एसएससी सीजीएल

सामान्य विज्ञान - जीव विज्ञान

जीव विज्ञान SSC CGL सामान्य विज्ञान का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है जो हर साल 4 से 6 प्रश्न देता है। विषय में जीव विज्ञान की शाखाएं, कोशिका संरचना, आनुवांशिकी, मानव शरीर की प्रणालियां, विटामिन, रोग और पादप जगत शामिल हैं। प्रश्न सीधे, तथ्यात्मक और बहुत अधिक दोहराए जाने वाले हैं। जो छात्र यहां दिए गए प्रमुख तथ्यों को याद करते हैं, वे इस अनुभाग में आसानी से स्कोर करेंगे।

 


 

1. जीव विज्ञान की प्रमुख शाखाएं

शाखाअध्ययन का विषय
विटीकल्चरअंगूर की खेती
एपीकल्चरमधुमक्खी पालन का अध्ययन
सेरीकल्चररेशम कीट पालन
पिसीकल्चरमछली पालन
ओलेरीकल्चरसब्जियों की खेती (उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन)
पोमोलॉजीफलों का अध्ययन
फ्लोरीकल्चरफूलों की खेती
हॉर्टिकल्चरफलों और सब्जियों का अध्ययन
एंटोमोलॉजीकीटों का मनुष्यों, पर्यावरण और अन्य जीवों के साथ संबंधों का अध्ययन
माइकोलॉजीकवक का अध्ययन
इथोलॉजीपशु व्यवहार का अध्ययन
साइनोलॉजीपालतू कुत्तों का वैज्ञानिक अध्ययन
पेडोलॉजी (मृदा विज्ञान)मिट्टी का विज्ञान
क्रेनियोलॉजीमानव खोपड़ी का अध्ययन
कार्पोलॉजीफलों एवं बीजों का अध्ययन

 


 

2. कोशिका - सिद्धांत, संरचना और कार्य

 

2.1 जन्तु कोशिका

  • राइबोसोम राइबोसोमल RNA और प्रोटीन से मिलकर बना होता है
  • एंटोन वान ल्यूवेनहॉक ने 1674 में एकल-कोशिका वाले जीवन रूपों की खोज की
  • उन्होंने उन्नत माइक्रोस्कोप की सहायता से पहली बार तालाब के पानी में शैवाल स्पाइरोगाइरा में मुक्त जीवित कोशिकाओं को देखा था
  • रॉबर्ट हुक (इंग्लैंड के वैज्ञानिक) ने 1665 में कोशिका की खोज की
  • ल्यूवेनहॉक द्वारा लिखित पुस्तक 'Secretes of Nature' है

कोशिका झिल्ली:

  • कोशिका झिल्ली के संबंध में कथन-I सत्य है - यह अपने दोनों तरफ मिलने वाले अणुओं के लिए चयनित पारगम्यता रखती है
  • यह झिल्ली दोनों ओर मिलने वाले अणुओं के लिए चुनिंदा पारगम्य है

कोशिकांग:

  • राइबोसोम: कोशिकाओं में प्रोटीन का संश्लेषण राइबोसोम में होता है
  • जॉर्ज पैलेड (1953) ने इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा सघन कणिकामय संरचना राइबोसोम को सर्वप्रथम देखा था
  • माइटोकॉन्ड्रिया: कोशिका का शक्ति-गृह (पावरहाउस) - सेलुलर श्वसन द्वारा ATP उत्पन्न करता है
  • गॉल्जी उपकरण: प्रोटीन को प्रसंस्कृत और पैक करता है
  • लाइसोसोम: पाचक एंजाइम होते हैं, कोशिका के आत्मघाती थैले कहलाते हैं

कोशिका झिल्ली की परतें:

  • 1925 में गोर्टर और एफ. ग्रेन्डल ने वसा (लिपिड) के सतह क्षेत्रफल की जांच करके यह निष्कर्ष निकाला कि कोशिकाओं को घेर रही वसा सतह दो परतों वाली होनी चाहिए

 

2.2 पादप कोशिका

  • पादप कोशिकाओं का सबसे बाहरी आवरण कोशिका भित्ति कहलाता है
  • पादपों में पेक्टिन मध्य पटल में प्राथमिक कोशिका और द्वितीयक भित्तियों में मौजूद होता है - यह कोशिका विस्तार के समय विकास के प्रारंभिक चरणों में संचित होता है
  • कोशिका भित्ति केवल पादप कोशिकाओं में पाई जाती है (जंतु कोशिकाओं में नहीं)
  • क्लैमाइडोमोनस - एक प्रकार की अगुणित एककोशिकीय यूकेरियोट कोशिकाओं का व्यास ~10µm है, और उनका लगभग आधा आयतन कप के आकार के क्लोरोप्लास्ट द्वारा घिरा होता है

3. ऊतक

 

3.1 पादप ऊतक

  • पादपों में जाइलम मुख्य रूप से पौधों की जड़ों से जल को पत्तियों और शाखाओं तक पहुंचाने का कार्य करता है
  • फ्लोएम खाद्य पदार्थों (पत्तियों द्वारा प्रकाश संश्लेषण से निर्मित) को पौधों के अन्य भागों तक पहुंचाता है
  • पौधों में जाइलम और फ्लोएम दोनों संवहन ऊतक के रूप में पाए जाते हैं

मुख्य अंतर:

  • जाइलम: जल और खनिज परिवहन (जड़ों से सभी भागों तक)
  • फ्लोएम: भोजन परिवहन (पत्तियों से सभी भागों तक)

 


 

4. जैव अणु

 

4.1 न्यूक्लिक अम्ल (DNA और RNA)

एंजाइम/प्रोटीनDNA प्रतिकृति में भूमिका
हेलिकेजDNA की डबल हेलिक्स को खोलता है
RNA प्राइमेजRNA प्राइमर संश्लेषण
DNA पोलीमरेजन्यूक्लियोटाइड पोलीमराइजेशन
DNA लिगेजनए DNA खंड 3 सिरे को पिछले वाले के 5' सिरे से जोड़ता है
  • DNA (डी-ऑक्सीराइबो न्यूक्लिक एसिड) एक प्राकृतिक ज्वाला मंदक है
  • जेम्स वाटसन तथा फ्रांसिस क्रिक ने 1953 में DNA की द्विकुंडलित संरचना प्रस्तुत की - 1962 में नोबेल पुरस्कार मिला
  • DNA को प्रमुख रूप से कोशिका के नाभिक (Nucleus) में संग्रहीत किया जाता है (कुछ माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट में भी)
  • DNA जीन के माध्यम से सभी आनुवांशिक क्रियाओं का संचालन करता है और प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करता है

 

4.2 प्रोटीन और वसा

  • प्रोटीन को 'बॉडीबिल्डिंग फूड' के रूप में जाना जाता है
  • प्रोटीन अमीनो एसिड के रूप में बने होते हैं जो सेल के बिल्डिंग ब्लॉक्स के रूप में कार्य करते हैं
  • सोयाबीन में प्रति ग्राम प्रोटीन की मात्रा सबसे अधिक है - 38-40% प्रोटीन, 22% तेल, 21% कार्बोहाइड्रेट
  • केसीन स्तनधारी प्राणियों के दूध में पाया जाने वाला मुख्य फास्फोप्रोटीन है - कैल्शियम और सीनेट के रूप में रहता है
  • गाय के दूध में लगभग 80% तथा स्त्रियों (माँ) के दूध में 20-45% पाया जाता है
  • केसीन प्रोटीन में लगभग 15 एमिनो अम्ल पाए जाते हैं

 

4.3 एंजाइम

  • एमाइलेज एक एंजाइम है जो प्रोटोजोआ के अलावा प्राणि जगत के सभी सदस्यों में मौजूद है
  • यह स्टार्च को ग्लूकोज और माल्टोज में तोड़ देता है
  • मानव की लार में एमाइलेज पाया जाता है - पाचन में सहायक होता है
  • लाइपेज पायसीकृत वसा का विघटन करता है (अग्न्याशय द्वारा स्रावित)
  • पेप्सिन प्रोटीन का पाचन करता है (आमाशय में)
  • टाइलिन एंजाइम मानव की लार में पाया जाता है - स्टार्च (मंड) को माल्टोज में परिवर्तित करता है

 

4.4 कार्बोहाइड्रेट

  • ऐमिलम स्टार्च का दूसरा नाम है - विशेष रूप से मकई, आलू, गेहूं और चावल के बीजों, फलों, कंदों, पौधों की जड़ों और तनों के गूदे में पाया जाता है
  • स्टार्च वनस्पति जगत में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला कार्बोहाइड्रेट है
  • स्टार्च मनुष्यों के लिए आहार का मुख्य स्रोत है
  • स्टार्च में ऐमिलोस तथा एमाइलोपेक्टिन नामक दो पॉलीसैकेराइड पाए जाते हैं
  • मोनोसैकेराइड सबसे सरल कार्बोहाइड्रेट हैं - फ्रक्टोज और ग्लूकोज इसके उदाहरण हैं
  • सुक्रोज और स्टार्च मोनोसैकेराइड नहीं हैं
  • मानव शरीर में एमाइलेज एंजाइम कार्बोहाइड्रेट को तोड़ने में मदद करता है
  • टाइलिन एंजाइम स्टार्च (मंड) को माल्टोज में; माल्टोज को ग्लूकोज में परिवर्तित करता है (आंतों में)

 


 

5. गुणसूत्र

  • झिल्लीदार गर्दन (Webbed Neck) टर्नर सिंड्रोम का अभिलक्षण है
  • टर्नर सिंड्रोम लड़कियों में पाई जाने वाली वह अवस्था है जिसमें कोई लड़की शरीर की प्रत्येक कोशिका में या कुछ कोशिकाओं में सिर्फ एक X गुणसूत्र (Monosomy) या अधूरे दूसरे X गुणसूत्र के साथ पैदा होती है
  • औसतन 5,000 स्त्रियों में से एक में टर्नर सिंड्रोम होती है
  • परिणाम: पूर्णरूपेण स्त्रीगुण विकसित नहीं होता, कद छोटा एवं जननांग अल्पविकसित होते हैं - मासिक धर्म नहीं होता

 


 

6. आनुवांशिकी

  • अमेरिकी कोशिका-आनुवांशिकी विज्ञानी जो हिन जिओ ने वर्ष 1956 में एक शोध प्रकाशित किया जिसमें 2n = 46 को मानव गुणसूत्रों की सटीक संख्या के रूप में परिभाषित किया गया था
  • विल्सन रोग एक आनुवांशिक रोग है जिसमें कॉपर शरीर में अत्यधिक मात्रा में संचय होता है
  • प्रमुख लक्षण: पैरों या पेट में फ्लूड बनना, बोलने, निगलने या शारीरिक समन्वय में समस्याएं, अनियंत्रित गतिविधियां या मांसपेशियों में अकड़न
  • रतौंधी विल्सन रोग का लक्षण नहीं है
  • आनुवांशिक रूप से समान व्यक्तियों (जुड़वा) के बीच प्रत्यारोपण को आइसोग्राफ्ट कहते हैं
  • ऑटोग्राफ्ट - उसी व्यक्ति के भीतर प्रत्यारोपण
  • एलोग्राफ्ट - आनुवांशिक रूप से भिन्न व्यक्तियों के बीच प्रत्यारोपण

 


 

7. जैव विकास

  • पृथ्वी पर एक बड़े उल्कापिंड प्रभाव के परिणामस्वरूप डायनासोर के विलुप्त होने का सिद्धांत लुईस अल्वारेज की देन है
  • प्रोफेसर केलर के अनुसार, उल्का पिंडों की टक्कर के अलावा कई पर्यावरणीय बदलाव और ज्वालामुखी विस्फोट के कारण भी डायनासोर विलुप्त हुए
  • एपेंडिक्स एक अवशेषी अंग है
  • अवशेषी अंग वे होते हैं जो जीवों के पूर्वजों में पूर्ण विकसित होते हैं परंतु जैवविकास के क्रम में इनका क्रमिक लोप होने लगता है
  • मनुष्य में लगभग 100 अवशेषी अंग पाए जाते हैं जैसे- एपेंडिक्स, त्वचा के बाल, कर्णपल्लव आदि
  • "योग्यतम की उत्तरजीविता (Survival of the Fittest)" वाक्यांश हर्बर्ट स्पेन्सर का कथन है
  • स्पेन्सर ने सबसे पहले इस वाक्यांश का प्रयोग चार्ल्स डार्विन की 'ऑन द ओरिजिन ऑफ स्पीशीज' पढ़ने के बाद अपनी पुस्तक प्रिंसिपल्स ऑफ बायोलॉजी (1864) में किया था

 


 

8. जन्तु जगत

 

8.1 पोरीफेरा (स्पंज)

  • ओबेलिया एक ऐसे जीव है जो समैकांतरण (मेटाजेनेसिस) प्रदर्शित करता है
  • यह नाइडेरिया संघ का जीव है जो मुख्यतः समुद्र तट के उथले जल में चट्टानों तथा समुद्री खरपतवार इत्यादि से चिपके हुए पाए जाते हैं
  • नाइडेरिया संघ: द्विपक्षीय समरूपता नहीं पाई जाती है - जलीय आवासों में पाए जाने वाले रेडियन सममित, मुलायम शरीर वाले जानवर - जैसे जेलीफिश, मूंगा और हाइड्रा
  • जेलीफिश संघ नाइडेरिया (नीडेरिया) का एक उदाहरण है
  • संघ सीलेन्ट्रेटा का आधुनिक नाम संघ नीडेरिया है
  • संघ पोरीफेरा के प्रमुख जीव: यूस्पंजिया, स्पंजिला, यूप्लेक्टेला, साइकन, हायलोनेमा आदि

 

8.2 प्लैटीहेल्मिंथीज (चपटे कृमि)

  • प्लैटीहेल्मिंथीज (चपटे कृमि) में अखंडित, द्विपार्श्विक रूप में समित, कोमल शरीर हैं
  • इनमें एक त्रिकोरकी संरचना (कोशिकाओं की तीन परतें होती हैं)
  • किसी प्रगुहा, कंकाल और गुदा से रहित होती है
  • फ्लेम कोशिका प्लेटीहेल्मिंथीज समूह में पाई जाने वाली एक विशेष उत्सर्जी कोशिका है जो कि किडनी की तरह काम करती है तथा निस्पंदन के माध्यम से अपशिष्ट पदार्थ को हटाती है
  • संघ पृथुकृमि (Platyhelminthes) से संबंधित जीवों को 'चपटाकृमि (Flatworms)' भी कहा जाता है
  • गलत युग्म: एंकिलोस्टोमा का संबंध पिनकृमि से नहीं बल्कि गोल कृमि (एस्केलमिथीज) से है

 

8.3 ऐनेलिडा

  • ताजे पानी के तालाबों, झीलों और दलदलों में पाए जाने वाले जंतुओं का संघ जिनमें चलन हेतु शूक (setae) या पैरापेडिया होती है - ऐनेलिडा है
  • इन्हें खंडित कीड़े के रूप में भी जाना जाता है
  • यह एक विशाल संघ है जिसमें रिंगवर्म, केंचुएं और जोंक सहित 22 हजार से अधिक प्रजातियां शामिल हैं
  • पक्वाशय (गिजर्ड) लाल कृमियों में एक संरचना होती है जो उनका भोजन पीसने में उनकी सहायता करती है

 

8.4 आर्थ्रोपोडा

  • आर्थ्रोपोडा जंतु संघ में शरीर सिर, वक्ष और उदर में विभाजित होता है
  • यह प्राणि जगत का सबसे बड़ा संघ है
  • आर्थ्रोपोडा द्विपार्श्विक समरूपता प्रदर्शित करता है
  • बिच्छू आर्थ्रोपोड का उदाहरण है
  • उदाहरण: काँकरोच, झींगा, केकड़ा, बिच्छू, घरेलू मक्खी, किलनी, सूक्ष्म कीट
  • मधुमक्खी की 5 आंखें होती हैं - 2 बड़ी मिश्रित आंखें (Large compound eyes) और 3 छोटी ओसीली आंखें (Smaller occelli eyes)
  • तितली का जीवन चक्र: अंडा → लार्वा → प्यूपा → वयस्क
  • टिड्डा के कान उसके पेट पर स्थित होते हैं

 

8.5 मोलस्का

  • घोंघा एक अकशेरुकी प्राणी है (मोलस्का वर्ग के अंतर्गत आता है)
  • पक्षी, स्तनधारी तथा मछली ये सभी संघ कार्डेटा के अंतर्गत आते हैं
  • घोंघा संघ मोलस्का का जंतु है - अकशेरुकी का दूसरा सबसे बड़ा संघ है
  • इनका कोमल शरीर एक कवच से ढका रहता है

 

8.6 एकाइनोडर्मेटा

  • इस समूह का नाम उनकी कांटेदार त्वचा के कारण रखा गया है और उनमें विशिष्ट जल संवहन नाल पाया जाता है
  • इनमें कैल्शियम युक्त अंत: कंकाल पाया जाता है
  • एकाइनोडर्मेटा (शूलयुक्त प्राणी) - जल संवहन तंत्र इस संघ की विशिष्टता है
  • उदाहरण: तारामछली, समुद्री अर्चिन, समुद्री ककड़ी

 

8.7 कार्डेटा

  • रज्जुकी जीवों में - पृष्ठ रज्जु (Notochord) पाया जाता है
  • हृदय अधर भाग में होता है
  • गुदा के पीछे पूंछ उपस्थित होती है
  • मेंढक अंडज (Oviparous) जीव है
  • अंडे देने वाले जीव: सर्प, पक्षी, मछली, कछुआ
  • मगरमच्छों में चार प्रकोष्ठीय हृदय होता है
  • मानव का संबंध कुल होमिनिडे (Hominidae) से है
  • घरेलू कुत्ते का वैज्ञानिक नाम: कैनिस ल्यूपस फेमिलेरिस (Canis lupus familiaris)
  • मार्सूपियल्स अपने बच्चों को थैली में ले जाते हैं - उदाहरण: कंगारू

 


 

9. मानव शरीर

 

9.1 पाचन तंत्र

  • लाइपेज एंजाइम पाचन की प्रक्रिया में पायसीकृत वसा का विघटन कार्य करता है
  • लाइपेज अग्न्याशय द्वारा स्रावित होता है
  • यह ट्राइग्लिसराइड्स जैसे वसा को हाइड्रोलाइज करता है
  • एक वयस्क मानव के पास 4 कैनाइन दांत होते हैं
  • मनुष्य के दांतों के प्रकार:
    • कृन्तक: 8 (भोजन काटने के लिए)
    • रदनक: 4 (भोजन फाड़ने के लिए)
    • अग्र चवर्णक: 8 (भोजन चबाने एवं पीसने के लिए)
    • चवर्णक: 12 (भोजन चबाने एवं पीसने के लिए)

 

9.2 रुधिर परिसंचरण तंत्र

  • आयरन रक्त में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए आवश्यक है
  • यह लाल रुधिर कणिकाओं में पाया जाता है
  • हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड के परिवहन में भाग लेता है
  • श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBC) को "मानव शरीर के सैनिक" कहा जाता है
  • ये हमें संक्रामक रोग तथा बाहरी रोगों से बचाती हैं
  • ल्यूकोसाइट्स के रूप में भी जाना जाता है
  • वयस्क मनुष्य के शरीर में इनकी संख्या 6-8 हजार प्रति क्यूबिक मिली. होती है
  • रक्त का उत्पादन अस्थि मज्जा (Bone Marrow) में होता है
  • लाल अस्थि मज्जा से लाल रुधिर कणिकाएं (RBCs) तथा पीली अस्थि मज्जा से श्वेत रुधिर कणिकाएं (WBCs) का निर्माण होता है
  • हीमोग्लोबिन और मायोग्लोबिन दोनों के निर्माण के लिए भी आयरन आवश्यक है

 

9.3 श्वसन तंत्र

  • ग्लूकोज के एक अणु के श्वसन (respiration) द्वारा 38 ATP के अणु प्राप्त होते हैं

 

9.4 उत्सर्जन तंत्र

  • क्रिएटिनिन एक रासायनिक अपशिष्ट है जो मानव मूत्र में सामान्यतः पाया जाता है
  • मानव शरीर की मांसपेशियों के उपापचय से इसकी उत्पत्ति होती है
  • लगभग 2% क्रिएटिन प्रतिदिन मानव शरीर में 'क्रिएटिनिन' में परिवर्तित होता है
  • किडनी द्वारा उत्सर्जित होकर मानव मूत्र के साथ निकलता है
  • मानव मूत्र का पीला रंग यूरोक्रोम के कारण होता है (जो हिमोग्लोबिन के अपघटन के कारण बनता है)
  • सामान्य मूत्र हल्का (Ph = 6.00) अम्लीय होता है
  • साधारण मनुष्य 24 घंटे में 100-1800 ml मूत्र का निर्माण करता है

 

9.5 तंत्रिका तंत्र

  • आंख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को पुतली द्वारा सीमित और नियंत्रित किया जाता है
  • कर्णपालि (Pinna) मस्तिष्क का भाग नहीं है - यह कान का सबसे बाहरी भाग है
  • कर्णपालि ध्वनि तरंगों का एकत्र कर कर्ण कुहर में भेजती है
  • मस्तिष्क के भाग: चेतक (Thalamus), पॉन्स, मज्जा (Medulla), प्रमस्तिष्क (Cerebrum), अनुमस्तिष्क (Cerebellum)
  • यूस्टेकियन नलिका कान के पर्दे के दोनों ओर के दबाव को बराबर करने में सहायता करती है
  • सेरिबेलम (अनुमस्तिष्क) मोटर नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है
  • यह सन्तुलन बनाने में मुख्य भूमिका निभाता है और अन्य शारीरिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है
  • इसे छोटा मस्तिष्क भी कहा जाता है
  • मीबोमियन ग्रन्थि आंख में स्थित होती है
  • यह एक विशेष प्रकार सिबेसियस ग्रन्थि है जो आखों की पलक के चारों ओर स्थित रहती है
  • यह एक तैलिय पदार्थ का स्रावण (उत्पन्न करना) करती है जो कि आखों से आसूओं के सूखने (evaporation) को रोकने में मदद करती है
  • मीबोमियन ग्रन्थि ऊपर पलक में 50 तथा नीचे के पलक में 25 होती है

 

9.6 कंकाल तंत्र

  • एक वयस्क मानव शरीर में 206 हड्डियां होती हैं
  • ऊर्वस्थि (Femur/जांघ की हड्डी) सबसे लंबी और मजबूत हड्डी है
  • रकाब (Stapes), ककुद (Malleus) और स्थूण (Incus) कान की हड्डियां हैं - कान के पर्दे से परस्पर जुड़ी होती हैं

 

9.7 अंत:स्रावी तंत्र

  • स्तनपान के दौरान स्तन से दूध निकलने के लिए हार्मोन प्रोलैक्टिन उत्तरदायी है
  • प्रोलैक्टिन: गर्भकाल के दौरान स्तनों में वृद्धि तथा शिशु जन्म के बाद दुग्ध के स्रावण (Lactation) को प्रेरित करता है
  • ऑक्सीसीटोसिन: गर्भकाल की समाप्ति पर स्त्रियों में प्रसव पीड़ा तथा उसके बाद स्तनों से दूध निकालने में सहायता करता है
  • एस्ट्रोजन: स्त्रियों में द्वितीयक लक्षणों के विकास के लिए उत्तरदायी है
  • प्रोजेस्ट्रोन: इसका स्रावण कार्पस ल्यूटियम से होता है जो गर्भधारण से संबंधित लक्षणों के विकास में उत्तरदायी है
  • अन्य अंत:स्रावी ग्रंथियों के कार्य को नियंत्रित करने वाली ग्रंथि पिट्यूटरी ग्रंथि है
  • पीयूष ग्रंथि (Pituitary Gland) मानव मस्तिष्क में सेला टर्सिका नामक अस्थिल गुहा में स्थित होती है
  • एक वृत्त के द्वारा हाइपोथैलेमस से जुड़ी होती है
  • इसका आकार मटर के दाने जैसा होता है तथा भार लगभग 0.6 ग्राम होता है
  • पीयूष ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि भी कहते हैं
  • इन्सुलिन का स्राव मानव शरीर के अग्न्याशय से होता है
  • अग्न्याशय कशेरूकी जीवों के पाचन व अंत:स्रावी प्रणाली का एक ग्रन्थि अंग है
  • यह इन्सुलिन, ग्लूकागोन व सोमेटोस्टेटिन जैसे कई जरूरी हार्मोन्स बनाने वाली अंत: स्रावी ग्रन्थि है
  • थाइमस ग्रन्थि फेफड़ों के बीच विद्यमान रहती है
  • यह गुलाबी, चपटी, द्विपालित ग्रन्थि है जो थाइमोसीन और थाइमीन हार्मोन स्रावित करती है
  • यह हार्मोन शरीर में लिम्फोसाइट कोशिकाएं बनाने में सहायक होता है जो शरीर में एन्टीबॉडी बनाकर शरीर का सुरक्षा तंत्र स्थापित करने में सहायक होती है

 

9.8 प्रजनन तंत्र

  • अंडाशय (Ovary) महिलाओं का प्राथमिक जननांग है

 


 

10. विटामिन एवं पोषण

  • थायमीन (विटामिन B₁) 1897 में खोजा गया पहला B विटामिन था - कमी से बेरी-बेरी नामक रोग होता है
  • विटामिन K की कमी से घावों से अत्यधिक रक्तस्राव होता है - रक्तस्राव रोधी विटामिन कहलाता है
  • विटामिन K की कमी से हीमोफीलिया नामक रोग होता है

 

पोषक तत्व-उदाहरण मिलान:

पोषक तत्वउदाहरण
प्रोटीनमायोसिन
कार्बोहाइड्रेटशर्करा
वसाकोलेस्ट्रॉल
खनिज पदार्थकैल्शियम, फॉस्फोरस
  • विटामिन और खनिज हमारे शरीर में उपापचयी अभिक्रियाओं के लिए सहायक होते हैं
  • स्वस्थ वयस्कों और चार वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों में कोलेस्ट्रॉल के अंतर्ग्रहण के लिए RDA (Recommended Dietary Allowances): 300 mg/दिन

 

विटामिन की कमी से होने वाले रोग:

विटामिनकमी से होने वाला रोग
Aरतौंधी, जीरोफ्थेल्मिया
B₁बेरी-बेरी
B₂त्वचा का फटना
B₃पेलाग्रा, त्वचा पर दाद
B₅बाल सफेद होना, मंदबुद्धि
B₆एनीमिया, त्वचा रोग
B₁₂एनीमिया, पांडुरोग
Cस्कर्वी, मसूड़ों का फूलना
Dरिकेट्स
Eजननशक्ति में कमी
Kरक्त का थक्का न बनना
  • एस्कॉर्बिक एसिड विटामिन C (C₆H₈O₆) का लोकप्रिय नाम है - कमी से स्कर्वी रोग होता है

 


 

11. मानव रोग, लक्षण एवं उपचार

 

11.1 रोग एवं लक्षण

  • मलेरिया आनुवांशिक बीमारी नहीं है - यह प्लाज्मोडियम नामक परजीवी के कारण होती है जो संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छरों के माध्यम से लोगों में फैलती है
  • एक्रोमेगाली एक हार्मोनल विकार है (पिटयूटरी ग्रंथि द्वारा अत्यधिक ग्रोथ हार्मोन) - हाथों, पैरों और चेहरे में असामान्य वृद्धि होती है
  • सही युग्म: मधुमेह - इन्सुलिन; गण्डमाला - थायरॉक्सिन; कुशिंग सिंड्रोम - कार्टिसोल (एड्रेनालाइन नहीं)

रोग-प्रभावित अंग मिलान:

रोगप्रभावित अंग
अल्जाइमर रोगदिमाग
डिप्थीरियानाक और गला
गोनोरिया (सूजाक)प्रजनन मार्ग
कण्ठमाला का रोगलार ग्रंथियां
  • ग्लूकोमा कैंसर का एक रूप नहीं है - यह आंख की बीमारी है जो आंख की ऑप्टिक तंत्रिका को नुकसान पहुंचाती है
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, विश्व में नेत्रहीनता का दूसरा सबसे बड़ा कारण ग्लूकोमा है
  • हैजा दूषित जल पीने से होता है - विब्रियो कोलेरी नामक जीवाणु के कारण होने वाला आंत संबंधी संक्रामक रोग
  • सूखारोग (रिकेट्स): हड्डियों का रोग, प्राय: बच्चों में होता है
  • एनीमिया (रक्ताल्पता): लाल रक्त कोशिका (RBCs) में हीमोग्लोबिन की संख्या में कमी
  • तपेदिक (श्वेत प्लेग/White Plague) को क्षय रोग नाम से भी जाना जाता है
  • गठिया रोग मुलतः प्यूरिन नामक प्रोटीन के मेटाबोलिज्म की विकृति से होता है - खून में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है, और यही एसिड जोड़ों में इकट्ठा हो जाती है जिससे दर्द होता है
  • इपीलेप्सी (मिर्गी) एक विकार है जिसके परिणामस्वरूप मस्तिष्क की कोशिकाओं से असामान्य विद्युत निर्वहन होता है जिससे दौरे पड़ते हैं
  • सिरोसिस संचारणीय नहीं है - यह यकृत से सम्बन्धित बीमारी है जो अत्यधिक मदिरा सेवन से होती है
  • संचारणीय रोग: एड्स, हेपेटाइटिस बी, सिफलिस
  • चेचक वैरिसेला जोस्टर नामक विषाणु के कारण होती है - शरीर पर चकते और लाल दाने उभर आते हैं
  • टाइफाइड ज्वर की पहचान विडाल परीक्षण से की जा सकती है
  • टाइफाइड साल्मोनेला टाइफी नामक जीवाणु से दूषित पानी एवं भोजन के माध्यम से फैलता है
  • हीमोफोबिया रक्त का एक गहन भय है
    • अंधेरे से डर: निक्टोफोबिया (Nyctophobia)
    • ऊंचाई से डर: एक्रोफोबिया (Acrophobia)
    • पानी से डर: एक्वाफोबिया (Aquaphobia)
  • खसरा (Measles) मोर्बिली वायरस के कारण होने वाला संक्रामक रोग है
  • घेंघा (गण्डमाला) रोग प्राय: आयोडीन की कमी के कारण उत्पन्न होता है - थायरॉइड ग्रंथि फैलने लगती है
  • वील्स रोग में किडनी प्रभावित होता है - लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया के कारण होता है
  • एड्स विषाणु रक्त में T-कोशिका की वृद्धि को प्रभावित करते हैं - HIV वायरस T4 लिम्फोसाइट की इंटरल्यूकिन बनाने की क्षमता को नष्ट कर देते हैं
  • लैप्टोस्पायरोसिस बैक्टीरिया (लेप्टोस्पाइरा इंटेरोगेन्स) से होता है - संक्रमित पशुओं के दूषित युरीन (मूत्र) से फैलता है

 

11.2 उपचार

  • बेसिल कैलमेट-गुएरिन (BCG) तपेदिक (क्षय रोग) के लिए एक टीका है
  • दो फ्रांसीसी बैक्टीरियोलॉजिस्ट अल्बर्ट कैलमेट और केमिली गुएरिन ने आविष्कार किया - पहली बार 1921 में उपयोग
  • पेनिसिलिन प्रतिजैविक औषधि कवक से प्राप्त होती है (Penicillium notatum)
  • अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1928 में खोज की - 1945 में नोबेल पुरस्कार
  • अन्य कवकों से बनी प्रतिजैविक औषधियां: नियोमाइसीन, टेरामाइसीन
  • डी.पी.टी. (DPT) टीका (डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टिटनेस) एक संयुक्त टीका है - 3 संक्रामक बीमारियों की रोक थाम के लिए
  • ट्रिपल एंटीजन के नाम से भी जाना जाता है

 


 

12. पादप जगत

 

12.1 कवक

  • कवकीय एंजाइम अपरद को सरल अकार्बनिक पदार्थों में निम्नीकृत कर सकता है
  • यह प्रक्रिया अपचय के द्वारा होती है - बड़े अणुओं को छोटी इकाइयों में तोड़ता है
  • राइजोपस, एस्परजिलस, म्यूकर - 'किंगडम फंजाई' से संबंधित हैं
  • यूग्लीना फाइलम प्रोटोजोआ के अंतर्गत आता है (कवक से नहीं)
  • यीस्ट एक कवक है (मृतोपजीवी)
  • एककोशिकीय कवक, इसकी कोशिका काइटिन की बनी होती है
  • मदिरा निर्माण तथा बेकरी उद्योग में किया जाता है
  • यीस्ट शीरा तथा मैदा का किण्वन (Fermentation) कर देता है जिससे मैदा मुलायम हो जाता है

 

12.2 शैवाल

  • एफ. ई. फ्रिच ने 1935 में शैवाल की संरचना और उनके प्रजनन तंत्र की व्याख्या की
  • शैवालों के अध्ययन को फाइकोलॉजी कहते हैं

 

शैवाल वर्ग:

वर्गसामान्य नाम
क्लोरोफाइसीहरी शैवाल
फियोफाइसीभूरा शैवाल
रोडोफाइसीलाल शैवाल
सायनोफाइसीनीले-हरे शैवाल
  • लाइकेन किन दो के बीच का सम्बन्ध है - शैवाल और कवक (परस्परिक उपयोगी सहवास)
  • शैवाल घटक को शैवालांश तथा कवक के घटक को माइकोवायंट (कवकांश) कहते हैं
  • लाइकेन वायु प्रदूषण के अच्छे सूचक होते हैं - प्रदूषित क्षेत्रों में ये विलुप्त हो जाते हैं

 

12.3 ब्रायोफाइटा

  • थैलोफाइटा समूह के अंतर्गत आने वाले पादपों की शारीरिक संरचना स्पष्ट नहीं होती है, इन पादपों को सामान्यतः शैवाल कहा जाता है और ये पौधे मुख्य रूप से जलीय होते हैं

 

12.4 अनावृतबीजी (Gymnosperm)

  • साइकस 'जिम्नोस्पर्म' वर्ग का एक पौधा है (टेरिडोफाइटा का नहीं)
  • जिम्नोस्पर्म में बीजांड अंडाशय भित्ति से ढके हुए नहीं होते और ये निषेचन से पूर्व तथा बाद में भी अनावृत ही रहते हैं

 


 

13. पादप आकारिकी

 

13.1 तना

  • प्याज में खाद्य पदार्थ सेलुलोज के रूप में संचित होता है
  • सेलुलोज की खोज फ्रांसीसी वैज्ञानिक अन्सेलमे पाइने (Anselme Payen) द्वारा 1838 में किया गया
  • इसका रासायनिक फार्मूला (C₆H₁₀O₅) होता है
  • लहसुन, लिली तथा प्याज आदि शल्ककन्द (Bulb) के उदाहरण हैं
  • आलू एक डंठल (तना/कंद) है
  • इसका वानस्पतिक नाम सोलेनम ट्यूबरोसम है
  • इसका उद्गम स्थल दक्षिण अमेरिका के पेरू राज्य को माना जाता है
  • अन्य तना वाली फसलें: हल्दी, अदरक, प्याज आदि

 

13.2 पुष्प/फल

  • पुष्प-वृंत (Pedicel) फूल का एक भाग नहीं है
  • पुष्प के भाग: बाह्यदल (Calyx), दलपुंज (Corolla), पुंकेसर (Androecium), स्त्रीकेसर (Gynoecium)
  • निषेचन के बिना फल के विकास को अनिषेक फलन (Parthenocarpy) कहा जाता है
  • ऐसे फल बीजरहित होते हैं - केला, पपीता, नारंगी, अंगूर आदि
  • गैमीटोगैमी: बीजाणुओं में समसूत्रण के द्वारा नर व मादा युग्मकों के उत्पादन की प्रक्रिया को गैमीटोगैमी (युग्मक जनन) कहते हैं
  • एपोमिक्सिस: पौधों में अर्धसूत्री विभाजन तथा निषेचन के बिना ही नये पौधों का निर्माण एपोमिक्सिस (असंगजनन) कहलाता है - गन्ना, नींबू
  • लौंग पिप्पली कुल के 'यूजीनिया कैरियोफाईलेटा' नामक मध्यम कद वाले सदाबहार वृक्ष की सुखी हुई पुष्प कलिका है

 


 

14. पादप कार्यिकी

 

14.1 प्रकाश संश्लेषण

  • प्रकाश-संश्लेषण में हरा प्रकाश सबसे कम प्रभावी है
  • प्रकाश संश्लेषण की क्रिया लाल एवं नीले प्रकाश में सबसे अधिक एवं हरे रंग के प्रकाश में सबसे कम प्रभावी होती है
  • अभिक्रिया: 6CO₂ + 12H₂O → (प्रकाश और क्लोरोफिल से) → C₆H₁₂O₆ + 6H₂O + 6O₂
  • प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के दौरान सौर ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तित होती है
  • हरे पौधे सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा का उपयोग CO₂ और पानी से ग्लूकोज को संश्लेषित करने के लिए करते हैं

 

14.2 पौधों में श्वसन

  • किण्वन एक प्रकार का अवायवीय श्वसन है - जटिल कार्बनिक यौगिक सूक्ष्म जीवों की सहायता से सरल कार्बनिक यौगिक में विघटित हो जाते हैं - ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती

 

14.3 पौधों में परिवहन

  • जब द्वार कोशिकाओं में जल प्रवाहित होता है, तो उनमें स्टोमी छिद्र खुल जाते हैं

 

14.4 पोषक तत्व

  • नाइट्रोजन स्थिरीकरण एक प्रक्रिया है जिसमें आणविक नाइट्रोजन अमोनिया में रूपांतरित होती है
  • जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण की खोज जर्मन कृषि वैज्ञानिक हरमन तथा डच वैज्ञानिक मार्टिनस ने की थी
  • वायुमंडलीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण के लिए उत्तरदायी सिम्बिओटिक जीवाणु मटर (Matar) में पाया जाता है - जीवाणु है राइजोबियम
  • एजोला धान की खेती के लिए मुद्रा उर्वरता को बढ़ाता है
  • एजोला शैवालों से मिलता जुलता एक फर्न है जिसमें धान की खेती के लिए जैविक उर्वरक का कार्य करता है
  • सामान्यतया एजोला की पंखुड़ियों में एनाबीना नामक नील हरित शैवाल पाया जाता है

 

14.5 पादप रोग

  • ब्लाइट एक प्रकार का पौधे की बीमारी से संदर्भित है जो कवक या जीवाणु रोग जनकों के कारण होता है
  • पौधों में 'किरीट पिटिका' रोग बैक्टीरिया एग्रोबैक्टेरियम ट्यूमेफेसियन्स के कारण होता है
  • इस रोग में जीवाणु पौधों की कोशिकाओं में पहुंचकर वहां पर अपना DNA छोड़ते हैं, जिससे पौधों की कोशिकाओं में अत्यधिक कोशिकाएं उत्पन्न होने लगती हैं

 

14.6 कीटभक्षी पौधे

  • ड्रोसेरा (Drosera) एक कीटभक्षी पौधा है
  • इसे सनड्यूज के नाम से भी जाना जाता है
  • इसकी गोल-गोल पत्तियों के किनारे लाल रंग की घुण्डी वाले आलपिन सरीखे बाल होते हैं, जिससे एक चिपचिपा रस निकलता रहता है, जो कीट-पतंगों को चिपका लेता है
  • अन्य कीटभक्षी पौधे: यूट्रीकुलेरिया, पिचर प्लांट, डायोनिया (Venus Flytrap)
  • वीनस फ्लाईट्रैप भी एक मांसभक्षी पौधा है

 


 

15. पौधों में जनन

  • निषेचन (Fertilization) में प्रकाश की आवश्यकता नहीं पड़ती है
  • ऑर्निथोफिली पक्षियों द्वारा होने वाला परागण है
  • पक्षियों द्वारा परागण: ऑर्निथोफिलस (Ornithophilous)
  • वायु द्वारा परागण: एनिमोफिलस (Anemophilous)
  • कीटों द्वारा परागण: एन्टोमोफिलस (Entomophilous)
  • जल द्वारा परागण: हाइड्रोफिलस (Hydrophilous)
  • घोंघे द्वारा परागण: मेलेकोफिलस (Malacophilous)
  • मादा पुष्प के अंडाशय (Ovary) भाग में निषेचन होता है

 


 

16. आर्थिक महत्व के जीव एवं वनस्पतियां

  • रेशम के कीड़े मलबरी (शहतूत) के पत्तों को खाते हैं
  • रेशम कीट अपने जीवन चक्र में प्यूपा (Pupa) अवस्था में वाणिज्यिक प्रयोग का तंतु पैदा करता है
  • जीवन चक्र के चरण: अंडा → लार्वा → प्यूपा → पूर्ण कीट (Imago)

 


 

17. आनुवांशिकी इंजीनियरिंग एवं बायोटेक्नोलॉजी

  • 'पादप ऊतक संवर्धन' का कार्य आरंभ करने का श्रेय हैबरलैंट को जाता है
  • स्कॉटलैंड के रोजलिन इंस्टीट्यूट में बनाया गया डॉली नामक पहला जीव-क्लोन भेड़ था

 


 

18. प्रमुख जैव वैज्ञानिक/आविष्कार

  • क्रिस्टियान बर्नार्ड विश्व का पहला मानव हृदय प्रत्यारोपण करने के लिए प्रसिद्ध हैं - 3 दिसंबर, 1967 को दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में
  • उन्होंने 'डेनिस डारवेल' के हृदय को 'लुई वाशकेन्स्की' के सीने में प्रत्यारोपित किया और लुई वाशकेन्स्की 18 दिन तक जीवित रहा
  • एडवर्ड जेनर ने चेचक (Smallpox) के लिए पहला टीका खोजा था
  • अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने पेनिसिलिन की खोज 1928 में की - 1945 में नोबेल पुरस्कार

 


 

19. विविध

 

पशु-संघ (फाइलम) मिलान:

पशुसंघ (फाइलम)
जेली फिशसीलेन्ट्रेटा (नीडेरिया)
क्रे फिशकीट (Arthropoda)
व्हेल मछलीस्तनपाई (Mammalia)
डेबिलमोलस्का
  • टाइफ्लोप्स (Typhlops) को आम तौर पर अंधा सांप (Blind Snake) कहा जाता है
  • पौधों का संख्यात्मक वर्गीकरण दिखाने योग्य सभी विशेषताओं पर आधारित है
  • नाशी मछली (पेस्ट फिश) पर नियंत्रण पाने के लिए मत्स्य नाशी का उपयोग किया जाता है
  • बौने रूप में वृक्षों के संवर्धन को बोनसाई कहते हैं
  • काली मिर्च का पौधा बेल (creeper) होता है
  • अल्फाल्फा एक प्रकार का घास है - लुसर्न घास के रूप में जानी जाती है - पशुओं के चारे के रूप में पूरे संसार में उगाया जाता है
  • बेरिएट्रिक सर्जरी किसी व्यक्ति के पाचन तंत्र में परिवर्तन लाती है - मोटापे की समस्या को दूर करने के लिए
  • शीतनिद्रा (Hibernation): ध्रुवीय भालू, कछुए, मेंढक और सांप जैसे बहुत से जानवर खुद को ठंड से बचाने के लिये सर्दियों में जमीन के नीचे एक सुरक्षित जगह पर छिप जाते हैं जहाँ ठंड का असर उन पर न हो, वहां उस सुरक्षित जगह पर वे पूरे मौसम यानी तीन/चार महीने तक लगातार सोए रहते हैं - इसी लम्बी निद्रा की अवस्था को हाइबरनेशन या शीत निद्रा कहते हैं
  • विशेष रूप से उमस भरी गर्मी के दौरान शरीर से निकलने वाली दुर्गंध पसीने पर जीवाणुओं की क्रिया के कारण होती है
  • कवक (Fungi) मल पदार्थ द्वारा रोगाणुओं के प्रसार के संदर्भ में F-डायग्राम के अंतर्गत नहीं आता है

 


 

20. जीव विज्ञान - SSC CGL के लिए महत्वपूर्ण एक-पंक्ति तथ्य

  1. विटीकल्चर = अंगूर की खेती
  2. एपीकल्चर = मधुमक्खी पालन
  3. सेरीकल्चर = रेशमकीट पालन
  4. एंटोमोलॉजी = कीटों का मनुष्यों और पर्यावरण के साथ संबंधों का अध्ययन
  5. पेडोलॉजी = मिट्टी का विज्ञान
  6. एंटोन वान ल्यूवेनहॉक ने 1674 में एकल-कोशिका जीवों की खोज की
  7. रॉबर्ट हुक ने 1665 में कोशिका की खोज की
  8. राइबोसोम = राइबोसोमल RNA + प्रोटीन से बना; प्रोटीन संश्लेषण का स्थल
  9. माइटोकॉन्ड्रिया = कोशिका का शक्ति-गृह (पावरहाउस)
  10. कोशिका भित्ति केवल पादप कोशिकाओं में पाई जाती है
  11. पेक्टिन - पौधों में कोशिका भित्तियों के बीच मध्य पटल में
  12. जाइलम = जल परिवहन; फ्लोएम = पौधों में भोजन परिवहन
  13. DNA द्विकुंडल - वाटसन और क्रिक ने 1953 में खोजा (नोबेल 1962)
  14. DNA मुख्यतः नाभिक में संग्रहीत
  15. प्रोटीन = बॉडीबिल्डिंग फूड
  16. सोयाबीन में प्रति ग्राम सर्वाधिक प्रोटीन (38-40%)
  17. केसीन = दूध में मुख्य प्रोटीन
  18. एमाइलेज एंजाइम सभी प्राणियों में (प्रोटोजोआ के अलावा) मौजूद
  19. ऐमिलम = स्टार्च का दूसरा नाम; मकई, आलू, गेहूं, चावल में पाया जाता है
  20. फ्रक्टोज और ग्लूकोज मोनोसैकेराइड हैं; सुक्रोज और स्टार्च नहीं
  21. झिल्लीदार गर्दन (Webbed Neck) = टर्नर सिंड्रोम का लक्षण
  22. मानव गुणसूत्र: 2n = 46 (जो हिन जिओ ने 1956 में स्थापित किया)
  23. विल्सन रोग = अत्यधिक कॉपर संचय के कारण आनुवांशिक रोग
  24. आइसोग्राफ्ट = आनुवांशिक रूप से समान (जुड़वा) व्यक्तियों के बीच प्रत्यारोपण
  25. लुईस अल्वारेज = उल्कापिंड प्रभाव से डायनासोर विलुप्ति का सिद्धांत
  26. एपेंडिक्स = मनुष्य में अवशेषी अंग
  27. "योग्यतम की उत्तरजीविता" = हर्बर्ट स्पेन्सर का कथन
  28. जेलीफिश = संघ नीडेरिया (Cnidaria)
  29. प्लैटीहेल्मिंथीज = चपटे कृमि; त्रिकोरकी संरचना
  30. आर्थ्रोपोडा = सबसे बड़ा संघ; शरीर सिर, वक्ष, उदर में विभाजित
  31. मधुमक्खी की 5 आंखें हैं (2 मिश्रित + 3 ओसीली)
  32. तितली का जीवन चक्र: अंडा → लार्वा → प्यूपा → वयस्क
  33. टिड्डा के कान उसके पेट पर होते हैं
  34. घोंघा = मोलस्का (अकशेरुकी)
  35. एकाइनोडर्मेटा = कांटेदार त्वचा वाले प्राणी; जल संवहन तंत्र
  36. मगरमच्छ में 4 प्रकोष्ठीय हृदय होता है
  37. मानव का संबंध कुल होमिनिडे से है
  38. घरेलू कुत्ते का वैज्ञानिक नाम = कैनिस ल्यूपस फेमिलेरिस
  39. मार्सूपियल्स बच्चों को थैली में ले जाते हैं (उदाहरण: कंगारू)
  40. मानव के दांत: 8 कृन्तक, 4 रदनक, 8 अग्र चवर्णक, 12 चवर्णक
  41. आयरन हीमोग्लोबिन निर्माण के लिए आवश्यक
  42. WBC = शरीर के सैनिक = ल्यूकोसाइट्स (6,000-8,000/mm³)
  43. रक्त अस्थि मज्जा में उत्पन्न होता है (RBC लाल अस्थि मज्जा से)
  44. 1 ग्लूकोज अणु → श्वसन में 38 ATP
  45. क्रिएटिनिन = मूत्र में रासायनिक अपशिष्ट
  46. मूत्र का पीला रंग = यूरोक्रोम (हीमोग्लोबिन के अपघटन से)
  47. पुतली आंख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है
  48. सेरिबेलम (अनुमस्तिष्क) = मोटर नियंत्रण और संतुलन (छोटा मस्तिष्क)
  49. मीबोमियन ग्रंथि = आंख में (आंसुओं के वाष्पीकरण को रोकती है)
  50. वयस्क मनुष्य = 206 हड्डियां
  51. ऊर्वस्थि (जांघ की हड्डी) = सबसे लंबी और मजबूत हड्डी
  52. प्रोलैक्टिन = स्तनपान के दौरान दूध स्राव के लिए हार्मोन
  53. पिट्यूटरी ग्रंथि = मास्टर ग्रंथि (अन्य अंत:स्रावी ग्रंथियों को नियंत्रित करती है)
  54. इन्सुलिन का स्राव अग्न्याशय से होता है
  55. थाइमस ग्रंथि = फेफड़ों के बीच; प्रतिरक्षा प्रणाली बनाने में मदद
  56. अंडाशय = महिलाओं का प्राथमिक जननांग
  57. थायमीन (B₁) = 1897 में खोजा पहला B विटामिन; कमी = बेरी-बेरी
  58. विटामिन K की कमी = अत्यधिक रक्तस्राव; रक्तस्राव रोधी विटामिन
  59. एस्कॉर्बिक एसिड = विटामिन C; कमी = स्कर्वी
  60. मलेरिया = आनुवांशिक रोग नहीं; प्लाज्मोडियम द्वारा एनाफिलीज मच्छर से
  61. घेंघा (गण्डमाला) = आयोडीन की कमी
  62. टाइफाइड की पहचान विडाल परीक्षण से; साल्मोनेला टाइफी से होता है
  63. चेचक = वैरिसेला-जोस्टर वायरस से
  64. हीमोफोबिया = रक्त का भय
  65. विल्सन रोग = शरीर में अत्यधिक कॉपर
  66. मिर्गी (Epilepsy) = मस्तिष्क से असामान्य विद्युत निर्वहन = दौरे
  67. सिरोसिस = यकृत रोग; असंचारणीय है
  68. BCG टीका = तपेदिक के लिए; कैलमेट और गुएरिन ने खोजा (1921)
  69. पेनिसिलिन कवक से प्राप्त; अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने 1928 में खोजा
  70. DPT टीका = डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टिटनेस के लिए संयुक्त टीका
  71. यीस्ट एक कवक है (मृतोपजीवी); मदिरा और बेकरी उद्योग में उपयोग
  72. लाइकेन = शैवाल और कवक के बीच सहजीवी संबंध; वायु प्रदूषण का सूचक
  73. शैवाल वर्ग: क्लोरोफाइसी (हरी), फियोफाइसी (भूरी), रोडोफाइसी (लाल), सायनोफाइसी (नीले-हरे)
  74. आलू एक तना (कंद) है, जड़ नहीं
  75. प्रकाश संश्लेषण लाल और नीले प्रकाश में सर्वाधिक प्रभावी; हरे प्रकाश में सबसे कम
  76. किण्वन = अवायवीय श्वसन का एक प्रकार
  77. द्वार कोशिकाओं में जल भरने → स्टोमी छिद्र खुलते हैं
  78. नाइट्रोजन स्थिरीकरण = वायुमंडलीय N₂ → अमोनिया; मटर की जड़ों में राइजोबियम जीवाणु
  79. एजोला = धान/चावल की खेती के लिए उर्वरता बढ़ाता है
  80. ब्लाइट = पादप रोग (कवकीय/जीवाणु)
  81. किरीट पिटिका = एग्रोबैक्टेरियम ट्यूमेफेसियन्स बैक्टीरिया से
  82. ड्रोसेरा = कीटभक्षी पौधा (सनड्यू)
  83. वीनस फ्लाईट्रैप = मांसभक्षी पौधा
  84. ऑर्निथोफिली = पक्षियों द्वारा परागण
  85. रेशम के कीड़े शहतूत के पत्ते खाते हैं; प्यूपा अवस्था में तंतु
  86. डॉली = पहला क्लोन जीव; एक भेड़
  87. क्रिस्टियान बर्नार्ड = पहला मानव हृदय प्रत्यारोपण (1967)
  88. एडवर्ड जेनर = चेचक के लिए पहला टीका
  89. अलेक्जेंडर फ्लेमिंग = पेनिसिलिन की खोज (1928)
  90. टाइफ्लोप्स = अंधा सांप (Blind Snake)
  91. बोनसाई = बौने रूप में वृक्षों का संवर्धन
  92. अल्फाल्फा = एक प्रकार का घास (पशुओं के चारे के रूप में)
  93. बेरिएट्रिक सर्जरी = पाचन तंत्र में परिवर्तन (मोटापे का उपचार)
  94. शीतनिद्रा (Hibernation) = सर्दियों में कम चयापचय अवस्था (भालू, कछुए, मेंढक, सांप)
  95. पसीने से दुर्गंध = जीवाणुओं की क्रिया के कारण