PM मोदी की यात्रा के दौरान नीदरलैंड ने 11वीं सदी की अनैमंगलम चोल तांबे की प्लेटें भारत को लौटाईं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच देशों की राजनयिक यात्रा के दौरान नीदरलैंड ने 16 मई 2026 को 11वीं सदी की अनैमंगलम तांबे की प्लेटें भारत को आधिकारिक रूप से सौंपीं। ये ऐतिहासिक कलाकृतियां, जिन्हें यूरोप में "लेडेन प्लेट्स" के नाम से जाना जाता है, डच औपनिवेशिक काल के दौरान कोरोमंडल तट से ले जाने के बाद एक सदी से भी अधिक समय तक नीदरलैंड की हिरासत में रही थीं। इस संग्रह में 21 बड़ी और 3 छोटी तांबे की चादरें शामिल हैं जिनका वजन लगभग 30 किलोग्राम है, जो शाही चोल मुहर वाली एक तांबे की अंगूठी से बंधी हैं। प्लेटें तमिलनाडु के नागपट्टिनम के पास अनैमंगलम गांव को चुलामणिवर्मा विहार (एक बौद्ध मठ) को दिए गए भूमि अनुदान का विवरण देती हैं।
पृष्ठभूमि: तांबे की ये प्लेटें मूल रूप से राजराजा चोल प्रथम (985–1014 ई.) के शासनकाल में जारी की गई थीं और बाद में उनके पुत्र राजेंद्र चोल प्रथम ने इन्हें तांबे पर स्थायी रूप से उकेरवाया। नीदरलैंड ने 2022 में औपनिवेशिक युग की कलाकृतियों की वापसी पर एक औपचारिक नीति अपनाई, जिससे भारत के प्रत्यावर्तन प्रयासों को गति मिली।
याद रखने योग्य बिंदु:
- कलाकृति: अनैमंगलम तांबे की प्लेटें (लेडेन प्लेट्स)
- वापस किया: नीदरलैंड ने भारत को
- वापसी की तारीख: 16 मई 2026
- अवसर: PM मोदी की नीदरलैंड यात्रा (5 देशों का दौरा)
- काल: चोल वंश — राजराजा चोल प्रथम का शासन (985–1014 ई.)
- भाषा: संस्कृत (प्रारंभिक प्लेटें) और तमिल (अधिकांश प्लेटें)
- प्लेटों की विषय-वस्तु: चुलामणिवर्मा विहार (बौद्ध मठ), नागपट्टिनम को भूमि अनुदान
- वजन: ~30 किग्रा; 21 बड़ी + 3 छोटी तांबे की चादरें
- पहले रखी गई थीं: लेडेन विश्वविद्यालय, नीदरलैंड (1862 से)
संबंधित स्टेटिक GK:
- चोल वंश का शासनकाल: 9वीं–13वीं सदी ई.; दक्षिण भारत
- राजराजा चोल प्रथम: तंजावुर में बृहदीश्वर मंदिर का निर्माण (UNESCO विश्व धरोहर स्थल)
- राजेंद्र चोल प्रथम: गंगा तक विजय; "गंगैकोंड चोल" के नाम से प्रसिद्ध
- नागपट्टिनम: तमिलनाडु का तटीय जिला; बौद्ध और समुद्री व्यापार का ऐतिहासिक केंद्र