, डोगरी, मैथिली, संताली
🧠 स्मृति युक्ति: "BDMS" = Bodo, Dogri, Maithili, Santali
21.2 राजभाषा प्रावधान
- अनुच्छेद 343 — देवनागरी लिपि में हिंदी संघ की राजभाषा
- अनुच्छेद 344 — राजभाषा आयोग
- अनुच्छेद 351 — हिंदी के प्रचार-प्रसार का केंद्र का कर्तव्य
- राजभाषा अधिनियम, 1963 के तहत हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी भी राजभाषा जारी रही
22. RTI, लोकपाल, GST एवं विविध विषय
22.1 सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005
- 12 अक्टूबर 2005 को लागू
- नागरिक सार्वजनिक प्राधिकरणों से जानकारी मांग सकते हैं — 30 दिन की समय सीमा
- जीवन और स्वतंत्रता से संबंधित जानकारी — 48 घंटे में
- सर्वोच्च स्तर पर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) और राज्य स्तर पर राज्य सूचना आयोग
- लागू नहीं: खुफिया एवं सुरक्षा संगठन; मंत्रिमंडल के कागजात; व्यक्तिगत जानकारी
22.2 लोकपाल और लोकायुक्त
- लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013
- भारत के प्रथम लोकपाल: न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष (2019 में नियुक्त)
- लोकपाल PM सहित सभी सार्वजनिक सेवकों के भ्रष्टाचार की जांच करता है
- लोकायुक्त — राज्य स्तर पर समकक्ष संस्था
- स्कैंडिनेवियन Ombudsman संस्था पर आधारित
22.3 GST (101वां संशोधन)
- GST लागू: 1 जुलाई 2017
- "एक देश, एक कर, एक बाजार"
- 101वें संवैधानिक संशोधन, 2016 द्वारा सक्षम
- अनुच्छेद 246A, 269A और 279A संविधान में जोड़े गए
- GST परिषद: अध्यक्ष = केंद्रीय वित्त मंत्री; सभी राज्यों के वित्त मंत्री सदस्य
- दोहरी GST संरचना — CGST + SGST + IGST
22.4 महिला आरक्षण
- 106वां संवैधानिक संशोधन, 2023 — लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण
- अगली जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा
- राज्यसभा और विधान परिषदें इसके दायरे में नहीं
अध्याय सारांश — त्वरित पुनरावृत्ति तालिका
| विषय | मुख्य संख्या / तथ्य |
|---|---|
| संविधान के कुल भाग | 25 |
| कुल अनुसूचियां | 12 |
| कुल अनुच्छेद (लगभग) | ~448 |
| मूल अधिकार | 6 (मूलतः 7) |
| मूल कर्तव्य | 11 |
| 8वीं अनुसूची में भाषाएं | 22 |
| प्रारूप समिति के सदस्य | 7 |
| हस्ताक्षरकर्ता सदस्य | 284 (299 में से) |
| निर्माण में समय | 2 वर्ष, 11 माह, 18 दिन |
| लोकसभा (निर्वाचित) | 543 |
| राज्यसभा | 245 (238 + 12) |
| SC न्यायाधीश (अधिकतम) | 34 (CJI + 33) |
| SC सेवानिवृत्ति आयु | 65 वर्ष |
| HC सेवानिवृत्ति आयु | 62 वर्ष |
| राष्ट्रीय आपातकाल | 3 बार (1962, 1971, 1975) |
| वित्तीय आपातकाल | कभी नहीं |
| लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष | जी. वी. मावलंकर |
| प्रथम CEC | सुकुमार सेन |
| प्रथम लोकपाल | न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष |
| GST लागू | 1 जुलाई 2017 |
| मतदान आयु | 18 वर्ष (61वें संशोधन से) |
प्रायः भ्रमित करने वाले तथ्य
| भ्रमित तथ्य | सही तथ्य |
|---|---|
| राष्ट्रपति बनाम उपराष्ट्रपति का निर्वाचक मंडल | राष्ट्रपति — निर्वाचित MP + निर्वाचित MLA; उपराष्ट्रपति — निर्वाचित + मनोनीत MP |
| अनु. 32 बनाम अनु. 226 | अनु. 32 = SC रिट (केवल FR); अनु. 226 = HC रिट (FR + कोई भी कानूनी अधिकार) |
| 73वां बनाम 74वां संशोधन | 73वां = पंचायती राज; 74वां = शहरी स्थानीय निकाय |
| 10वीं बनाम 11वीं अनुसूची | 10वीं = दल-बदल विरोधी; 11वीं = पंचायत के विषय |
| राष्ट्रगान बनाम राष्ट्रगीत | जन गण मन = राष्ट्रगान; वंदे मातरम = राष्ट्रगीत |
| DPSP का स्रोत बनाम FR का स्रोत | DPSP = आयरलैंड; FR = अमेरिका |
| राज्यपाल को हटाना बनाम राष्ट्रपति को हटाना | राज्यपाल = राष्ट्रपति की इच्छा पर; राष्ट्रपति = महाभियोग (अनु. 61) |
| CAG बनाम AG | CAG = लेखापरीक्षक (अनु. 148); AG = प्रथम कानून अधिकारी (अनु. 76) |
| 42वां बनाम 44वां संशोधन | 42वां = "समाजवादी, पंथनिरपेक्ष" जोड़े, मूल कर्तव्य; 44वां = संपत्ति अधिकार FR से हटाया, लोकतंत्र बहाल |
| राष्ट्रीय पशु पहले | पहले सिंह → 1973 में बंगाल बाघ |