एसएससी सीजीएल
अर्थव्यवस्था
भारतीय अर्थव्यवस्था SSC CGL में सर्वाधिक अंक दिलाने वाले विषयों में से एक है। प्रतिवर्ष इस विषय से 4 से 8 प्रश्न सीधे पूछे जाते हैं। राष्ट्रीय आय, बैंकिंग, कराधान, योजना, गरीबी, मुद्रास्फीति और सरकारी योजनाओं से प्रश्न बार-बार आते हैं।
1. अर्थशास्त्र के प्रमुख सिद्धांत
1.1 मूल आर्थिक अवधारणाएं
सहकारिता (Cooperative):
- अनेक व्यक्तियों या संस्थाओं द्वारा किसी समान उद्देश्य की प्राप्ति के लिए मिलकर प्रयास करना ही सहकारिता कहलाती है
- निक्षेप के औपचारिक स्रोतों में सहकारी संस्थाएं शामिल हैं
तुलनात्मक लाभ (Comparative Advantage):
- डेविड रिकार्डो ने सर्वप्रथम यह तर्क दिया कि उच्च घाटे की स्थिति में लोग अधिक बचत करते हैं
- हेक्सर-ओहलिन मॉडल के अनुसार कोई देश वही निर्यात करता है जिसका वह कुशलतापूर्वक और बहुतायत में उत्पादन करता है — यह मॉडल एली हेक्सर और बर्टिल ओहलिन ने दिया
- रिकार्डो की पुस्तक "ऑन द प्रिंसिपल्स ऑफ पॉलिटिकल इकोनॉमी एंड टैक्सेशन" — 1817 में लिखी गई
वास्तविक लागत (Real Cost):
- उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग किए जाने वाले सभी मूर्त संसाधनों (कच्चा माल और श्रम) के मूल्य को वास्तविक लागत कहते हैं
परिवर्ती लागत (Variable Cost):
- जब निर्गमन शून्य के बराबर हो तो, परिवर्ती लागत शून्य होगी
- परिवर्ती लागत उत्पादन स्तर के साथ बदलती है (उदाहरण: बिजली बिल)
- निश्चित लागत तब भी मौजूद रहती है जब उत्पादन शून्य हो (उदाहरण: किराया, वेतन)
अवसर लागत (Opportunity Cost):
- प्रसिद्ध अर्थशास्त्री गॉटफ्रीड हैबरलर ने वास्तविक लागत सिद्धांत का विकल्प प्रस्तुत किया जिसे अवसर लागत सिद्धांत कहते हैं
- इस सिद्धांत के अनुसार वस्तुओं की कीमतें उनकी लागत दशाओं द्वारा होती हैं लेकिन लागत का आशय उत्पादन में निहित श्रम की मात्रा से नहीं बल्कि वैकल्पिक उत्पादन के त्याग से है
लेसेज फेयर (Laissez-Faire):
- लेसेज फेयर सिद्धांत यह मानता है कि आर्थिक व्यवस्था सरकार के संयम या हस्तक्षेप से मुक्त होनी चाहिए
- 18वीं सदी के स्कॉटिश अर्थशास्त्री एडम स्मिथ द्वारा सरकारी हस्तक्षेप को 'अदृश्य हाथ' की संज्ञा दी गई
पश्च वक्र आपूर्ति (Backward-Bending Supply Curve):
- यह श्रम बाजार से संबंधित है
- यह वक्र दर्शाता है कि जब मजदूरी बढ़ती है तो एक सीमा के बाद श्रमिक काम घटाकर अवकाश को प्राथमिकता देते हैं
वृहत अर्थशास्त्र (Macro Economics):
- 'वृहत अर्थशास्त्र' शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम रागनेर फ्रिस्क ने किया था
- वृहत अर्थशास्त्र में वृद्धि, मुद्रास्फीति और बेरोजगारी जैसे समग्र क्रिया-कलापों का योग शामिल होता है
- सूक्ष्म अर्थशास्त्र में व्यक्ति, परिवार और फर्म जैसे व्यक्तिगत अवयवों का अध्ययन
संयुक्त क्षेत्र (Joint Sector):
- संयुक्त क्षेत्र की संकल्पना में सार्वजनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र के उद्योगों के बीच सहयोग आवश्यक होता है
सामान्य संतुलन विश्लेषण:
- वालरस ने 1870 में सामान्य संतुलन सिद्धांत प्रतिपादित किया
- ये फ्रेंच के अर्थशास्त्री थे
परेटो-श्रेष्ठ (Pareto-Optimum):
- विलफ्रेड परेटो — इटली के इंजीनियर, समाजशास्त्री, अर्थशास्त्री और दार्शनिक थे
- इनके अनुसार बिना किसी का नुकसान किए अगर हर व्यक्ति की बेहतरी हो सके तो आर्थिक कल्याण में सुधार हो सकता है — इस स्थिति को परेटो-श्रेष्ठ कहते हैं
लाभ का नवप्रवर्तन सिद्धांत:
- जोसेफ शुम्पीटर ने लाभ का नवप्रवर्तन सिद्धांत दिया
- इन्होंने 1919 में 'ऑस्ट्रियन वित्त मंत्री' के रूप में भी कार्य किया
- इस सिद्धांत के अनुसार जब कोई नया परिवर्तन (खोज) किया जाएगा तो उससे होने वाला लाभ इसके इनाम के रूप में मिलेगा
मैकिंव के अर्थशास्त्र:
- इनके सिद्धांतों के अनुसार किसी देश का मानव जीवनयापन देश के माल और सेवाओं का उत्पादन करने की क्षमता पर निर्भर करता है
टपकन सिद्धांत (Trickle Down Theory):
- टपकन सिद्धांत आय वितरण पर आर्थिक वृद्धि के प्रभाव को नजर अंदाज करता है
- यह सिद्धांत आय एवं धन के वितरण की असमानताओं में कमी करने का प्रयास करता है
बाजार अर्थव्यवस्था:
- बाजार अर्थव्यवस्था वह होती है जिसमें किसी वस्तु का मूल्य बाजार शक्तियों (मांग और पूर्ति) द्वारा होता है
- यह सरकारी नियंत्रण से मुक्त होती है — पूंजीवादी अर्थव्यवस्था को बाजार अर्थव्यवस्था कह सकते हैं
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — अर्थशास्त्र के सिद्धांत
- तुलनात्मक लाभ सिद्धांत: डेविड रिकार्डो
- अवसर लागत सिद्धांत: गॉटफ्रीड हैबरलर
- 'वृहत अर्थशास्त्र' शब्द: रागनेर फ्रिस्क
- 'अदृश्य हाथ': एडम स्मिथ
- सामान्य संतुलन विश्लेषण: वालरस (1870)
- परेटो-श्रेष्ठ: विलफ्रेड परेटो
- लाभ का नवप्रवर्तन: जोसेफ शुम्पीटर
- पश्च वक्र आपूर्ति: श्रम बाजार
- टपकन सिद्धांत: आय वितरण नजर अंदाज करता है
- लेसेज फेयर: सरकारी नियंत्रण से मुक्त अर्थव्यवस्था
2. राष्ट्रीय आय एवं मापन
2.1 प्रमुख अवधारणाएं
वैयक्तिक आय (Personal Income):
- वैयक्तिक आयकरों की कटौती से पहले सभी स्रोतों से व्यक्तियों द्वारा अर्जित कुल आय को वैयक्तिक आय कहते हैं
राष्ट्रीय आय:
- भारत की राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय की गणना का प्रथम प्रयास दादाभाई नौरोजी ने वर्ष 1867–68 में किया था
- इनके अनुसार 1868 में प्रति व्यक्ति आय ₹20 थी जबकि 2020 में ₹1,08,620
- राष्ट्रीय आय = वैयक्तिक आय / कुल जनसंख्या (प्रति व्यक्ति आय देता है)
- भारत की राष्ट्रीय आय का संकलन केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन (CSO) — अब MoSPI करता है
GDP अपस्फीतिकारक (GDP Deflator):
- GDP अपस्फीतिकारक = (सांकेतिक GDP / वास्तविक GDP) × 100
- यह अर्थव्यवस्था में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को मापता है
- इसे अंतर्निहित मूल्य डिफ्लेटर भी कहते हैं
शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNP):
- NNP = GNP – मूल्यह्रास
- NNP को शुद्ध राष्ट्रीय आय भी कहते हैं
सकल निवेश:
- शुद्ध निवेश + मूल्यह्रास = सकल निवेश
GNP (सकल राष्ट्रीय उत्पाद):
- GNP = GDP + (X – M)
- जहां X = देशवासियों द्वारा विदेशों में अर्जित आय; M = विदेशियों द्वारा देश में अर्जित आय
प्रति व्यक्ति आय:
- प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय / कुल जनसंख्या
- इसे औसत आय भी कहते हैं
मूल्यह्रास (Depreciation):
- पूंजीगत वस्तुओं (मशीन, भवन) की टूट-फूट के लिए एक वार्षिक भत्ता
- मूल्यह्रास जारी (चल रहे) कार्य, भूमि या तैयार माल पर लागू नहीं होता
मध्यवर्ती वस्तु (Intermediate Goods):
- अंतिम वस्तु बनाने के लिए उद्योगों के बीच बेची जाने वाली वस्तु मध्यवर्ती वस्तु है
- इन्हें पुनर्विक्रय या अन्य वस्तुओं के उत्पादन के लिए उद्योग एक दूसरे को बेचते हैं
राष्ट्रीय आय की तीन विधियां:
- आय विधि — सभी आयों का योग
- व्यय विधि — सभी व्ययों का योग
- उत्पाद/मूल्य वर्धित विधि — प्रत्येक स्तर पर मूल्य वर्धन
2.2 औद्योगिक क्षेत्र का योगदान
- 1950–51 में GDP में औद्योगिक क्षेत्र का योगदान: 11.8%
- आर्थिक समीक्षा 2022–23 के अनुसार:
- सेवा क्षेत्र: 53.66%
- औद्योगिक क्षेत्र: 29.02%
- कृषि क्षेत्र: 17.32%
- वर्ष 2020–21 में GDP में निर्यात का सर्वाधिक हिस्सा: इंजीनियरिंग वस्तुओं का
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — राष्ट्रीय आय
- NNP = GNP – मूल्यह्रास
- GNP = GDP + विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय
- प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय ÷ जनसंख्या
- पहली बार राष्ट्रीय आय गणना: दादाभाई नौरोजी (1867–68)
- राष्ट्रीय आय संकलन: CSO / MoSPI
- GDP डिफ्लेटर = (सांकेतिक GDP / वास्तविक GDP) × 100
- 1950–51 में औद्योगिक क्षेत्र का GDP में हिस्सा: 11.8%
- तीन विधियां: आय, व्यय, मूल्य वर्धित
3. गरीबी एवं बेरोजगारी
3.1 परिभाषा और माप
मुख्य कामगार:
- मानक जनगणना परिभाषा के अनुसार जो व्यक्ति वर्ष में कम से कम 183 दिन (6 माह) कार्य में संलग्न है उसे भारत में मुख्य कामगार माना जाता है
- 183 दिन से कम काम करने वाले को सीमांत श्रमिक कहते हैं
बेरोजगारी के प्रकार:
- मौसमी बेरोजगारी — मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों में (कृषि मौसमी है)
- शिक्षित बेरोजगारी — मुख्यतः शहरी क्षेत्रों में — शिक्षित लोग अपनी दक्षता के अनुसार नौकरी नहीं पा पाते
- छिपी हुई बेरोजगारी — मुख्यतः कृषि क्षेत्र में — देखने में तो रोजगारपरक लगते हैं लेकिन सीमांत उत्पादकता शून्य (अवधारणा श्रीमती जॉन राबिन्सन ने दी)
- चक्रीय बेरोजगारी — आर्थिक मंदी के दौरान
- खुली बेरोजगारी — जो प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देती है
3.2 गरीबी रेखा
- 2011–12 के लिए राष्ट्रीय गरीबी रेखा का प्राक्कलन तेंदुलकर समिति ने किया:
- ग्रामीण क्षेत्र: ₹816 प्रति व्यक्ति प्रतिमाह
- शहरी क्षेत्र: ₹1,000 प्रति व्यक्ति प्रतिमाह
राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) 2021:
- नीति आयोग द्वारा नवंबर 2021 में जारी
- तीन आयाम: स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर
- 12 संकेतक: पोषण, बाल मृत्युदर, मातृ स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल उपस्थिति, खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता, विद्युत, आवास, पेयजल, संपत्ति और बैंक खाते
- MPI 2021 के अनुसार बिहार सबसे गरीब राज्य
- शहरी क्षेत्रों में 8.81% लोग गरीब हैं (MPI 2021)
महंगाई भत्ता:
- भारत में सरकारी कर्मचारियों हेतु महंगाई भत्ता तय करने का आधार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) है
- CPI श्रम ब्यूरो (श्रम मंत्रालय) द्वारा प्रकाशित किया जाता है
लारेन्ज वक्र (Lorenz Curve):
- लारेन्ज वक्र के माध्यम से आय वितरण को दर्शाया जाता है
- यह कुल आय व आय प्राप्तकर्ताओं के मध्य व्याप्त विषमता को दर्शाता है
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — गरीबी और बेरोजगारी
- मुख्य कामगार: न्यूनतम 183 दिन/वर्ष
- छिपी बेरोजगारी अवधारणा: श्रीमती जॉन राबिन्सन
- छिपी बेरोजगारी: कृषि क्षेत्र में
- मौसमी बेरोजगारी: ग्रामीण क्षेत्र
- शिक्षित बेरोजगारी: शहरी क्षेत्र
- तेंदुलकर समिति ग्रामीण (2011–12): ₹816/माह
- MPI 2021 सबसे गरीब राज्य: बिहार
- DA का आधार: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI)
- लारेन्ज वक्र दर्शाता है: आय वितरण
- MPI जारी करता है: नीति आयोग
4. मांग एवं मांग की लोच
4.1 मांग की प्रमुख अवधारणाएं
बजट रेखा:
- बजट रेखा वह ग्राफ है जो दो वस्तुओं के उन सभी संयोजनों को दर्शाता है जिसे एक उपभोक्ता किसी बाजार मूल्य पर और आर्थिक दृष्टि से आय के विशेष आय स्तर के भीतर खर्च कर सकते हैं
स्थानापन्न उत्पाद:
- जब स्थानापन्न उत्पादों की कीमत में वृद्धि होती है तो मांग वक्र रेखा बाहर की ओर खिसकेगी
- उदाहरण: चाय एवं कॉफी, गुड़ एवं चीनी
व्युत्पन्न मांग (Derived Demand):
- जब किसी एक वस्तु की मांग से दूसरी वस्तु की सेवा की मांग उत्पन्न होती है तो वह मांग व्युत्पन्न मांग कहलाती है
- उदाहरण: मोबाइल की बैटरी, लीथियम आयन बैटरी
उत्कृष्ट माल (Superior/Normal Goods):
- जब बढ़ती हुई आय के साथ-साथ किसी वस्तु की मांग बढ़ती है तो ऐसी वस्तु को उत्कृष्ट वस्तु कहते हैं
- निकृष्ट वस्तुएं बढ़ती आय के साथ विलोमानुपाती संबंध रखती हैं
मांग में वृद्धि का प्रभाव:
- एक वस्तु के लिए मांग में वृद्धि के कारण वस्तु के संतुलन कीमत में बढ़त होगी और संतुलन मात्रा में बढ़त होगी
मांग में कमी और आपूर्ति में वृद्धि:
- मांग में कमी और आपूर्ति में वृद्धि के प्रभाव में उत्पादों का संतुलन मूल्य घट जाएगा
4.2 डंपिंग (Dumping)
- अर्थशास्त्र में डंपिंग का मतलब किसी भी प्रकार के अत्यधिक कम मूल्य निर्धारण से है
- डंपिंग की एक मानक तकनीकी परिभाषा — किसी वस्तु के लिए घरेलू बाजार में ली जाने वाली कीमत की तुलना में उसी वस्तु के लिए एक विदेशी बाजार में कम कीमत लेने की एक कोशिश है
4.3 मुद्रा का अवमूल्यन (Devaluation)
- यदि कोई देश अपनी मुद्रा का अवमूल्यन करता है तो निर्यात सस्ता तथा आयात महंगा हो जाता है
- उदाहरण: विनिमय दर $1 = ₹55 से बढ़कर $1 = ₹60 हो जाती है → भारतीय रुपए का अवमूल्यन हुआ है
4.4 क्रय शक्ति समता (PPP)
- लचीली विनिमय दर प्रणाली में विनिमय दरों के बारे में लंबी अवधि की भविष्यवाणी करने के लिए क्रय शक्ति समता सिद्धांत का उपयोग किया जाता है
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — मांग
- बजट रेखा दर्शाती है: दो वस्तुओं के संयोजन आय के भीतर
- व्युत्पन्न मांग उदाहरण: मोबाइल बैटरी (मोबाइल की मांग से)
- मांग घटे और पूर्ति बढ़े: संतुलन मूल्य घटेगा
- उत्कृष्ट वस्तुएं: आय बढ़ने पर मांग बढ़ती है
- डंपिंग = विदेशी बाजार में सीमांत लागत से कम पर बिक्री
- अवमूल्यन से: निर्यात सस्ता, आयात महंगा
5. आर्थिक विकास एवं आर्थिक क्षेत्रक
5.1 अर्थव्यवस्था के तीन क्षेत्रक
| क्षेत्रक | गतिविधियां | उदाहरण |
|---|---|---|
| प्राथमिक क्षेत्र | कृषि, वानिकी, पशुपालन, मत्स्यपालन, मधुमक्खी पालन, खनन | खेती, मछली पालन |
| द्वितीयक क्षेत्र | उद्योग, विनिर्माण एवं विनिर्माण क्षेत्र | चीनी उद्योग, कपड़ा उद्योग |
| तृतीयक क्षेत्र | सेवा क्षेत्र | बैंकिंग, बीमा, परिवहन, टयूशन व्यवसाय, कॉल सेंटर |
महत्वपूर्ण बिंदु: मधुमक्खी पालन प्राथमिक क्षेत्र में आता है — तृतीयक में नहीं।
व्यापार (Trading): वस्तुओं का आयात-निर्यात तृतीयक क्रियाकलाप है।
कृषि — भारत में सर्वाधिक लोगों को रोजगार देती है — लगभग 40% कामकाजी आबादी।
मानव विकास सूचकांक (HDI):
- HDI किन तीन क्षेत्रों में विकास का मापक है: स्वास्थ्य, शिक्षा, आमदनी
- 1990 में पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक तथा भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन द्वारा शुरू किया गया
चतुर्थ क्षेत्रक:
- चतुर्थ सेवा क्षेत्र के अंतर्गत सूचना आधारित तथा अनुसंधान व विकास आधारित क्रियाकलापों को सम्मिलित किया जाता है
परीक्षा तथ्य — आर्थिक विकास
- मधुमक्खी पालन: प्राथमिक क्षेत्र
- व्यापार: तृतीयक क्षेत्र
- भारत में सर्वाधिक रोजगार: कृषि (~40%)
- HDI मापक: स्वास्थ्य, शिक्षा, प्रति व्यक्ति आय
- HDI शुरू किया: महबूब उल हक और अमर्त्य सेन (1990)
6. करारोपण (Taxation)
6.1 करों के प्रकार
प्रत्यक्ष कर (Direct Tax):
- वह कर जिसे सीधे जनता से लिया जाता है
- उदाहरण: आयकर, निगमकर, सम्पत्ति कर, पूंजीलाभ कर, उपहार कर
अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax):
- वह कर जिसे सीधे जनता से नहीं लिया जाता किंतु जिसका बोझ प्रकारांतर से उसी पर पड़ता है
- उदाहरण: वस्तु एवं सेवा कर (GST), सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क, बिक्री कर
- GST एक अप्रत्यक्ष कर है
वस्तु एवं सेवा कर (GST):
- भारतीय संविधान के 101वें संशोधन अधिनियम 2016 द्वारा GST लागू किया गया
- GST परिषद: अनुच्छेद 279A जोड़कर गठित की गई
- GST परिषद के अध्यक्ष: केंद्रीय वित्त मंत्री
- इसका सुझाव विजय केलकर समिति ने दिया था
- GST काउंसिल ने निम्नलिखित प्रकार के कर स्लैब निर्धारित किए हैं: 0%, 5%, 12%, 18% और 28%
मूल्य वर्धित कर (VAT):
- VAT सबसे पहले 1954 में फ्रांस में लागू किया गया
- भारत में VAT 1 अप्रैल, 2005 से लागू किया गया
- सबसे पहले हरियाणा में और सबसे बाद में उत्तर प्रदेश में लागू
ऑक्ट्रोई (Octroi):
- किसी नगर निगम या जिलों में खपत होने वाले सामानों को ले जाने पर स्थानीय निकाय द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स
- मुंबई में 2013 में बंद, पुनः 2014 में लागू
CENVAT:
- CENVAT = केंद्रीय उत्पाद शुल्क से संबंधित है
- 2000–2001 में लागू; MODVAT का स्थान लिया
प्रगामी कर (Progressive Tax):
- प्रगामी कर भारत में आर्थिक विषमता को कम करने में सहायक होता है
- प्रगामी कर में — कर योग्य राशि बढ़ने पर कर की दर उत्तरोत्तर बढ़ती जाती है
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — करारोपण
- GST: एक अप्रत्यक्ष कर
- GST: 101वें संवैधानिक संशोधन, 2016
- GST लागू: 1 जुलाई 2017
- GST परिषद के अध्यक्ष: केंद्रीय वित्त मंत्री
- VAT भारत में: 1 अप्रैल 2005 (पहले हरियाणा में)
- आर्थिक विषमता कम करने वाला कर: प्रगामी कर
- केंद्रीय कर उदाहरण: आयकर, सीमा शुल्क, निगमकर
- CENVAT = केंद्रीय उत्पाद शुल्क
- GST कर स्लैब: 0%, 5%, 12%, 18%, 28%
7. मुद्रा एवं बैंकिंग
7.1 भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
- हिल्टनयंग कमीशन ने 1926 में केंद्रीय बैंक की स्थापना की सिफारिश की थी
- 1931 में भारतीय केंद्रीय बैंकिंग जांच समिति ने भी RBI की स्थापना की सिफारिश की
- भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम 1934 पारित किया गया
- RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई
- RBI का राष्ट्रीयकरण 1 जनवरी 1949 को हुआ
- मुख्यालय: मुंबई
- प्रथम भारतीय गवर्नर: सी.डी. देशमुख (11 अगस्त 1943 से 30 जून 1949)
- वर्तमान (25वें) गवर्नर: शक्तिकांत दास
RBI के मुख्य कार्य:
- मौद्रिक नीति बनाना एवं लागू करना
- विदेशी मुद्रा का प्रबंधन करना
- भारत सरकार का बैंकर और भारत के अन्य बैंकों के बैंकर के रूप में कार्य करना
- भारतीय मुद्रा की साख को नियंत्रित करना
- मुद्रा जारी करना और उसका विनियमन करना एवं परिचालन के योग्य न रहने पर उन्हें नष्ट करना
RBI का लेखा वर्ष: 1 जुलाई से 30 जून (31 मार्च 2021 से 1 अप्रैल से 31 मार्च)
7.2 मौद्रिक नीति के उपकरण
रेपो दर:
- वह दर जिस पर वाणिज्यिक बैंक RBI से ऋण लेते हैं
- यदि RBI रेपो दर बढ़ाता है → मुद्रास्फीति घटेगी
- रेपो दर कम होने पर बैंकों के लिए RBI से कर्ज लेना सस्ता हो जाता है
रिवर्स रेपो दर:
- वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों से ऋण लेता है
- रिवर्स रेपो दर बढ़ाने से अर्थव्यवस्था में तरलता की कमी आएगी → मुद्रास्फीति में नियंत्रण होगा
ऋण/उधार को हतोत्साहित करने के लिए:
- केंद्रीय बैंक बैंक दर बढ़ा सकता है
- SLR में कमी कर सकता है
- खुले बाजार में प्रतिभूतियां खरीद सकता है
- CRR घटा सकता है
SLR (सांविधिक तरलता अनुपात):
- बैंकों को अपनी मांग एवं सावधि जमाओं का कुछ प्रतिशत भाग नकद, स्वर्ण व मान्यता प्राप्त सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में सदा अपने पास रखना आवश्यक होता है
- SLR में कमी किये जाने से बैंकों को अपनी जमाओं का अपेक्षाकृत कम भाग अपने पास रखना अनिवार्य होगा → उधार देने के लिए अधिक राशि उपलब्ध
- RBI इस दर को अधिकतम 40 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है
CRR (नकद आरक्षित अनुपात):
- वह राशि है जो बैंकों द्वारा भारतीय रिज़र्व बैंक के पास अनिवार्य रूप से रखनी होती है
- जिसकी गणना शुद्ध मांग और समय देनदारियों के आधार पर की जाती है
- यदि रिज़र्व बैंक CRR अनुपात कम करती है तो ऋण सृजन बढ़ जाएगा
7.3 NABARD
- NABARD = राष्ट्रीय कृषि तथा ग्रामीण विकास बैंक (National Bank for Agriculture and Rural Development)
- शिवरामन समिति की सिफारिश पर 12 जुलाई, 1982 में नाबार्ड की स्थापना हुई
- मुख्यालय: मुंबई
- उद्देश्य: कृषि एवं ग्रामीण विकास हेतु वित्त उपलब्ध कराने वाली शीर्ष संस्था
7.4 मुद्रा के कार्य
मुद्रा से अभिप्राय कोई भी वस्तु जो सामान्य रूप से:
- (A) मूल्य के भंडार के रूप में प्रयुक्त
- (B) मूल्य के माप के रूप में प्रयुक्त
- (C) विनिमय के माध्यम के रूप में प्रयुक्त
- तीनों A, B और C मुद्रा के कार्य हैं
7.5 मुद्रा आपूर्ति के माप
| माप | घटक |
|---|---|
| M1 (संकीर्ण मुद्रा) | जनता के पास मुद्रा + जनता का जमा धन |
| M2 | M1 + डाकघर बचत बैंकों के पास बचत जमा |
| M3 (सकल मौद्रिक संसाधन) | M1 + वाणिज्यिक बैंकों की निवल सावधि जमा |
| M4 | M3 + डाकघर बचत संगठनों के पास कुल जमा (राष्ट्रीय बचत प्रमाण-पत्र को छोड़कर) |
7.6 अन्य बैंकिंग तथ्य
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs):
- भारत सरकार का हिस्सा: 50%; प्रायोजक बैंकों का: 35%; संबंधित राज्यों का: 15%
- नरसिंहम समिति की सिफारिश पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक अधिनियम, 1976 के तहत स्थापना
- सिक्किम व गोवा को छोड़कर सभी राज्यों में कार्यरत
RBI केंद्रीय निदेशक मंडल: 4 वर्षों की अवधि के लिए नियुक्ति
अनुसूचित बैंक:
- वह बैंक जो RBI अधिनियम 1934 की योग्यता प्राप्त करने के लिए बैंक की चुकता पूंजी और जुटाई गई धनराशि कम से कम ₹5 लाख होनी चाहिए
बैंकों का राष्ट्रीयकरण:
- प्रथम चरण: 17 जुलाई 1969 — 14 बड़े व्यावसायिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण
- द्वितीय चरण: 15 अप्रैल 1980 — 6 अन्य बैंकों का राष्ट्रीयकरण
- वर्तमान में: 12 राष्ट्रीयकृत बैंक (2022); 9 निजी बैंक
प्रधान उधार दर (PLR):
- बैंकों द्वारा अपने सबसे बड़े, सबसे सुरक्षित और सबसे अधिक क्रेडिट वाले ग्राहकों से वसूले जाने वाले अल्पकालिक ऋण पर ब्याज दर
RBI ने रुपए के प्रतीक को अपनाया:
- वर्ष 2010 में (डिजाइन: उदय कुमार)
भारत का पहला विकास बैंक:
- IDBI — स्थापना 1 जुलाई 1964 को
- मुख्यालय: मुंबई
बैंक ऑफ बड़ोदा विलय:
- विजया बैंक और देना बैंक का BOB में समामेलन: 1 अप्रैल 2019 से
- BOB भारत का तीसरा सबसे बड़ा बैंक बन गया
BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज):
- भारत का और एशिया का भी सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज
- 1875 में प्रेमचंद रायचंद ने स्टॉक एक्सचेंज मुंबई के नाम से स्थापित
- 2002 में बदलकर BSE किया गया
- NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) की स्थापना 1992 में
अंतिम उधारदाता (Lender of Last Resort):
- केंद्रीय बैंक को "द लेंडर ऑफ द लास्ट रिसोर्ट" (अंतिम उधारदाता) कहा जाता है
- भारत में: RBI अंतिम उधारदाता है
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — मुद्रा और बैंकिंग
- RBI स्थापना: 1 अप्रैल 1935
- RBI राष्ट्रीयकरण: 1 जनवरी 1949
- RBI मुख्यालय: मुंबई
- प्रथम भारतीय गवर्नर: सी.डी. देशमुख
- NABARD स्थापना: 12 जुलाई 1982 (शिवरामन समिति)
- बैंक राष्ट्रीयकरण चरण 1: 17 जुलाई 1969 (14 बैंक)
- बैंक राष्ट्रीयकरण चरण 2: 15 अप्रैल 1980 (6 बैंक)
- RBI लेखा वर्ष (वर्तमान): 1 अप्रैल से 31 मार्च
- BSE स्थापना: 1875
- NSE स्थापना: 1992
- रुपए प्रतीक: 2010
- रेपो दर = बैंक RBI से उधार लेते हैं
- CRR की गणना: शुद्ध मांग और समय देनदारियों पर
- M3 = M1 + वाणिज्यिक बैंकों की निवल सावधि जमा
- भारत में अंतिम उधारदाता: RBI
8. मुद्रास्फीति (Inflation)
8.1 मूल्य परिवर्तन के प्रकार
मुद्रास्फीति:
- किसी अर्थव्यवस्था में सामान्य मूल्य स्तर में निरंतर वृद्धि को मुद्रास्फीति कहा जाता है
- मुद्रास्फीति में मुद्रा का मूल्य गिरता है तथा कीमतें बढ़ती हैं
- सीमित एवं नियंत्रित मुद्रास्फीति अल्पविकसित अर्थव्यवस्था हेतु लाभदायक होती है
- किंतु सीमा से अधिक मुद्रास्फीति हानिकारक है
अस्फीति (Deflation):
- मूल्य स्तर में निरंतर गिरावट
मुद्रास्फीतिजनित मंदी (Stagflation):
- मुद्रास्फीति और मंदी का संयोजन
मुद्रा का अवमूल्यन:
- जब किसी देश की मुद्रा का किसी अन्य देश की मुद्रा की तुलना में मूल्य कम कर दिया जाए
- उदाहरण: विनिमय दर ₹55 = $1 से बढ़कर ₹60 = $1 → भारतीय रुपए का अवमूल्यन हुआ
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — मुद्रास्फीति
- मूल्य स्तर में निरंतर वृद्धि: मुद्रास्फीति
- मूल्य स्तर में निरंतर गिरावट: अस्फीति
- मुद्रास्फीति में मुद्रा का मूल्य: गिरता है
- नियंत्रित मुद्रास्फीति: अल्पविकसित अर्थव्यवस्था के लिए लाभदायक
- ₹55 → ₹60 प्रति डॉलर = भारतीय रुपए का: अवमूल्यन
9. बीमा तथा पूंजी बाजार
9.1 IRDAI
- IRDAI = भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण
- IRDAI अधिनियम, 1999 के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में गठित
- मुख्य उद्देश्य: पॉलिसी धारकों के हितों की रक्षा, बीमा उद्योग का त्वरित और व्यवस्थित विकास
9.2 शेयर बाजार
BSE:
- भारत का और एशिया का भी सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज (1875)
रिलायंस इंडस्ट्रीज:
- ₹10 लाख करोड़ का बाजार पूंजीकरण छूने वाली पहली भारतीय कंपनी (नवंबर 2019)
श्रेष्ठ प्रतिभूतियां:
- श्रेष्ठ प्रतिभूतियां सरकार द्वारा जारी प्रतिभूतियां हैं
वॉल स्ट्रीट क्रैश (1929):
- वॉल स्ट्रीट में शेयर मूल्य अत्यधिक गिर जाने से अमेरिका में महामंदी की स्थिति उत्पन्न हो गई थी
- सन् 1929–1939 का समय महामंदी के रूप में जाना जाता है
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — बीमा और पूंजी बाजार
- IRDAI स्थापना: 1999 (IRDAI Act 1999)
- BSE स्थापना: 1875 (एशिया का सबसे पुराना)
- NSE स्थापना: 1992
- श्रेष्ठ प्रतिभूतियां = सरकार द्वारा जारी
- ₹10 लाख करोड़ पहली कंपनी: रिलायंस इंडस्ट्रीज (2019)
- महामंदी काल: 1929–1939 (वॉल स्ट्रीट क्रैश)
10. फर्म एवं बाजार
10.1 बाजार संरचनाएं
| प्रकार | विवरण |
|---|---|
| एकाधिकार (Monopoly) | एक विक्रेता, अनेक क्रेता |
| अल्पाधिकार (Oligopoly) | कुछ विक्रेता और कुछ क्रेता |
| एकक्रेता बाजार (Monopsony) | अनेक विक्रेता, एक क्रेता |
| पूर्ण प्रतियोगिता | अनेक विक्रेता, अनेक क्रेता |
एकक्रेता बाजार (Monopsony):
- अर्थव्यवस्था की वह स्थिति जिसमें कई विक्रेता होते हैं जबकि खरीददार (क्रेता) एक ही होता है
- अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के कारण वस्तुओं की कीमत अत्यंत कम होती है
पूर्ण प्रतियोगिता:
- पूर्ण स्पर्धा वाले बाजार में बाजार कीमतों को एक फर्म नियंत्रित करने में असमर्थ रहता है
- इसका कारण — 'व्यक्तिगत फर्मों' के 'मध्य विरोधाभाष' अनुपस्थित रहता है
विदेशी प्रत्यक्ष निवेश बनाम पोर्टफोलियो निवेश:
- पोर्टफोलियो निवेश — FIIs के माध्यम से शेयर, ऋण पत्र, बॉन्ड आदि का क्रय — असुरक्षित माना जाता है
- FIIs को SEBI में पंजीकृत होना आवश्यक होता है
- पोर्टफोलियो निवेश की प्रकृति अस्थायी होती है — बाजार में उथल-पुथल की स्थिति में इसमें पूंजी पलायन का भय बना रहता है
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — फर्म और बाजार
- एकक्रेता बाजार: अनेक विक्रेता, एक क्रेता
- पूर्ण प्रतियोगिता: अनेक क्रेता, अनेक विक्रेता
- पूर्ण प्रतियोगिता में: फर्म कीमत नियंत्रित नहीं कर सकती
- पोर्टफोलियो निवेश (FIIs): असुरक्षित/अस्थायी
- घाटा बजट: जब सरकार का व्यय > राजस्व
11. भारत में नियोजन एवं योजनाएं
11.1 पंचवर्षीय योजनाएं
| योजना | अवधि | ध्यान केंद्र | प्रधानमंत्री | मॉडल |
|---|---|---|---|---|
| पहली | 1951–56 | कृषि | जवाहरलाल नेहरू | हैरोड-डोमर मॉडल |
| दूसरी | 1956–61 | उद्योग और औद्योगिक आधार | जवाहरलाल नेहरू | महालनोबिस मॉडल |
| तीसरी | 1961–66 | आत्मनिर्भरता | जवाहरलाल नेहरू | — |
| चौथी | 1969–74 | स्थिरता के साथ विकास | इंदिरा गांधी | — |
| पांचवीं | 1974–79 | गरीबी और आत्मनिर्भरता | इंदिरा गांधी | डी.पी.धर मॉडल |
| सातवीं | 1985–90 | जवाहर रोजगार योजना | राजीव गांधी | — |
| दसवीं | 2002–07 | 8% GDP विकास लक्ष्य | अटल बिहारी वाजपेयी | — |
| ग्यारहवीं | 2007–12 | समावेशी विकास | मनमोहन सिंह | — |
| बारहवीं | 2012–17 | तेज, अधिक समावेशी, धारणीय विकास | मनमोहन सिंह | — |
महत्वपूर्ण नियोजन तथ्य:
- पहली पंचवर्षीय योजना प्रारंभ: 1 अप्रैल 1951
- पहली योजना का मुख्य लक्ष्य: कृषि का विकास
- दूसरी पंचवर्षीय योजना में उद्योगों और औद्योगिक आधार के विकास पर बल — महालनोबिस मॉडल पर आधारित; पी.सी. महालनोबिस ने दूसरी पंचवर्षीय योजना के ढांचे की संकल्पना की थी
- पी.सी. महालनोबिस को भारत में सांख्यिकी का जनक माना जाता है
- डी.पी.धर मॉडल — पांचवीं पंचवर्षीय योजना तैयार और प्रारंभ की गई थी
- हैरोड-डोमर मॉडल (बचत और निवेश) — पहली योजना इस पर आधारित थी
- जवाहर रोजगार योजना: सातवीं पंचवर्षीय योजना में शुरू
- नीति आयोग ने 2015 से पंचवर्षीय योजनाओं को 15 साल के विजन डॉक्यूमेंट में बदला
- आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992–97) में उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) अपनाया गया — PM पी.वी. नरसिम्हा राव के नेतृत्व में
औद्योगिक नीति संकल्प 1956:
- उद्योगों को 'तीन' श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया:
- अनुसूची A — सार्वजनिक क्षेत्र (17 उद्योग)
- अनुसूची B — मिश्रित क्षेत्र (12 उद्योग)
- अनुसूची C — केवल इसमें निजी उद्योग
11.2 महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएं
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना:
- प्रारंभ: 8 अप्रैल 2015
- ऋण देने की अधिकतम अनुमेय राशि: ₹10 लाख
- तीन प्रकार:
- शिशु ऋण — ₹50,000 तक
- किशोर ऋण — ₹50,001 से 5 लाख तक
- तरुण ऋण — ₹5,00,001 से 10 लाख तक
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY):
- प्रारंभ: 9 मई 2015
- पात्र आयु: 18 से 50 वर्ष
- वार्षिक प्रीमियम: ₹330
- बीमा कवर: ₹2 लाख (मृत्यु पर)
प्रधानमंत्री जन-धन योजना:
- प्रारंभ: 28 अगस्त 2014
- संबंधित: वित्तीय सेवाएं (बैंकिंग/बचत खाते, विप्रेषण, ऋण, बीमा, पेंशन)
आयुष्मान भारत योजना:
- प्रारंभ: 14 अप्रैल 2018
- स्वास्थ्य बीमा कवर: ₹5 लाख प्रति परिवार प्रति वर्ष
- लाभार्थी: 10.74 करोड़ ग्रामीण एवं शहरी परिवार
- विश्व की सबसे बड़ी 'सरकारी' वित्त पोषित स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम
PM AASHA:
- 3 घटक: मूल्य समर्थन योजना, मूल्य न्यूनता भुगतान योजना, निजी खरीद एवं स्टॉकिंग योजना
AMRUT:
- प्रारंभ: 2015
- प्राथमिकता क्षेत्र: सीवरेज के बाद जलापूर्ति
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना:
- प्रारंभ: जुलाई 2015
मिशन इंद्रधनुष:
- प्रारंभ: 25 दिसंबर 2014 (स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय)
- 7 रोगों के खिलाफ 7 टीकों का प्रतिनिधित्व करता है: तपेदिक, पोलियो, हेपेटाइटिस बी, डिप्थीरिया, पर्टुसिस, टेटनस और खसरा
- बाद में खसरा रूबेला, रोटावायरस, हिमोफिलस, इन्फ्लूएंजा टाइप-बी और पोलियो के खिलाफ टीकों को शामिल करने के बाद इन टीकों की संख्या 12 हो गई है
कुटीर ज्योति योजना:
- प्रारंभ: 1988–89 में
- लक्ष्य: गरीबी रेखा से नीचे के ग्रामीण परिवारों को बिजली देना
स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना:
- पुनर्गठित होकर: राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बनी
- 3 जून 2011 को राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से शुरुआत
मध्याह्न भोजन योजना:
- प्रारंभ: 15 अगस्त 1995 — मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा
- पहला राज्य: तमिलनाडु
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना:
- आधिकारिक शुभारंभ: 15 फरवरी 2019 (अहमदाबाद, गुजरात) — PM नरेंद्र मोदी
- पात्र आयु: 18 से 40 वर्ष; मासिक आय: ≤ ₹15,000
UDAN:
- UDAN = उड़े देश का आम नागरिक
- प्रारंभ: अक्टूबर 2016 — नागर विमानन मंत्रालय द्वारा
- क्षेत्रीय हवाई यातायात कनेक्टिविटी योजना
राष्ट्रीय निवेश कोष (NIF):
- 2015–16 के केंद्रीय बजट में भारत के पहले संप्रभु धन कोष की घोषणा
मेक इन इंडिया:
- प्रारंभ: 25 सितंबर 2014
- क्रियान्वयन: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (2020 तक)
मिशन इंद्रधनुष 2.0:
- 2 दिसंबर 2019 — 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 272 जिलों में पूर्ण टीकाकरण
संकल्प परियोजना:
- AIDS (HIV) समाप्त करने के लिए शुरू — ESIC और हिंदुस्तान लेटेक्स फेमिली प्लानिंग प्रमोशन ट्रस्ट द्वारा
हिमायत योजना:
- जम्मू-कश्मीर में बेरोजगार युवकों के लिए प्रशिक्षण व नियोजन कार्यक्रम (2011 में शुरू)
खादी और ग्रामोद्योग आयोग:
- KVIC अधिनियम: 1956 में पारित
- मुख्यालय: मुंबई; MSME मंत्रालय के अधीन
- पहला रेशम प्रसंस्करण संयंत्र: सुरेंद्रनगर, गुजरात
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — नियोजन और योजनाएं
- पहली पंचवर्षीय योजना: 1 अप्रैल 1951
- दूसरी योजना: महालनोबिस मॉडल
- पहली योजना: हैरोड-डोमर मॉडल
- LPG सुधार: आठवीं योजना (1992–97)
- योजना आयोग की जगह: नीति आयोग (2015)
- PM मुद्रा अधिकतम ऋण: ₹10 लाख
- PM जन धन योजना: 28 अगस्त 2014
- आयुष्मान भारत: ₹5 लाख/परिवार/वर्ष
- पहला मध्याह्न भोजन राज्य: तमिलनाडु
- PM जीवन ज्योति कवर: ₹2 लाख (वार्षिक प्रीमियम ₹330)
- UDAN: उड़े देश का आम नागरिक (अक्टूबर 2016)
- मेक इन इंडिया: 25 सितंबर 2014
- मिशन इंद्रधनुष: 25 दिसंबर 2014
- KVIC अधिनियम: 1956
- जवाहर रोजगार योजना: सातवीं योजना
12. जनसंख्या एवं नगरीकरण
12.1 जनगणना 2011 के प्रमुख आंकड़े
- 2011 में भारत की जनसंख्या: 1.21 बिलियन (121 करोड़)
- पुरुष: 51.47%; महिलाएं: 48.53%
- लिंग अनुपात: प्रति 1000 पुरुष 943 महिलाएं
- शिशु लिंग अनुपात: 919 (ग्रामीण: 923; शहरी: 905)
- साक्षरता दर: 73% (पुरुष: 80.9%; महिला: 64.6%)
- दशकीय वृद्धि दर (2001–2011): 17.64%
- 2011 की जनगणना का नारा: "हमारी जनगणना, हमारा भविष्य"
- 2011 जनगणना भारत की 15वीं जनगणना थी
- भारत में लिंग अनुपात की गणना: प्रति हजार पुरुष पर स्त्रियों की संख्या से
राज्यवार रैंकिंग (2011):
| श्रेणी | प्रथम | द्वितीय |
|---|---|---|
| सबसे अधिक जनसंख्या | उत्तर प्रदेश | महाराष्ट्र |
| सबसे अधिक साक्षरता | केरल (94%) | मिजोरम (91.3%) |
| सबसे कम साक्षरता | बिहार (61.80%) | — |
| सबसे अधिक लिंग अनुपात | केरल | — |
| सबसे कम लिंग अनुपात | हरियाणा (879) | — |
| सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व | बिहार (1106/km²) | — |
| सबसे कम जनसंख्या घनत्व | अरुणाचल प्रदेश (17/km²) | — |
| सबसे अधिक प्रजनन दर | बिहार (3.2%) | — |
| नगरीय आबादी का उच्चतम प्रतिशत | गोवा | — |
वर्ष 1921 — महान जनसांख्यिकीय विभाजन:
- वर्ष 1921 को भारत के जनसांख्यिकीय इतिहास में 'महान जनसांख्यिकीय विभाजन' (Year of Great Divide) का वर्ष कहा जाता है
- 1901–1911 के बीच जनसंख्या में 5.75% की वृद्धि हुई, लेकिन 1911–1921 के बीच जनसंख्या में 0.31% की गिरावट आई
- इसके बाद से जनसंख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई
माल्थुसियन सिद्धांत:
- रॉबर्ट माल्थस ने 1798 में अपने लेख "An Essay on the Principle of Population" में जनसंख्या सिद्धांत दिया
- जनसंख्या गुणोत्तर श्रेणी में बढ़ती है; खाद्यान्न आपूर्ति गणितीय श्रेणी में बढ़ती है
- इसे जनसंख्या विस्फोट की स्थिति कहते हैं
भारत में जनसंख्या वृद्धि की विशेषता:
- जन्म-दर में वृद्धि किंतु मृत्यु-दर में कमी
जनगणना:
- भारत में प्रथम जनगणना: 1872 (लार्ड मेयो के काल में)
- पहली आधिकारिक जनगणना: 1881 (लार्ड रिपन के शासनकाल में)
- 1901 से हर 10 वर्ष बाद जनगणना
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — जनसंख्या
- भारत की जनसंख्या (2011): 1.21 बिलियन
- लिंग अनुपात (2011): प्रति 1000 पुरुष 943 महिलाएं
- सबसे अधिक जनसंख्या: उत्तर प्रदेश
- सबसे अधिक साक्षरता: केरल (94%)
- सबसे कम साक्षरता: बिहार (61.80%)
- सबसे कम लिंग अनुपात: हरियाणा (879)
- महान जनसांख्यिकीय विभाजन: 1921
- भारत में प्रथम जनगणना: 1872 (लार्ड मेयो)
- माल्थस का सिद्धांत: जनसंख्या बढ़ती है: गुणोत्तर श्रेणी में; खाद्यान्न: गणितीय श्रेणी में
- जनगणना अंतराल: प्रत्येक 10 वर्ष
- 2011 जनगणना नारा: "हमारी जनगणना, हमारा भविष्य"
- भारत में लिंग अनुपात: प्रति हजार पुरुष पर महिलाएं
13. रिपोर्ट एवं सूचकांक
AMFFRI सूचकांक:
- 2016 में नीति आयोग ने कृषि विपणन और कृषक हितैषी सुधार सूचकांक (AMFFRI) का शुभारंभ किया
SDG इंडिया सूचकांक:
- SDG भारत सूचकांक (Sustainable Development Goal India Index) नीति आयोग द्वारा विकसित किया गया है
उद्योग-कर्मियों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक:
- उद्योग-कर्मियों के लिए 'उपभोक्ता मूल्य सूचकांक संख्या' श्रम ब्यूरो द्वारा प्रतिपादित किया जाता है
14. लोक वित्त (Public Finance)
14.1 वित्तीय वर्ष और बजट
वित्तीय वर्ष:
- वित्तीय वर्ष सरकार के लिए वित्तीय रिपोर्टिंग अवधि को दर्शाने वाला वर्ष है
- भारत में वित्तीय वर्ष: 1 अप्रैल से 31 मार्च
बजट:
- एक वित्तीय वर्ष में सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का वार्षिक विवरण बजट के नाम से जाना जाता है
- सरकारी बजट द्वारा अनुमानित व्यय और अनुमानित प्राप्तियां दर्शाई जाती हैं
- केंद्रीय बजट के मुख्यतः तीन घटक: व्यय, प्राप्तियां और घाटा
भारत का पहला बजट:
- 26 नवंबर 1947 को स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री आर.के. षणमुखम शेट्टी द्वारा पेश
पहला आर्थिक सर्वेक्षण:
- 1950–51 में प्रस्तुत किया गया
- मुख्य आर्थिक सलाहकार के मार्गदर्शन में तैयार
- वर्तमान मुख्य आर्थिक सलाहकार: कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम (17वें)
NIIF:
- 2015–16 केंद्रीय बजट में भारत के पहले संप्रभु धन कोष (NIIF) की घोषणा
चाइल्ड बजट:
- मध्य प्रदेश राज्य ने मार्च 2022 में पहली बार 'चाइल्ड बजट' प्रस्तुत किया
14.2 घाटों के प्रकार
| घाटा | अर्थ |
|---|---|
| राजस्व घाटा | राजस्व व्यय > राजस्व प्राप्तियां |
| राजकोषीय घाटा | कुल व्यय – (राजस्व प्राप्तियां + गैर-ऋण से सृजित पूंजीगत प्राप्तियां) |
| प्राथमिक घाटा | राजकोषीय घाटा – ब्याज भुगतान |
| बजट घाटा | कुल व्यय > कुल राजस्व |
सकल राजकोषीय घाटा:
- सकल राजकोषीय घाटा = कुल व्यय – (राजस्व प्राप्तियां + गैर-ऋण से सृजित पूंजीगत प्राप्तियां)
- भारत के बजट में घाटे का सबसे बड़ा हिस्सा: राजकोषीय घाटा
पूंजीगत व्यय:
- मशीनरी, उपकरण, भवन, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा आदि के विकास पर खर्च = पूंजीगत व्यय
- पेंशन और वेतन का भुगतान = राजस्व व्यय
- स्कूल की इमारत का निर्माण = पूंजीगत व्यय
14वां वित्त आयोग:
- गठन: 2 जनवरी 2013 को RBI के पूर्व गवर्नर वाई.वी. रेड्डी की अध्यक्षता में
- सिफारिश: राज्यों को केंद्र की कर वसूली से होने वाली निवल आय में हिस्सा 32% से बढ़ाकर 42% करने की — जिसे केंद्र ने स्वीकार किया
वित्तीय नीति:
- वित्तीय नीति के अंतर्गत कराधान, सार्वजनिक ऋण तथा सार्वजनिक व्यय को शामिल किया जाता है
- भारत में वित्तीय नीति का प्रमुख उद्देश्य अर्थव्यवस्था में तरलता बढ़ाना नहीं है (यह मौद्रिक नीति का उद्देश्य होता है)
- वित्तीय नीति के उद्देश्य: मूल स्थिरता, आमदनी और संपत्ति असमानता कम करना, रोजगार के अवसरों को प्रोत्साहित करना
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — लोक वित्त
- भारत का वित्तीय वर्ष: 1 अप्रैल से 31 मार्च
- भारत का पहला बजट: 26 नवंबर 1947 (आर.के. षणमुखम शेट्टी)
- पहला आर्थिक सर्वेक्षण: 1950–51
- भारत में सबसे बड़ा घाटा: राजकोषीय घाटा
- पूंजीगत व्यय उदाहरण: स्कूल निर्माण, मशीनरी खरीद
- राजस्व व्यय उदाहरण: वेतन, पेंशन
- 14वें वित्त आयोग के अध्यक्ष: वाई.वी. रेड्डी
- 14वें FC की सिफारिश: राज्यों का हिस्सा 42%
- NIIF घोषणा: 2015–16 बजट
- चाइल्ड बजट पहली बार: मध्य प्रदेश (2022)
15. विविध (Miscellaneous)
स्थिरीकरण कार्य:
- सरकार का हस्तक्षेप, चाहे वह मांग का विस्तार करने के लिए हो अथवा इसे कम करने के लिए, स्थिरीकरण कार्य कहलाता है
दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता 2016:
- कंपनियों को दिवाला समाधान की प्रक्रिया 180 दिनों में पूरी करनी होगी
सूक्ष्म ऋण (Microfinance):
- गरीबों को स्वयं सहायता समूह के माध्यम से बैंक ऋण प्रदान किया जाता है
- भारत में सूक्ष्म वित्त ऋण की अधिकतम अवधि: 36 महीने
पिगीबैंकिंग (Piggybacking):
- आई.टी. में आउटगोइंग एक्नालेजमेंट को अस्थायी रूप से देर से भेजने की तकनीक को पिगीबैंकिंग कहलाती है
रंगराजन समिति:
- भारत सरकार द्वारा स्थापित
- चीनी उद्योग पर से पूर्ण नियंत्रण हटाने का सुझाव दिया
- गन्ने की कीमतों को बाजार मूल्य के साथ जोड़ने की सिफारिश
पीएल 480 योजना:
- भारत इस योजना के तहत यूएसए (अमेरिका) से गेहूं का आयात करता था
- PL 480 का आशय: Public Law 480 — भारत एवं अमेरिका के बीच खाद्यान्न आपूर्ति समझौता था
- अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी ने इसे 'फूड फॉर पीस' नाम दिया
सार्वजनिक वस्तुएं:
- खाद्य वस्तुएं सार्वजनिक वस्तुओं की श्रेणी में नहीं आती हैं
- सार्वजनिक वस्तु ऐसी वस्तु या ऐसी सेवा है जो नागरिकों को तत्कालीन सरकार द्वारा प्रदान की जाती है जिसके बदले सरकार को कोई लाभ नहीं होता
मुहम्मद यूनुस:
- नोबेल पुरस्कार विजेता, जिन्हें सूक्ष्म वित्त प्रणालियों के जनक के रूप में भी जाना जाता है
गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक:
- विश्व में गेहूं का सबसे बड़ा उत्पादक देश चीन है
- चीन के बाद भारत तथा रूस क्रमशः दूसरे तथा तीसरे स्थान पर हैं
परीक्षा महत्वपूर्ण तथ्य — विविध
- दिवाला समाधान में: 180 दिन (IBC 2016)
- सूक्ष्म ऋण: स्वयं सहायता समूह (SHG) के माध्यम से
- PL-480 के तहत गेहूं: USA से
- सूक्ष्म वित्त के जनक: मुहम्मद यूनुस
- विश्व में सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक: चीन
- खाद्य वस्तुएं: सार्वजनिक वस्तुएं नहीं
- पिगीबैंकिंग: आउटगोइंग एक्नालेजमेंट देर से भेजना (IT)
- रंगराजन समिति: चीनी उद्योग पर नियंत्रण हटाने की सिफारिश
अध्याय सारांश — त्वरित पुनरावृत्ति तालिका
| विषय | प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| तुलनात्मक लाभ | डेविड रिकार्डो |
| अवसर लागत | गॉटफ्रीड हैबरलर |
| वृहत अर्थशास्त्र शब्द | रागनेर फ्रिस्क |
| GDP डिफ्लेटर | सांकेतिक GDP / वास्तविक GDP × 100 |
| NNP | GNP – मूल्यह्रास |
| पहली बार राष्ट्रीय आय गणना | दादाभाई नौरोजी (1867–68) |
| मुख्य कामगार | 183 दिन/वर्ष |
| गरीबी रेखा (2011–12 ग्रामीण) | ₹816/माह |
| MPI 2021 सबसे गरीब राज्य | बिहार |
| GST संशोधन | 101वां (2016) |
| GST कर स्लैब | 0%, 5%, 12%, 18%, 28% |
| RBI स्थापना | 1 अप्रैल 1935 |
| RBI राष्ट्रीयकरण | 1 जनवरी 1949 |
| बैंक राष्ट्रीयकरण चरण 1 | 17 जुलाई 1969 (14 बैंक) |
| NABARD स्थापना | 12 जुलाई 1982 |
| BSE स्थापना | 1875 |
| रुपए प्रतीक | 2010 |
| पहली पंचवर्षीय योजना | 1 अप्रैल 1951 |
| LPG सुधार (8वीं योजना) | 1992–97 |
| PM मुद्रा अधिकतम ऋण | ₹10 लाख |
| आयुष्मान भारत | ₹5 लाख/परिवार/वर्ष |
| पहला मध्याह्न भोजन राज्य | तमिलनाडु |
| भारत जनसंख्या (2011) | 1.21 बिलियन |
| लिंग अनुपात (2011) | 943 प्रति 1000 पुरुष |
| सबसे अधिक जनसंख्या | उत्तर प्रदेश |
| महान जनसांख्यिकीय विभाजन | 1921 |
| भारत का पहला बजट | 26 नवंबर 1947 |
| वित्तीय वर्ष | 1 अप्रैल – 31 मार्च |
| सबसे बड़ा बजट घाटा | राजकोषीय घाटा |
| विश्व में गेहूं उत्पादन में अग्रणी | चीन |