सरकारी योजनाएँ SSC Banking UPSC Railway Jun 05, 2026

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली-NCR में पुराने ट्रकों और बसों को BS-VI और इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिए 9,585 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिल्ली-NCR में पुराने ट्रकों और बसों को BS-VI और इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिए 9,585 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 3 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में दिल्ली-NCR क्षेत्र में पुराने ट्रकों और बसों को BS-VI या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिए 9,585 करोड़ रुपये की दो वर्षीय योजना को मंजूरी दी। यह योजना दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में BS-IV या पुराने उत्सर्जन मानकों वाले लगभग 1.91 लाख ट्रक मालिकों और 16,329 बस मालिकों को लक्षित करती है - कुल लगभग 2.07 लाख लाभार्थी।

 

यह योजना MoHUA के तहत NCRPB द्वारा वित्त पोषित होगी और MoRTH एवं MoPNG द्वारा संयुक्त रूप से लागू की जाएगी। केंद्र सरकार 5,041 करोड़ रुपये का योगदान करेगी। वाहन मालिकों को 5 वर्षों के लिए 5% ब्याज सहायता, प्रति माह 4,800 रुपये तक के ईंधन वाउचर और नए वाहनों पर OEM से 8% छूट मिलेगी। दिल्ली में विशेष रूप से हल्के माल वाहनों को इलेक्ट्रिक से बदलना होगा और बसें BS-VI CNG या इलेक्ट्रिक होनी चाहिए।

 

कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में एक सशक्त समिति कार्यान्वयन की निगरानी करेगी, और जिला कलेक्टर/DM जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन अधिकारी होंगे।

 

पृष्ठभूमि: दिल्ली-NCR विश्व के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में से एक है। परिवहन क्षेत्र दिल्ली-NCR में PM2.5 प्रदूषण में लगभग 14 प्रतिशत का योगदान करता है। एक पुराना (प्री-BS) भारी वाहन 14 BS-VI वाहनों जितना उत्सर्जन करता है। भारत ने 1 अप्रैल 2020 से राष्ट्रीय स्तर पर BS-VI उत्सर्जन मानक अपनाए, सीधे BS-IV से BS-VI पर छलांग लगाकर। पहले के उपाय जैसे ऑड-ईवन योजना, GRAP और वाहन स्क्रैप नीति (2021) ने समस्या के कुछ हिस्सों को संबोधित किया था लेकिन वाणिज्यिक वाहन खंड अपर्याप्त रूप से कवर रहा।

 

खबर में क्यों: यह कैबिनेट-अनुमोदित योजना दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण संकट को बड़े वित्तीय परिव्यय और बहु-मंत्रालय समन्वय से संबोधित करती है। SSC CGL, बैंकिंग, UPSC और रेलवे परीक्षाओं में योजना का नाम, कुल परिव्यय (9,585 करोड़), नोडल संस्था (NCRPB/MoHUA), लाभार्थी (2.07 लाख), BS मानकों की पृष्ठभूमि और कैबिनेट सचिव (T.V. सोमनाथन) पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

 

याद रखने योग्य बिंदु:

  • योजना स्वीकृत: केंद्रीय मंत्रिमंडल (PM मोदी की अध्यक्षता); तिथि: 3 जून 2026
  • योजना अवधि: 2 वर्ष
  • कुल वित्तीय परिव्यय: 9,585 करोड़ रुपये
  • केंद्र सरकार का हिस्सा: 5,041 करोड़ रुपये
  • राज्य कर छूट हिस्सा: 1,601 करोड़ रुपये (अनुमानित)
  • लक्ष्य: BS-IV या पुराने ट्रकों-बसों को BS-VI या EV से बदलना
  • कुल लाभार्थी: लगभग 2.07 लाख (1.91 लाख ट्रक + 16,329 बस मालिक)
  • कवर राज्य: दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश
  • नोडल वित्त पोषण संस्था: NCRPB (MoHUA के तहत)
  • कार्यान्वयन मंत्रालय: MoRTH + MoPNG
  • निगरानी: सशक्त समिति - कैबिनेट सचिव डॉ. T.V. सोमनाथन की अध्यक्षता
  • लाभ: 5% ब्याज सहायता (5 वर्ष) + 4,800 रुपये/माह ईंधन वाउचर + 8% OEM छूट
  • दिल्ली विशेष नियम: हल्के माल वाहन - अनिवार्य इलेक्ट्रिक; बसें - BS-VI CNG या EV
  • BS-III और पुराने वाहन: RVSF पर अनिवार्य स्क्रैपिंग
  • परिवहन क्षेत्र: दिल्ली-NCR में PM2.5 का 14% योगदान
  • एक पुराना भारी वाहन = 14 BS-VI वाहनों के बराबर उत्सर्जन
  • BS-VI नियम राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी: 1 अप्रैल 2020

 

संबंधित स्टेटिक GK:

  • NCRPB का पूर्ण रूप: National Capital Region Planning Board
  • NCRPB के तहत: MoHUA (आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय)
  • MoRTH का पूर्ण रूप: Ministry of Road Transport and Highways
  • MoPNG का पूर्ण रूप: Ministry of Petroleum and Natural Gas
  • BS-VI नियम: भारत स्टेज VI उत्सर्जन मानक; 1 अप्रैल 2020 से राष्ट्रीय स्तर पर; यूरो 6 के समतुल्य; भारत ने BS-IV से सीधे BS-VI अपनाया (BS-V को छोड़ा)
  • वाहन स्क्रैप नीति: 2021 में लॉन्च; पुराने वाहनों को RVSF में स्क्रैप करने पर प्रोत्साहन
  • GRAP का पूर्ण रूप: Graded Response Action Plan; दिल्ली-NCR प्रदूषण नियंत्रण ढांचा
  • CAQM का पूर्ण रूप: Commission for Air Quality Management in NCR and Adjoining Areas; 2021 में संसद के अधिनियम द्वारा गठित
  • PM2.5: 2.5 माइक्रोन से कम व्यास के कण; मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे हानिकारक वायु प्रदूषक
  • भारत के कैबिनेट सचिव (2026): डॉ. टी.वी. सोमनाथन
  • दिल्ली NCR राज्य: दिल्ली + हरियाणा + राजस्थान + उत्तर प्रदेश + उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्से