सर्वोच्च न्यायालय ने गृहिणियों को राष्ट्र निर्माता माना और मोटर दुर्घटना मुआवजे के लिए 30000 रुपये प्रतिमाह न्यूनतम काल्पनिक आय निर्धारित की
सर्वोच्च न्यायालय ने 11 जून 2026 को गृहिणियों को "राष्ट्र निर्माता" माना और मोटर दुर्घटना मामलों में घरेलू देखभाल सेवाओं की हानि को एक अलग मुआवजा मद मानते हुए 30,000 रुपये प्रतिमाह की काल्पनिक आय निर्धारित की।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने यह आदेश एक सड़क दुर्घटना में गृहिणी की मृत्यु पर उसके परिवार को मुआवजा देते हुए पारित किया। न्यायालय ने कहा कि जहां गृहिणी की कोई प्रत्यक्ष आय नहीं है, वहां 30,000 रुपये प्रतिमाह "Loss of Domestic Care" मुआवजे की गणना हेतु न्यूनतम आय मानी जाएगी। इस मामले में मुआवजा 8.43 लाख से बढ़ाकर 62.78 लाख रुपये किया गया। भारत के टाइम यूज सर्वे के अनुसार महिलाएं प्रतिदिन 7 से अधिक घंटे अवैतनिक घरेलू कार्य करती हैं और अनुमानित 15 से 17 प्रतिशत GDP में योगदान देती हैं।
खबर में क्यों: यह ऐतिहासिक निर्णय अवैतनिक घरेलू कार्य के कानूनी और आर्थिक मूल्य को पुनर्परिभाषित करता है। पीठ, 30,000 रुपये, "Loss of Domestic Care" मद और मोटर वाहन अधिनियम परीक्षाओं में पूछे जाएंगे।
याद रखने योग्य बिंदु:
- SC निर्णय: 11 जून 2026
- पीठ: न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह
- गृहिणियां "राष्ट्र निर्माता" घोषित
- काल्पनिक आय निर्धारित: 30,000 रुपये प्रतिमाह (न्यूनतम)
- नया मुआवजा मद: "Loss of Domestic Care"
- इस मामले में मुआवजा: 8.43 लाख से 62.78 लाख रुपये
- महिलाएं 7+ घंटे/दिन अवैतनिक कार्य; GDP में 15 से 17% योगदान
- MACT: Motor Accidents Claims Tribunal; लागू कानून: मोटर वाहन अधिनियम 1988
संबंधित स्टेटिक GK:
- मोटर वाहन अधिनियम: 1988 (2019 में संशोधित)
- टाइम यूज सर्वे: MoSPI द्वारा संचालित
- GDP अवैतनिक घरेलू कार्य को नहीं गिनता (care economy gap)
- SC स्थापना: 28 जनवरी 1950; CJI (2026): न्यायमूर्ति सूर्यकांत