एसएससी सीजीएल

प्राचीन इतिहास

प्राचीन भारत का इतिहास SSC CGL सामान्य जागरूकता में सबसे अधिक अंक दिलाने वाले विषयों में से एक है। हर वर्ष इस विषय से 1 से 3 प्रश्न सीधे पूछे जाते हैं। यह काल भारत की सबसे प्राचीन मानव बस्तियों से लेकर लगभग 1200 ईस्वी तक की कहानी को कवर करता है। जो छात्र इस अनुभाग में महारत हासिल करते हैं वे परीक्षा में एक महत्वपूर्ण लाभ पाते हैं क्योंकि ये प्रश्न तथ्यात्मक और पूर्वानुमानित होते हैं।

इस अध्याय में प्राचीन भारत के हर महत्वपूर्ण विषय को - पाषाण काल से राजपूत काल तक - एक व्यवस्थित और परीक्षा-केंद्रित तरीके से कवर किया गया है।

 


 

1. पाषाण काल

पाषाण काल वह प्रागैतिहासिक काल है जब मानव पत्थर के औजारों का उपयोग करते थे। इसे तीन चरणों में बांटा गया है।

 

1.1 पुरापाषाण काल (500,000 ईसा पूर्व - 10,000 ईसा पूर्व)

  • मानव शिकारी और भोजन संग्राहक थे
  • खेती या पशुपालन का कोई ज्ञान नहीं था
  • गुफाओं और चट्टानी आश्रयों में रहते थे
  • खुरदरे अनगढ़ पत्थर के औजार बनाते थे - इन्हें कोर औजार और फ्लेक औजार कहते थे
  • इसी काल में आग की खोज हुई
  • भीमबेटका (मध्य प्रदेश) - रंगीन शैलाश्रय - UNESCO विश्व धरोहर स्थल
  • प्रमुख स्थल: सोहन घाटी, बेलन घाटी (उत्तर प्रदेश), कुर्नूल गुफाएं (आंध्र प्रदेश)

 

1.2 मध्यपाषाण काल (10,000 ईसा पूर्व - 8,000 ईसा पूर्व)

  • पुरापाषाण और नवपाषाण काल के बीच का संक्रमण काल
  • औजार छोटे और तेज हो गए - सूक्ष्म पाषाण (Microliths) कहलाते थे
  • कुत्ते और मवेशी जैसे जानवरों को पालना शुरू हुआ
  • धनुष-बाण से मछली पकड़ने और शिकार करने के साक्ष्य
  • नदियों और झीलों के किनारे रहते थे
  • प्रमुख स्थल: बागोर (राजस्थान), लंघनाज (गुजरात), भीमबेटका (मध्य प्रदेश)

 

1.3 नवपाषाण काल (8,000 ईसा पूर्व - 4,000 ईसा पूर्व)

  • मनुष्यों ने खेती सीखी और स्थायी गांवों में बसने लगे
  • पॉलिश किए हुए पत्थर के औजार प्रयोग होते थे
  • मिट्टी के बर्तन बनाने की शुरुआत हुई
  • पहिये का आविष्कार हुआ
  • पशुपालन व्यापक हो गया
  • प्रमुख स्थल: मेहरगढ़ (बलूचिस्तान - उपमहाद्वीप में सबसे पुराना नवपाषाण स्थल), बुर्जहोम (कश्मीर), पिकलीहाल और ब्रह्मगिरि (कर्नाटक), चिरांद (बिहार)

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य - पाषाण काल

 

कालऔजारमुख्य विशेषता
पुरापाषाणखुरदरे कोर औजारशिकार और संग्रह
मध्यपाषाणसूक्ष्म पाषाणपशुपालन शुरू
नवपाषाणपॉलिश पत्थर औजारकृषि शुरू

 

  • भीमबेटका शैलाश्रय भारत का सबसे प्रसिद्ध पुरापाषाण स्थल है
  • मेहरगढ़ उपमहाद्वीप में सबसे पुरानी ज्ञात कृषि स्थल है
  • पुरापाषाण शब्द जॉन लुबॉक ने गढ़ा था

 


 

2. सिंधु घाटी सभ्यता (3300 ईसा पूर्व - 1300 ईसा पूर्व)

 

2.1 परिचय

सिंधु घाटी सभ्यता (IVC) विश्व की सबसे बड़ी प्राचीन शहरी सभ्यता थी। यह दक्षिण एशिया के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में फली-फूली। सबसे पहले खोजे गए स्थल के नाम पर इसे हड़प्पा सभ्यता भी कहते हैं।

  • काल: 3300 ईसा पूर्व से 1300 ईसा पूर्व (परिपक्व चरण: 2600-1900 ईसा पूर्व)
  • भौगोलिक विस्तार: पाकिस्तान, उत्तर-पश्चिम भारत, अफगानिस्तान
  • खोज: सर जॉन मार्शल ने 1921 में की
  • समकालीन सभ्यताएं: मेसोपोटामिया (इराक) और मिस्र

 

2.2 नगर नियोजन

IVC का नगर नियोजन इसकी सबसे उल्लेखनीय विशेषता थी। नगरों को दो भागों में बांटा गया था:

  • गढ़ (ऊपरी नगर): शासक वर्ग, सार्वजनिक भवनों और अनाज भंडारों के लिए
  • निचला नगर: सामान्य लोगों के लिए - आवासीय क्षेत्र

नगर नियोजन की मुख्य विशेषताएं:

  • सड़कें ग्रिड पैटर्न में बनाई गई थीं - सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं
  • घर मानकीकृत पकी ईंटों से बने थे
  • हर घर में अपना कुआं, स्नानघर और नाली थी
  • मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार - सबसे प्रसिद्ध सार्वजनिक भवन, अनुष्ठानिक स्नान के लिए उपयोग
  • मोहनजोदड़ो और हड़प्पा में विशाल अनाज भंडार - अनाज संग्रह के लिए

 

2.3 जल निकासी प्रणाली

  • प्राचीन विश्व की सबसे उन्नत जल निकासी प्रणाली
  • हर घर मुख्य सड़क की नाली से जुड़ा था
  • नालियां ईंटों या पत्थर की पट्टियों से ढकी थीं
  • जल निकासी पूर्व से पश्चिम की ओर बहती थी - स्वच्छता ज्ञान का प्रमाण
  • छोटी गलियों में भी नालियां थीं

 

2.4 अर्थव्यवस्था

  • कृषि: गेहूं, जौ, कपास, तिल और खजूर उगाए जाते थे
  • व्यापार: मेसोपोटामिया (इराक) के साथ व्यापक आंतरिक और बाहरी व्यापार
  • वस्तु विनिमय और मानकीकृत बाट-माप के उपयोग के साक्ष्य
  • लोथल (गुजरात) में विश्व का पहला ज्ञात गोदीबाड़ा (Dockyard) था
  • कांसे के औजार और तांबे के उपकरण उपयोग होते थे
  • कपास यहां पहली बार उगाई गई - यूनानी इसे सिंडन कहते थे

 

2.5 धर्म

  • कोई बड़ा मंदिर नहीं मिला - सुझाव देता है कि कोई संगठित धर्म नहीं था
  • मातृ देवी की पूजा सबसे प्रमुख थी
  • पशुपति मुहर - एक आकृति को योगासन में जानवरों से घिरे दिखाती है - शिव का प्रारंभिक रूप माना जाता है
  • वृक्ष पूजा (पीपल वृक्ष) प्रचलित थी
  • कालीबंगन में अग्नि वेदियां मिली हैं
  • पशु पूजा के साक्ष्य - कूबड़ वाला बैल अत्यंत पूजनीय था

 

2.6 लिपि

  • IVC के लोगों की अपनी लिपि थी
  • 400 से अधिक प्रतीकों की पहचान की गई है
  • दाएं से बाएं लिखी जाती थी
  • यह लिपि आज तक नहीं पढ़ी जा सकी है
  • मुख्यतः मुहरों पर मिलती है

 

2.7 महत्वपूर्ण स्थल और खोजें

 

स्थलस्थानविशेष विशेषता
हड़प्पापंजाब, पाकिस्तानपहला खोजा गया स्थल - अनाज भंडार
मोहनजोदड़ोसिंध, पाकिस्तानविशाल स्नानागार, सबसे बड़ा नगर
लोथलगुजरात, भारतगोदीबाड़ा, मनका कारखाना
कालीबंगनराजस्थान, भारतअग्नि वेदियां, जुता हुआ खेत
धोलावीरागुजरात, भारतजल जलाशय, संकेत बोर्ड
राखीगढ़ीहरियाणा, भारतभारत में सबसे बड़ा IVC स्थल
बनावलीहरियाणा, भारतजौ की खेती
रोपड़पंजाब, भारतस्वतंत्र भारत में पहला स्थल
सुरकोटड़ागुजरात, भारतघोड़े की हड्डियां मिलीं
चान्हूदड़ोसिंध, पाकिस्तानकोई गढ़ नहीं मिला

 

2.8 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • हड़प्पा की खोज दयाराम साहनी ने (1921) की
  • मोहनजोदड़ो की खोज आर.डी. बनर्जी ने (1922) की
  • मोहनजोदड़ो का अर्थ सिंधी में मृतकों का टीला है
  • धोलावीरा अपनी जल प्रबंधन प्रणाली और एक बड़े शिलालेख के लिए प्रसिद्ध है
  • IVC का पतन लगभग 1900 ईसा पूर्व हुआ - संभावित कारणों में बाढ़, जलवायु परिवर्तन शामिल हैं
  • कांसे की नृत्य करती लड़की और पुजारी राजा की मूर्ति मोहनजोदड़ो की प्रसिद्ध कलाकृतियां हैं
  • IVC में मिलने वाली सबसे सामान्य मुहर एकश्रृंगी (Unicorn) मुहर है
  • IVC के लोग लोहे से परिचित नहीं थे

 


 

3. वैदिक सभ्यता (1500 ईसा पूर्व - 600 ईसा पूर्व)

 

3.1 परिचय

वैदिक सभ्यता उस काल को संदर्भित करती है जब आर्यों ने भारतीय उपमहाद्वीप में बसकर वेदों की रचना की - हिंदू धर्म के सबसे पुराने धार्मिक ग्रंथ। इस काल को दो चरणों में बांटा गया है।

 

3.2 पूर्व वैदिक काल (1500 ईसा पूर्व - 1000 ईसा पूर्व)

  • आर्य सप्त सिंधु (सात नदियों की भूमि - पंजाब और हरियाणा क्षेत्र) में बसे
  • अर्ध-खानाबदोश जीवनशैली - पशुपालन मुख्य व्यवसाय था
  • इस काल में ऋग्वेद की रचना हुई - सबसे पुराना वेद
  • जन या विश नामक जनजाति वाला कबीलाई समाज
  • नेता को राजन (राजा) कहते थे - वंशानुगत नहीं, जनजाति द्वारा चुना जाता था
  • समाज तीन वर्गों में बंटा था: ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य (बाद में शूद्र जोड़ा गया)
  • महिलाओं की स्थिति अपेक्षाकृत उच्च थी - सभा और समिति जैसी सभाओं में भाग लेती थीं
  • मुख्य देवता: इंद्र (युद्ध और तूफान के देवता), अग्नि, वरुण, सूर्य
  • गाय धन का माप थी
  • यज्ञ (अग्नि यज्ञ) पूजा का मुख्य रूप था

 

3.3 उत्तर वैदिक काल (1000 ईसा पूर्व - 600 ईसा पूर्व)

  • आर्यों का विस्तार गंगा-यमुना के मैदानों तक हुआ (जिसे आर्यावर्त कहा गया)
  • कृषि मुख्य व्यवसाय बनी - खेती के लिए लोहे के औजारों का उपयोग
  • वर्ण व्यवस्था कठोर और वंशानुगत बन गई - व्यवसाय नहीं जन्म पर आधारित
  • गोत्र व्यवस्था विकसित हुई - वंश समूह
  • राजा अधिक शक्तिशाली हो गया - अश्वमेध (अश्व यज्ञ) और राजसूय (राज्याभिषेक समारोह) आयोजित किए गए
  • तीन नए वेद रचे गए: सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद
  • उपनिषदों की रचना हुई - अनुष्ठानों पर प्रश्न करने वाले दार्शनिक ग्रंथ
  • महिलाओं की स्थिति में गिरावट - धार्मिक समारोहों से बाहर कर दिया गया
  • इस काल के अंत में 16 महाजनपद उभरे

 

3.4 चार वेद

 

वेदअर्थविषयमहत्व
ऋग्वेदस्तोत्रों का ज्ञान10 मंडलों में 1028 स्तोत्रसबसे पुराना वेद - देवताओं को स्तोत्र
सामवेदधुनों का ज्ञानसंगीत में स्तोत्रभारतीय शास्त्रीय संगीत की उत्पत्ति
यजुर्वेदयज्ञ का ज्ञानयज्ञ सूत्र और अनुष्ठानयज्ञों के लिए मार्गदर्शिका
अथर्ववेदअथर्व पुजारी का ज्ञानजादू मंत्र, चिकित्सा, दर्शनदैनिक जीवन और चिकित्सा

 

3.5 महत्वपूर्ण शब्द

  • ब्रह्म: ब्रह्मांडीय सिद्धांत - परमात्मा
  • सभा: बुजुर्गों की सभा
  • समिति: जनजाति के सभी सदस्यों की आम सभा
  • विदथ: ऋग्वेद में सबसे पहले उल्लेखित सभा
  • ग्रामणी: गांव का मुखिया
  • गविष्ठी: शाब्दिक अर्थ गायों की खोज - युद्ध को संदर्भित करता था
  • दास/दस्यु: आर्यों द्वारा जीते गए काले रंग के लोग
  • व्रज: गोशाला

 


 

4. महाजनपद (600 ईसा पूर्व - 325 ईसा पूर्व)

 

4.1 परिचय

छठी शताब्दी ईसा पूर्व तक भारत की राजनीतिक स्थिति में जबरदस्त परिवर्तन आ गया था। कबीलाई राज्य बड़े प्रादेशिक राज्यों में समेकित हो गए जिन्हें महाजनपद (महान राज्य) कहा गया। बौद्ध ग्रंथ अंगुत्तर निकाय के अनुसार 16 महाजनपद थे।

 

4.2 16 महाजनपद और उनकी राजधानियां

 

महाजनपदराजधानीआधुनिक स्थान
अंगचंपाबिहार/झारखंड
मगधराजगृह (बाद में पाटलिपुत्र)बिहार
वज्जिवैशालीबिहार
मल्लकुशीनारा और पावाउत्तर प्रदेश
काशीवाराणसीउत्तर प्रदेश
कोसलश्रावस्तीउत्तर प्रदेश
वत्सकौशांबीउत्तर प्रदेश
चेदिशुक्तिमतीमध्य प्रदेश
कुरुइंद्रप्रस्थदिल्ली/हरियाणा
पांचालअहिच्छत्र/कांपिल्यउत्तर प्रदेश
मत्स्यविराटनगरराजस्थान
शूरसेनमथुराउत्तर प्रदेश
अवंतिउज्जैन/महिष्मतिमध्य प्रदेश
गंधारतक्षशिलापाकिस्तान/अफगानिस्तान
कंबोजराजपुरपाकिस्तान/अफगानिस्तान
अश्मकप्रतिष्ठानमहाराष्ट्र

 

4.3 महत्वपूर्ण विशेषताएं

  • अधिकांश महाजनपद राजतंत्र थे लेकिन वज्जि (वैशाली) एक गणराज्य था - विश्व का पहला ज्ञात गणराज्य
  • वैशाली में एक निर्वाचित सभा थी - एक प्रोटो-लोकतंत्र
  • काशी, कोसल, मगध और अवंति सबसे शक्तिशाली राज्य थे
  • मगध ने अंततः सभी को अवशोषित किया और प्रमुख शक्ति बन गया
  • इस काल में सिक्कों (कर्षापण या आहत सिक्के) का उपयोग शुरू हुआ

 


 

5. मगध का उत्थान

 

5.1 मगध क्यों शक्तिशाली बना

वर्तमान बिहार में स्थित मगध के पास कई भौगोलिक और सामरिक लाभ थे:

  • प्रमुख व्यापार मार्गों के संगम पर स्थित
  • लोहे और तांबे के भंडारों से समृद्ध
  • उपजाऊ गंगा के मैदान - कृषि अधिशेष
  • जंगलों में हाथी उपलब्ध - युद्ध में उपयोग
  • दो महान नदियां: गंगा और सोन - प्राकृतिक सुरक्षा

 

5.2 हर्यंक वंश (544 ईसा पूर्व - 412 ईसा पूर्व)

बिंबिसार (544-492 ईसा पूर्व):

  • मगध का पहला महत्वपूर्ण शासक
  • राजगृह (राजगीर) को राजधानी बनाया
  • वैवाहिक संधियों की नीति अपनाई - वैशाली, कोसल और मद्र की राजकुमारियों से विवाह किया
  • बुद्ध और महावीर दोनों के समकालीन
  • सड़कों और कुशल प्रशासन की व्यवस्था की
  • अपने पुत्र अजातशत्रु द्वारा कैद किया गया और मारा गया

अजातशत्रु (492-460 ईसा पूर्व):

  • कुणिक के नाम से भी जाना जाता था
  • कोसल और वज्जि (वैशाली) को जीतकर मिलाया - वैशाली को जीतने में 16 साल लगे
  • दो हथियारों का उपयोग किया: महाशिलाकंटक (गुलेल) और रथमूसल (गदा वाला रथ)
  • बौद्ध धर्म का संरक्षक - बुद्ध की मृत्यु के बाद राजगृह में पहली बौद्ध संगीति आयोजित की

 

5.3 शिशुनाग वंश (412-344 ईसा पूर्व)

  • शिशुनाग द्वारा स्थापित
  • अवंति की शक्ति को नष्ट किया
  • कालाशोक ने वैशाली में दूसरी बौद्ध संगीति आयोजित की

 

5.4 नंद वंश (344-322 ईसा पूर्व)

  • महापद्म नंद द्वारा स्थापित - मगध पर शासन करने वाला पहला गैर-क्षत्रिय (शूद्र मूल)
  • एकराट (एकमात्र संप्रभु) और सर्वक्षत्रांतक (सभी क्षत्रियों का नाशक) कहलाते थे
  • बड़ी सेना तैयार की
  • अंतिम नंद शासक धन नंद को चंद्रगुप्त मौर्य ने उखाड़ फेंका
  • सिकंदर महान ने धन नंद के शासनकाल में उत्तर-पश्चिम भारत पर आक्रमण किया
  •  

 

6. जैन धर्म

 

6.1 परिचय

जैन धर्म भारत के सबसे पुराने धर्मों में से एक है। यह अहिंसा, सत्य और अनासक्ति को आध्यात्मिक मुक्ति के मार्ग के रूप में प्रचारित करता है। इसके 24 तीर्थंकर (आध्यात्मिक शिक्षक) हैं।

 

6.2 वर्धमान महावीर - अंतिम तीर्थंकर

  • जन्म: 540 ईसा पूर्व वैशाली (बिहार) के पास कुंडग्राम में
  • पिता: सिद्धार्थ (लिच्छवि कुल के मुखिया)
  • माता: त्रिशला (लिच्छवि प्रमुख चेटक की बहन)
  • उनका प्रतीक सिंह था
  • 30 वर्ष की आयु में उन्होंने संसार त्याग दिया
  • जृम्भिकग्राम में 12 वर्ष की तपस्या के बाद केवल ज्ञान (सर्वज्ञता) प्राप्त किया
  • महावीर (महान वीर) और जिन (विजेता) कहलाए - इसीलिए धर्म का नाम जैन धर्म पड़ा
  • मृत्यु: 468 ईसा पूर्व में पावापुरी (बिहार) में
  • गौतम बुद्ध के समकालीन

 

6.3 24 तीर्थंकर

  • पहले तीर्थंकर: ऋषभदेव (आदिनाथ) - उनका प्रतीक बैल था
  • 23वें तीर्थंकर: पार्श्वनाथ - उनका प्रतीक सर्प था
  • 24वें तीर्थंकर: वर्धमान महावीर
  • केवल महावीर और पार्श्वनाथ को ऐतिहासिक व्यक्तित्व माना जाता है

 

6.4 सिद्धांत और शिक्षाएं

जैन धर्म के तीन रत्न (त्रिरत्न):

  • सम्यक दर्शन - सही आस्था
  • सम्यक ज्ञान - सही ज्ञान
  • सम्यक चरित्र - सही आचरण

पांच महाव्रत:

  1. अहिंसा - अहिंसा (सबसे महत्वपूर्ण)
  2. सत्य - सत्यवादिता
  3. अस्तेय - चोरी न करना
  4. ब्रह्मचर्य - संयम (महावीर द्वारा जोड़ा गया)
  5. अपरिग्रह - अपरिग्रह

नोट: पार्श्वनाथ ने केवल चार व्रत सिखाए। महावीर ने ब्रह्मचर्य को पांचवें व्रत के रूप में जोड़ा।

 

6.5 जैन धर्म के दो संप्रदाय

 

संप्रदायअर्थमान्यता
दिगंबरआकाश-आच्छादित (नग्न)भिक्षुओं को वस्त्र नहीं पहनने चाहिए
श्वेतांबरश्वेत-वस्त्रधारीभिक्षु सफेद वस्त्र पहन सकते हैं

 

  • विभाजन लगभग 300 ईसा पूर्व में मगध में अकाल के कारण हुआ
  • स्थूलभद्र ने श्वेतांबर समूह का नेतृत्व किया
  • भद्रबाहु दिगंबर समूह को दक्षिण भारत ले गए

     


 

7. बौद्ध धर्म

 

7.1 गौतम बुद्ध का जीवन

  • जन्म: 563 ईसा पूर्व में लुंबिनी (नेपाल) में - साल वृक्ष के नीचे
  • पिता: शुद्धोधन - कपिलवस्तु के राजा (शाक्य कुल)
  • माता: महामाया (उनके जन्म के 7 दिन बाद मृत्यु हो गई)
  • धाय माता: प्रजापति गौतमी
  • पत्नी: यशोधरा
  • पुत्र: राहुल
  • मूल नाम: सिद्धार्थ गौतम
  • 29 वर्ष की आयु में: गृह त्याग किया (इसे महाभिनिष्क्रमण - महान त्याग कहते हैं)
  • उनके सारथी का नाम चन्ना और घोड़े का नाम कंथक था
  • गुरुओं आलार कालाम और उद्दक रामपुत्त के पास अध्ययन किया
  • ज्ञान प्राप्ति: बोधगया (बिहार) में पीपल वृक्ष (बोधिवृक्ष) के नीचे 35 वर्ष की आयु में
  • पहला उपदेश: सारनाथ (हिरण उद्यान/इसिपतन) - वाराणसी के पास - इसे धम्मचक्कपवत्तन (धर्म चक्र का प्रवर्तन) कहते हैं
  • पहले उपदेश के पांच शिष्य: कोंडन्न, भद्दिय, वप्प, महानाम, अस्सजि
  • मृत्यु: 483 ईसा पूर्व में कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में - इसे महापरिनिर्वाण कहते हैं
  • मृत्यु के समय आयु: 80 वर्ष

 

7.2 चार आर्य सत्य

  1. दुःख - जीवन दुःख से भरा है
  2. समुदाय - दुःख का कारण है (इच्छा/लालसा)
  3. निरोध - दुःख का अंत हो सकता है
  4. मग्ग - दुःख अंत करने का मार्ग है (अष्टांगिक मार्ग)

 

7.3 अष्टांगिक मार्ग

  1. सम्यक दृष्टि
  2. सम्यक संकल्प
  3. सम्यक वाक्
  4. सम्यक कर्मांत
  5. सम्यक आजीव
  6. सम्यक व्यायाम
  7. सम्यक स्मृति
  8. सम्यक समाधि

 

7.4 बौद्ध संगीतियां

 

संगीतिवर्षस्थानसंरक्षकअध्यक्षउद्देश्य
पहली483 ईसा पूर्वराजगृहअजातशत्रुमहाकस्सपबुद्ध की शिक्षाओं का संकलन
दूसरी383 ईसा पूर्ववैशालीकालाशोकसाबाकामीमठवासी नियमों पर विवाद
तीसरी250 ईसा पूर्वपाटलिपुत्रअशोकमोग्गलिपुत्त तिस्ससंघ शुद्धि, बौद्ध धर्म प्रसार
चौथी72 ईस्वीकश्मीरकनिष्कवसुमित्रमहायान बौद्ध धर्म का संकलन

 

7.5 बौद्ध धर्म के तीन रत्न

  • बुद्ध - प्रबुद्ध पुरुष
  • धम्म - शिक्षा
  • संघ - भिक्षुओं का समुदाय

 

7.6 महत्वपूर्ण बौद्ध स्थल

 

स्थलस्थानमहत्व
लुंबिनीनेपालबुद्ध का जन्म स्थान
बोधगयाबिहारज्ञान प्राप्ति
सारनाथउत्तर प्रदेशपहला उपदेश
कुशीनगरउत्तर प्रदेशमहापरिनिर्वाण (मृत्यु)
नालंदाबिहारप्राचीन विश्वविद्यालय
सांचीमध्य प्रदेशअशोक का महान स्तूप
तक्षशिलापाकिस्तानबौद्ध शिक्षा केंद्र

 


 

8. मौर्य साम्राज्य (322 ईसा पूर्व - 185 ईसा पूर्व)

 

8.1 चंद्रगुप्त मौर्य (322-298 ईसा पूर्व)

  • चाणक्य (कौटिल्य) की सहायता से अंतिम नंद शासक धन नंद को उखाड़ फेंका
  • 322 ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य की स्थापना की
  • राजधानी: पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना)
  • लगभग 305 ईसा पूर्व में सेल्यूकस निकेटर (सिकंदर के सेनापति) को हराया
  • सेल्यूकस के साथ शांति संधि - अफगानिस्तान और बलूचिस्तान सहित क्षेत्र प्राप्त किए
  • मेगस्थनीज को सेल्यूकस ने चंद्रगुप्त के दरबार में राजदूत बनाकर भेजा
  • बाद में जैन मुनि भद्रबाहु के प्रभाव में जैन धर्म अपनाया
  • श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) चले गए और सल्लेखना (उपवास करते हुए मृत्यु) से प्राण त्यागे

 

8.2 चाणक्य (कौटिल्य/विष्णुगुप्त)

  • चंद्रगुप्त मौर्य के प्रधानमंत्री और मार्गदर्शक
  • अर्थशास्त्र के लेखक - राजनीति, अर्थशास्त्र और सैन्य रणनीति पर ग्रंथ
  • नीतिशास्त्र और चाणक्य नीति भी लिखी
  • भारत का मैकियावेली कहलाते हैं
  • अर्थशास्त्र को आर. शामाशास्त्री ने 1904 में पुनः खोजा

 

8.3 बिंदुसार (298-273 ईसा पूर्व)

  • चंद्रगुप्त मौर्य का पुत्र
  • अमित्रघात (शत्रुओं का वध करने वाला) के नाम से भी जाना जाता था
  • साम्राज्य का दक्कन पठार तक विस्तार किया
  • यूनानी राजदूत डेमाखस उनके दरबार में था
  • अशोक के पिता

 

8.4 अशोक महान (268-232 ईसा पूर्व)

अशोक को विश्व इतिहास के महानतम शासकों में से एक माना जाता है।

 

प्रारंभिक जीवन और विजय:

  • बिंदुसार और रानी सुभद्रांगी के पुत्र
  • 261 ईसा पूर्व में कलिंग युद्ध लड़ा - एक विनाशकारी संघर्ष जिसमें 1 लाख से अधिक लोग मारे गए
  • विनाश से भयभीत होकर अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया
  • अपने शासन की नींव के रूप में धम्म (धर्म/सदाचार) का अनुसरण किया

 

अशोक का धम्म:

  • सभी धर्मों का सम्मान
  • जानवरों और मनुष्यों के प्रति अहिंसा
  • माता-पिता और बड़ों की आज्ञा पालन
  • सत्यवादिता
  • दया और उदारता

 

अशोक के अभिलेख: अशोक ने पूरे साम्राज्य में शिलालेखों और स्तंभ अभिलेखों के माध्यम से अपने संदेश फैलाए।

 

प्रकारसंख्याविषय
प्रमुख शिला अभिलेख14धम्म, कल्याण, धार्मिक सहिष्णुता
लघु शिला अभिलेखकईबौद्ध धर्म में धर्मांतरण
स्तंभ अभिलेख7 प्रमुखधम्म नियम, प्रशासन
गुफा अभिलेखकईआजीवक भिक्षुओं के लिए

 

  • अभिलेख ब्राह्मी लिपि (अधिकांश) में लिखे गए थे, खरोष्ठी और अरामाइक में भी
  • जेम्स प्रिंसेप ने 1837 में ब्राह्मी लिपि को समझा
  • गिरनार (गुजरात), शाहबाजगढ़ी (पाकिस्तान), मानसेहरा (पाकिस्तान) महत्वपूर्ण अभिलेख स्थल हैं

 

भारत में अशोक के प्रतीक:

  • अशोक चक्र - भारत के राष्ट्रीय ध्वज पर 24 तीलियों वाला पहिया
  • सारनाथ की सिंह राजधानी - भारत का राष्ट्रीय प्रतीक
  • अशोक स्तंभ - सारनाथ, वैशाली, सांची में मिले

 

8.5 मौर्य प्रशासन

  • अत्यधिक केंद्रीकृत प्रशासन
  • सम्राट शीर्ष पर → अमात्य (मंत्री) → प्रांतीय राज्यपाल → जिला अधिकारी → ग्राम प्रमुख
  • साम्राज्य को प्रांतों (जनपदों) में बांटा गया जिनके राज्यपाल राजकुमार (कुमार) थे
  • पाटलिपुत्र का शासन 6 समितियों में बंटे 30 सदस्यों के नगरपालिका आयोग द्वारा होता था
  • अर्थशास्त्र में प्रशासनिक व्यवस्था का विस्तृत वर्णन है
  • जासूसी व्यवस्था अत्यंत विकसित थी - जासूसों को गूढ़पुरुष कहते थे
  • सीता - राज्य द्वारा जोती गई शाही भूमि
  • राजुक - जिला स्तर पर राजस्व अधिकारी

 

8.6 मौर्य साम्राज्य का पतन

  • अशोक के उत्तराधिकारी कमजोर थे
  • अंतिम मौर्य शासक बृहद्रथ को उनके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने 185 ईसा पूर्व में मार डाला
  • इस प्रकार मौर्य साम्राज्य का अंत हुआ और शुंग वंश का आरंभ हुआ

 


 

9. मौर्योत्तर काल (185 ईसा पूर्व - 320 ईस्वी)

 

9.1 शुंग वंश (185-73 ईसा पूर्व)

  • पुष्यमित्र शुंग द्वारा बृहद्रथ मौर्य की हत्या के बाद स्थापित
  • राजधानी: पाटलिपुत्र
  • अश्वमेध यज्ञ किया - ब्राह्मणवाद का पुनरुद्धार
  • पतंजलि (महाभाष्य के लेखक - व्याकरण ग्रंथ) पुष्यमित्र के समकालीन थे
  • शुंग शासन में बौद्ध धर्म का पतन हुआ
  • अंतिम शासक देवभूति को वासुदेव (मंत्री) ने मार डाला - कण्व वंश शुरू हुआ

 

9.2 सातवाहन वंश (230 ईसा पूर्व - 220 ईस्वी)

  • आंध्र वंश भी कहलाता है
  • सिमुक द्वारा स्थापित
  • सबसे शक्तिशाली शासक: गौतमीपुत्र सातकर्णी
    • एकब्राह्मण और क्षत्रिय दर्पमान (क्षत्रियों के अभिमान को नष्ट करने वाला) कहलाते थे
    • शक (सीथियन) शासक नहपान को पराजित किया
  • वाशिष्ठीपुत्र पुलुमावी - एक अन्य महान शासक
  • राजधानी: प्रतिष्ठान (पैठन) गोदावरी पर और बाद में अमरावती
  • सीसे और सूती कपड़े के सिक्के जारी किए
  • प्राकृत साहित्य का संरक्षण किया
  • बौद्ध कला की उत्कृष्ट कृति अमरावती स्तूप के लिए प्रसिद्ध

 

9.3 कुषाण वंश (30-375 ईस्वी)

  • मध्य एशिया के खानाबदोश जिन्होंने उत्तर-पश्चिम भारत में साम्राज्य स्थापित किया
  • कुजुल कड्फिसेस - भारत में कुषाण वंश के संस्थापक
  • सबसे महान शासक: कनिष्क प्रथम (78 ईस्वी - 101 ईस्वी)

कनिष्क प्रथम:

  • राजधानी: पुरुषपुर (पेशावर)
  • दूसरा अशोक कहलाते थे - बौद्ध धर्म के महान संरक्षक
  • कश्मीर में चौथी बौद्ध संगीति आयोजित की - बौद्ध धर्म का हीनयान और महायान में विभाजन
  • उनके दरबार में अश्वघोष (बुद्धचरित के लेखक), वसुमित्र, नागार्जुन, चरक (चिकित्सक) जैसे विद्वान थे
  • शक संवत (78 ईस्वी) - कनिष्क के शासनकाल में शुरू माना जाता है - भारत के राष्ट्रीय कैलेंडर में उपयोग
  • कुषाणों ने चीन, भारत और रोम के बीच रेशम मार्ग व्यापार की सुविधा दी

 


 

10. गुप्त साम्राज्य (320 ईस्वी - 550 ईस्वी)

 

10.1 परिचय

गुप्त काल को भारत का स्वर्ण युग कहा जाता है क्योंकि कला, विज्ञान, साहित्य, गणित और दर्शन में इसकी अद्भुत उपलब्धियां थीं।

 

10.2 गुप्त वंश के शासक

 

चंद्रगुप्त प्रथम (320-335 ईस्वी):

  • गुप्त साम्राज्य की स्थापना की
  • महाराजाधिराज (राजाओं का राजा) की उपाधि ली
  • लिच्छवि कुल की कुमारदेवी से विवाह किया - महत्वपूर्ण राजनीतिक गठबंधन
  • 320 ईस्वी में गुप्त संवत शुरू किया

 

समुद्रगुप्त (335-375 ईस्वी):

  • चंद्रगुप्त प्रथम के पुत्र - गुप्त वंश के सबसे महान सैन्य विजेता
  • इतिहासकार वी.ए. स्मिथ ने भारत का नेपोलियन कहा
  • उनकी विजयें इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख में दर्ज हैं जो दरबारी कवि हरिषेण ने रचा
  • उत्तर में धर्मविजय (विलय) और दक्षिण में दिग्विजय (सामंती) की नीति अपनाई
  • महान कवि और संगीतज्ञ भी थे - कविराज (कवियों के राजा) की उपाधि पाई
  • वीणा बजाते थे (सिक्कों पर अंकित)
  • अश्वमेध यज्ञ किया

 

चंद्रगुप्त द्वितीय (375-415 ईस्वी) - विक्रमादित्य:

  • सांस्कृतिक उपलब्धियों के मामले में सबसे महान गुप्त शासक
  • विक्रमादित्य के नाम से भी जाने जाते थे
  • शकों को हराया और शकारि (शकों का शत्रु) की उपाधि ली
  • साम्राज्य का विस्तार बंगाल से अरब सागर तक
  • उनके शासनकाल में फाह्यान (चीनी यात्री) ने भारत की यात्रा की
  • उनके दरबार में नवरत्न थे जिनमें शामिल थे:
    • कालिदास (कवि और नाटककार)
    • आर्यभट्ट (गणितज्ञ)
    • वराहमिहिर (खगोलशास्त्री)
    • धन्वंतरि (चिकित्सक)
    • अमरसिंह (कोशकार - अमरकोश)

 

कुमारगुप्त प्रथम (415-455 ईस्वी):

  • नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की

 

स्कंदगुप्त (455-467 ईस्वी):

  • अंतिम महान गुप्त शासक
  • हूण (श्वेत हूण) आक्रमणों को सफलतापूर्वक विफल किया
  • उनकी मृत्यु के बाद साम्राज्य तेजी से पतन की ओर गया

 

10.3 स्वर्ण युग - उपलब्धियां

 

गणित और विज्ञान:

  • आर्यभट्ट (476-550 ईस्वी):
    • पाई (π) = 3.1416 का मान निकाला
    • बताया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है
    • पृथ्वी की परिधि की गणना की
    • सूर्यकेंद्रित मॉडल प्रस्तावित किया
    • 23 वर्ष की आयु में आर्यभटीय लिखी
    • शून्य (0) की अवधारणा दी

 

खगोल विज्ञान:

  • वराहमिहिर: बृहत्संहिता लिखी - खगोल विज्ञान, ज्योतिष और प्राकृतिक विज्ञान का विश्वकोश

 

चिकित्सा:

  • धन्वंतरि: आयुर्वेद चिकित्सा के देवता माने जाते हैं
  • सुश्रुत (गुप्त-पूर्व): शल्यचिकित्सा के जनक

 

साहित्य:

  • कालिदास: महानतम संस्कृत कवि और नाटककार
    • रचनाएं: अभिज्ञान शाकुंतलम (उनकी श्रेष्ठ कृति), मेघदूत, रघुवंश, कुमारसंभव, मालविकाग्निमित्रम
  • विशाखदत्त: मुद्राराक्षस (चंद्रगुप्त मौर्य पर नाटक) लिखा
  • अमरसिंह: अमरकोश (संस्कृत शब्दकोश) लिखा
  • विष्णु शर्मा: पंचतंत्र (नीति कथाएं - विश्व प्रसिद्ध) लिखी

 

कला और वास्तुकला:

  • अजंता गुफाएं (महाराष्ट्र): गुफा चित्रकारी - गुप्त काल में शिखर पर
  • उदयगिरि गुफाएं (मध्य प्रदेश): प्रसिद्ध वराह नक्काशी
  • देवगढ़ मंदिर (उत्तर प्रदेश): दशावतार मंदिर - प्रारंभिक हिंदू मंदिरों में से एक
  • महरौली का लौह स्तंभ (दिल्ली): 1600 वर्षों के बाद भी जंग नहीं लगा

 


 

11. हर्षवर्धन (606-647 ईस्वी)

 

11.1 परिचय

हर्षवर्धन प्राचीन भारत के अंतिम महान शासक थे जिन्होंने उत्तरी भारत के बड़े हिस्से को एकजुट किया।

  • जन्म: 590 ईस्वी
  • वंश: पुष्यभूति/वर्धन वंश
  • राजधानी: थानेसर (प्रारंभ में) और बाद में कन्नौज
  • अपने भाई राज्यवर्धन की मालवा के राजा द्वारा हत्या के बाद सत्ता संभाली

 

11.2 प्रशासन और उपलब्धियां

  • 41 वर्षों तक शासन किया (606-647 ईस्वी)
  • दक्कन जीतने में असफल रहे - नर्मदा नदी के तट पर पुलकेशी द्वितीय (वातापि के चालुक्य राजा) द्वारा पराजित
  • धीरे-धीरे शैवमत से बौद्ध धर्म में परिवर्तित हुए
  • हर 5 साल में प्रयाग (इलाहाबाद) में पंचवार्षिक सभा आयोजित की - गरीबों में धन वितरित किया
  • कला और साहित्य के संरक्षक
  • तीन संस्कृत नाटक लिखे: नागानंद, रत्नावली और प्रियदर्शिका
  • बाणभट्ट - उनके दरबारी कवि ने हर्षचरित (हर्ष की जीवनी) और कादंबरी लिखी

 

11.3 ह्वेनसांग (Xuanzang)

  • हर्षवर्धन के शासनकाल (629-645 ईस्वी) में भारत आए चीनी बौद्ध तीर्थयात्री
  • नालंदा विश्वविद्यालय में कई वर्षों तक रहे
  • उनका विवरण सी-यू-की (पश्चिमी क्षेत्रों का अभिलेख) एक मूल्यवान ऐतिहासिक स्रोत है
  • भारत को समृद्ध और सुशासित बताया
  • उस समय भारत में बौद्ध धर्म के पतन का उल्लेख किया
  • हर्ष ने उन्हें मोक्षदेव (मुक्ति के देवता) कहा

 


 

12. दक्षिण भारतीय राजवंश

 

12.1 प्रारंभिक तमिल राज्य - तीन मुकुटधारी राजा (मूवेंदर)

 

चेर:

  • वर्तमान केरल और पश्चिमी तमिलनाडु पर शासन
  • राजधानी: वांजि (करूर)
  • रोम के साथ व्यापार के लिए प्रसिद्ध - काली मिर्च, मसाले निर्यात करते थे
  • प्रसिद्ध शासक: चेरन सेंगुट्टुवन (कन्नगी के लिए मंदिर बनाया)

 

चोल:

  • पूर्वोत्तर तमिलनाडु और आंध्र तट पर शासन
  • राजधानी: उरैयूर (प्रारंभ में)
  • प्रसिद्ध शासक: करिकाल चोल - कावेरी नदी पर ग्रैंड एनीकट (कल्लनई) बांध बनाया - आज भी उपयोग में आने वाली विश्व की सबसे पुरानी जल नियामक संरचनाओं में से एक
  • संगम साहित्य के लिए जाने जाते हैं

 

पांड्य:

  • दक्षिणी तमिलनाडु (मदुरई क्षेत्र) पर शासन
  • राजधानी: मदुरई
  • ग्रीस और रोम के साथ व्यापार के लिए प्रसिद्ध
  • तमिल संगम (साहित्यिक सभाओं) का संरक्षण किया
  • मेगस्थनीज की इंडिका और कौटिल्य के अर्थशास्त्र में उल्लेख

 

12.2 पल्लव (275-897 ईस्वी)

  • कांचीपुरम (तमिलनाडु) से शासन
  • सबसे महान शासक: नरसिंहवर्मन प्रथम (मामल्ल)
    • चालुक्य राजा पुलकेशी द्वितीय को पराजित किया और मार डाला
    • महाबलीपुरम (मामल्लपुरम) के स्मारक बनाए
    • श्रीलंका पर नौसैनिक अभियान भेजे
  • महेंद्रवर्मन प्रथम: जैन धर्म से शैवमत में परिवर्तित, कला के महान संरक्षक
  • महाबलीपुरम में तटीय मंदिर और रथों (पत्थर से तराशे मंदिर) के लिए प्रसिद्ध
  • कांचीपुरम का कैलासनाथ मंदिर - उत्कृष्ट पल्लव मंदिर

 

12.3 वातापि के चालुक्य (543-757 ईस्वी)

  • पुलकेशी प्रथम द्वारा स्थापित
  • राजधानी: वातापि (बादामी)
  • सबसे महान शासक: पुलकेशी द्वितीय
    • नर्मदा नदी पर हर्ष को पराजित किया
    • फारसी राजा खुसरू द्वितीय के पास दूत भेजा
    • नरसिंहवर्मन प्रथम (पल्लव) द्वारा पराजित
  • बादामी, ऐहोल और पट्टदकल में प्रसिद्ध गुफा मंदिर
  • ऐहोल - मंदिर वास्तुकला का उद्गम स्थल कहलाता है

 

12.4 राष्ट्रकूट (753-982 ईस्वी)

  • वातापि के चालुक्यों को उखाड़ फेंका
  • सबसे महान शासक: कृष्ण प्रथम - एलोरा में भव्य कैलास मंदिर बनाया
  • अमोघवर्ष प्रथम: साहित्य के संरक्षक के रूप में जाने जाते थे - कविराजमार्ग (पहला कन्नड़ साहित्यिक कार्य) लिखा
  • अरब यात्रियों ने राष्ट्रकूट शासकों की प्रशंसा की

 


 

13. राजपूत काल (700 ईस्वी - 1200 ईस्वी)

 

13.1 परिचय

हर्ष के साम्राज्य के पतन के बाद, राजपूत कुलों के रूप में उत्तरी और मध्य भारत में प्रमुख राजनीतिक शक्ति उभरी। वे अपनी वीरता, शिष्टता और योद्धा संस्कृति के लिए जाने जाते थे।

 

13.2 उत्पत्ति सिद्धांत

  • अग्निकुल सिद्धांत (अग्नि उत्पत्ति): कुछ राजपूत कुलों ने माउंट आबू पर अग्निकुंड (यज्ञ कुंड) से अपना उद्भव बताया - चंद बरदाई कृत पृथ्वीराज रासो में उल्लेख
  • अग्निकुल उत्पत्ति का दावा करने वाले कुल: परमार, प्रतिहार, चाहमान (चौहान), चंदेल

 

13.3 प्रमुख राजपूत राजवंश

 

राजवंशक्षेत्रराजधानीप्रसिद्ध शासक
परमारमालवा (मध्य प्रदेश)धाराभोज प्रथम (राजा भोज)
चंदेलबुंदेलखंड (मध्य प्रदेश/उत्तर प्रदेश)खजुराहोधंग
चाहमान (चौहान)अजमेर/दिल्लीअजमेरपृथ्वीराज चौहान तृतीय
प्रतिहारकन्नौजकन्नौजमिहिर भोज
गुहिल (सिसोदिया)मेवाड़चित्तौड़राणा सांगा
तोमरदिल्लीदिल्लीअनंगपाल तोमर

 

13.4 महत्वपूर्ण राजपूत शासक

 

राजा भोज (परमार - 1000-1055 ईस्वी):

  • संस्कृत ज्ञान के महान संरक्षक
  • विभिन्न विषयों पर 84 पुस्तकें लिखीं
  • भोजेश्वर मंदिर और भोज सागर झील बनाई
  • भोजपाल (भोपाल) की स्थापना की

 

पृथ्वीराज चौहान तृतीय (1178-1192 ईस्वी):

  • दिल्ली के अंतिम महान हिंदू राजा
  • तराइन का पहला युद्ध (1191 ईस्वी) में गौरी मुहम्मद को हराया
  • तराइन का दूसरा युद्ध (1192 ईस्वी) में पराजित हुए - राजपूत सर्वोच्चता का अंत
  • उनकी कहानी चंद बरदाई कृत पृथ्वीराज रासो में है

 

मिहिर भोज (प्रतिहार - 836-882 ईस्वी):

  • कन्नौज को नियंत्रित किया - उत्तरी भारत का सबसे प्रतिष्ठित सिंहासन
  • पालों और राष्ट्रकूटों के साथ कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष लड़ा

 


 

14. प्राचीन भारतीय कला और वास्तुकला

 

14.1 स्तूप

स्तूप एक गुंबद के आकार का बौद्ध स्मारक है जो बुद्ध या बौद्ध भिक्षुओं के अवशेष रखने के लिए बनाया जाता है।

 

स्तूप के भाग:

  • अंड: गुंबद
  • हर्मिका: गुंबद के ऊपर रेलिंग
  • यष्टि: छाते जैसा खंभा
  • वेदिका: बाहरी रेलिंग
  • तोरण: सजाए गए प्रवेश द्वार

 

स्तूपस्थानकिसने बनाया
सांची स्तूप (महान स्तूप)मध्य प्रदेशमूलतः अशोक - बाद में विस्तारित
भरहुत स्तूपमध्य प्रदेशशुंग काल
अमरावती स्तूपआंध्र प्रदेशसातवाहन काल
धर्मराजिका स्तूपतक्षशिला (पाकिस्तान)अशोक

 

14.2 गुफा वास्तुकला

 

अजंता गुफाएं (महाराष्ट्र):

  • औरंगाबाद जिले में 30 पत्थर-काट गुफाएं
  • बौद्ध गुफाएं - विहार और चैत्य
  • जातक कथाओं (बुद्ध के पूर्व जन्मों की कहानियां) दर्शाने वाली भव्य चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध
  • अधिकांश चित्र गुप्त और वाकाटक काल के हैं
  • UNESCO विश्व धरोहर स्थल

 

एलोरा गुफाएं (महाराष्ट्र):

  • औरंगाबाद के पास 34 पत्थर-काट गुफाएं
  • बौद्ध, हिंदू और जैन गुफाएं शामिल - धार्मिक सौहार्द का दुर्लभ उदाहरण
  • सबसे प्रसिद्ध: कैलास मंदिर (गुफा 16) - एक ही चट्टान से तराशा गया - राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम द्वारा
  • UNESCO विश्व धरोहर स्थल

 

एलीफेंटा गुफाएं (महाराष्ट्र):

  • मुंबई के पास - शिव को समर्पित
  • प्रसिद्ध त्रिमूर्ति मूर्तिकला - तीन मुख वाले शिव (महेशमूर्ति)
  • UNESCO विश्व धरोहर स्थल

 

बराबर गुफाएं (बिहार):

  • भारत में सबसे पुरानी जीवित पत्थर-काट गुफाएं
  • अशोक द्वारा आजीवक भिक्षुओं के लिए बनाई गई

 

14.3 मंदिर वास्तुकला

 

शैलीक्षेत्रविशेषताएंउदाहरण
नागर (उत्तर भारतीय)उत्तर भारतघुमावदार/मधुमक्खी के छत्ते जैसा शिखरलिंगराज मंदिर, भुवनेश्वर
द्रविड़ (दक्षिण भारतीय)दक्षिण भारतपिरामिडनुमा विमान और बड़ा गोपुरमबृहदीश्वर मंदिर, तंजावुर
वेसर (मिश्रित)दक्कननागर और द्रविड़ का मिश्रणबादामी के चालुक्य मंदिर

 

प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर:

  • बृहदीश्वर मंदिर, तंजावुर: चोल राजा राजराज प्रथम द्वारा - UNESCO स्थल
  • तटीय मंदिर, महाबलीपुरम: पल्लव राजा नरसिंहवर्मन द्वितीय द्वारा
  • खजुराहो मंदिर: चंदेल राजपूतों द्वारा - कामुक मूर्तिकला के लिए प्रसिद्ध
  • सूर्य मंदिर, कोणार्क: पूर्वी गंग राजा नरसिंह प्रथम द्वारा
  • कैलासनाथ मंदिर, कांचीपुरम: पल्लवों द्वारा

 


 

15. प्राचीन साहित्य

 

15.1 संस्कृत साहित्य

 

रचनालेखककालविषय
अर्थशास्त्रचाणक्य (कौटिल्य)मौर्यराजनीति, अर्थशास्त्र, सैन्य
इंडिकामेगस्थनीजमौर्यचंद्रगुप्त के भारत का विवरण
महाभारतव्यासमहाकाव्य कालविश्व का सबसे लंबा महाकाव्य - 1 लाख श्लोक
रामायणवाल्मीकिमहाकाव्य कालराम की कहानी - 24,000 श्लोक
मुद्राराक्षसविशाखदत्तगुप्तचंद्रगुप्त मौर्य पर नाटक
मृच्छकटिकशूद्रकगुप्तसामाजिक नाटक
अभिज्ञान शाकुंतलमकालिदासगुप्तमहानतम संस्कृत नाटक
मेघदूतकालिदासगुप्तगीतिकाव्य - बादल संदेशवाहक
रघुवंशकालिदासगुप्तरघु वंश पर महाकाव्य
हर्षचरितबाणभट्टहर्ष कालहर्षवर्धन की जीवनी
कादंबरीबाणभट्टहर्ष कालविश्व का पहला उपन्यास
राजतरंगिणीकल्हण12वीं शताब्दीकश्मीर का इतिहास
आर्यभटीयआर्यभट्टगुप्तगणित और खगोल विज्ञान
पंचतंत्रविष्णु शर्मागुप्तनीति कथाएं - 50 भाषाओं में अनुवादित
नाट्यशास्त्रभरत मुनिप्राचीननाटक और कला पर ग्रंथ
अष्टाध्यायीपाणिनिपूर्व-मौर्यसंस्कृत व्याकरण - 4000 नियम
महाभाष्यपतंजलिशुंगसंस्कृत व्याकरण पर टीका

 

15.2 तमिल साहित्य

  • संगम साहित्य: 300 ईसा पूर्व से 300 ईस्वी के बीच रचित
  • तीन तमिल संगम (सभाएं):
    • प्रथम: मदुरई - अगस्त्य की अध्यक्षता
    • द्वितीय: कपाडापुरम - अगस्त्य और तोल्काप्पियर की अध्यक्षता
    • तृतीय: मदुरई (वर्तमान) - जीवित साहित्य उत्पन्न किया
  • तोल्काप्पियम - सबसे पुराना तमिल व्याकरण ग्रंथ
  • शिलप्पदिकारम: सबसे महान तमिल महाकाव्य - इलंगो अडिगल द्वारा (कोवलन और कन्नगी की कहानी)
  • मणिमेकलई: शिलप्पदिकारम की अगली कड़ी - सत्तनार द्वारा
  • थिरुक्कुरल: थिरुवल्लुवर द्वारा - नैतिक ग्रंथ - तमिल वेद कहलाता है

 


 

16. महत्वपूर्ण विदेशी यात्री

 

16.1 मेगस्थनीज (302-298 ईसा पूर्व)

  • सेल्यूकस निकेटर द्वारा चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजे गए यूनानी राजदूत
  • इंडिका लिखी - मौर्य भारत का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत
  • पाटलिपुत्र को एक भव्य नगर बताया
  • भारत में दासता का उल्लेख नहीं (जो गलत था - उन्होंने जाति को दासता समझा)
  • भारत की सामाजिक संरचना, जानवरों और प्रशासन का वर्णन किया

 

16.2 फाह्यान (399-414 ईस्वी)

  • चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के शासनकाल में भारत आए चीनी बौद्ध भिक्षु
  • बौद्ध पांडुलिपियां एकत्र करने और बौद्ध धर्म का अध्ययन करने आए
  • मुख्यतः पाटलिपुत्र, मथुरा और श्रीलंका में रहे
  • उनका विवरण: फो क्यो ची (बौद्ध राज्यों का अभिलेख)
  • भारत को समृद्ध और शांतिपूर्ण बताया
  • लोगों को सरकारी उत्पीड़न से मुक्त पाया
  • गुप्त भारत में मृत्युदंड न होने का उल्लेख किया

 

16.3 ह्वेनसांग / शुआनजांग (629-645 ईस्वी)

  • भारत आए सबसे महान चीनी यात्री - हर्षवर्धन के शासनकाल में
  • 15 वर्ष भारत में रहे
  • आचार्य शीलभद्र के अधीन नालंदा विश्वविद्यालय में कई वर्षों तक अध्ययन किया
  • उनका विवरण: सी-यू-की (पश्चिमी क्षेत्रों का अभिलेख)
  • भारत में बौद्ध धर्म के पतन का वर्णन किया
  • हर्ष को उदार शासक बताया
  • 7वीं शताब्दी में भारत को समझने के लिए मूल्यवान स्रोत
  • चीन में 657 बौद्ध ग्रंथ वापस ले गए

 

16.4 अलबेरूनी (1017-1030 ईस्वी)

  • महमूद गजनवी के साथ आए मध्य एशियाई विद्वान
  • किताब-उल-हिंद (तहकीक-ए-हिंद) लिखी - भारत का सबसे विस्तृत विवरण
  • भगवद गीता और पतंजलि के योग सूत्र सहित संस्कृत ग्रंथों का अनुवाद किया
  • भारतीय विद्वत्ता और विज्ञान की प्रशंसा की
  • भारत की जाति व्यवस्था की आलोचना की

 


 

17. SSC CGL महत्वपूर्ण एक-पंक्ति तथ्य - प्राचीन इतिहास

  1. सिंधु घाटी सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता भी कहते हैं
  2. हड़प्पा की खोज दयाराम साहनी ने 1921 में की
  3. मोहनजोदड़ो का अर्थ है मृतकों का टीला
  4. विश्व का पहला गोदीबाड़ा लोथल (गुजरात) में मिला
  5. राखीगढ़ी (हरियाणा) भारत में सबसे बड़ा IVC स्थल है
  6. IVC की लिपि आज तक नहीं पढ़ी जा सकी है
  7. भीमबेटका शैलाश्रय पुरापाषाण काल से संबंधित है
  8. मेहरगढ़ उपमहाद्वीप में सबसे पुरानी नवपाषाण स्थल है
  9. ऋग्वेद सबसे पुराना वेद है
  10. सामवेद भारतीय शास्त्रीय संगीत का उद्गम है
  11. 16 महाजनपद का उल्लेख अंगुत्तर निकाय में है
  12. वैशाली विश्व का पहला ज्ञात गणराज्य था
  13. बिंबिसार मगध का पहला महत्वपूर्ण राजा था
  14. अजातशत्रु ने राजगृह में पहली बौद्ध संगीति आयोजित की
  15. महावीर का जन्म kundagrama (वैशाली के पास) में हुआ
  16. महावीर का प्रतीक सिंह था
  17. जैन धर्म के पहले तीर्थंकर ऋषभदेव थे
  18. बुद्ध का जन्म लुंबिनी (नेपाल) में 563 ईसा पूर्व में हुआ
  19. बुद्ध का पहला उपदेश सारनाथ में धम्मचक्कपवत्तन कहलाता है
  20. बुद्ध की मृत्यु कुशीनगर में 483 ईसा पूर्व में हुई
  21. तीसरी बौद्ध संगीति अशोक के शासन में पाटलिपुत्र में हुई
  22. चंद्रगुप्त मौर्य ने 322 ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य की स्थापना की
  23. चाणक्य ने अर्थशास्त्र लिखा
  24. मेगस्थनीज ने इंडिका लिखी
  25. अशोक ने 261 ईसा पूर्व में कलिंग युद्ध लड़ा
  26. जेम्स प्रिंसेप ने 1837 में ब्राह्मी लिपि को समझा
  27. अशोक चक्र में 24 तीलियां हैं
  28. भारत का राष्ट्रीय प्रतीक - सारनाथ की सिंह राजधानी
  29. कनिष्क ने चौथी बौद्ध संगीति आयोजित की
  30. शक संवत 78 ईस्वी में शुरू हुआ
  31. गुप्त काल को भारत का स्वर्ण युग कहते हैं
  32. समुद्रगुप्त को भारत का नेपोलियन कहते हैं
  33. फाह्यान ने चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में भारत की यात्रा की
  34. आर्यभट्ट ने पाई = 3.1416 का मान निकाला
  35. कालिदास ने अभिज्ञान शाकुंतलम लिखा
  36. नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना कुमारगुप्त प्रथम ने की
  37. ह्वेनसांग ने नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन किया
  38. हर्षवर्धन को नर्मदा नदी पर पुलकेशी द्वितीय ने हराया
  39. बाणभट्ट ने हर्षचरित लिखा
  40. एलोरा का कैलास मंदिर राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम ने बनाया
  41. अजंता गुफाएं बौद्ध चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध हैं
  42. खजुराहो मंदिर चंदेल राजपूतों ने बनाए
  43. पृथ्वीराज चौहान तराइन के दूसरे युद्ध (1192 ईस्वी) में पराजित हुए
  44. पंचतंत्र विष्णु शर्मा ने लिखा
  45. राजतरंगिणी कल्हण ने लिखी - कश्मीर का इतिहास
  46. तोल्काप्पियम सबसे पुराना तमिल व्याकरण ग्रंथ है
  47. शिलप्पदिकारम इलंगो अडिगल ने लिखा
  48. थिरुक्कुरल थिरुवल्लुवर ने लिखा
  49. अलबेरूनी ने किताब-उल-हिंद लिखी
  50. अष्टाध्यायी (4000 नियमों वाला संस्कृत व्याकरण) पाणिनि ने लिखा

 


 

18. अध्याय सारांश

प्राचीन भारतीय इतिहास एक समृद्ध और विशाल विषय है जो भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक पहचान की नींव है। SSC CGL के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं:

 

सर्वोच्च प्राथमिकता वाले विषय:

  • सिंधु घाटी सभ्यता - स्थल, विशेषताएं, खोजें
  • बौद्ध धर्म - बुद्ध का जीवन, चार आर्य सत्य, बौद्ध संगीतियां
  • जैन धर्म - महावीर, सिद्धांत, संप्रदाय
  • मौर्य साम्राज्य - चंद्रगुप्त, अशोक, अर्थशास्त्र, अभिलेख
  • गुप्त साम्राज्य - स्वर्ण युग, आर्यभट्ट, कालिदास
  • महत्वपूर्ण विदेशी यात्री और उनकी रचनाएं
  • प्राचीन साहित्य - लेखक और उनकी पुस्तकें

 

त्वरित पुनरावलोकन तालिका:

विषयअवश्य याद रखें
IVCलोथल गोदीबाड़ा, राखीगढ़ी सबसे बड़ा, मोहनजोदड़ो = मृतकों का टीला
बौद्ध धर्मजन्म लुंबिनी, ज्ञान बोधगया, पहला उपदेश सारनाथ, मृत्यु कुशीनगर
जैन धर्ममहावीर का जन्म कुंडग्राम, मृत्यु पावापुरी, पांच व्रत, दो संप्रदाय
मौर्यस्थापना 322 ईसा पूर्व, अशोक - कलिंग युद्ध 261 ईसा पूर्व, चाणक्य का अर्थशास्त्र
गुप्तस्वर्ण युग, समुद्रगुप्त = नेपोलियन, आर्यभट्ट, कालिदास
यात्रीमेगस्थनीज - इंडिका, फाह्यान - चंद्रगुप्त द्वितीय, ह्वेनसांग - हर्ष