सिंधु जल समृद्धि अभियान के तहत लद्दाख में सिंधु नदी पर भारत का पहला रॉक चेक डैम उद्घाटित
भारत का पहला रॉक चेक डैम केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में मौसमी जल संकट को दूर करने के उद्देश्य से बनाया गया है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लेह जिले के उपशी में सिंधु नदी पर इस बांध का उद्घाटन करते हुए "सिंधु जल समृद्धि अभियान" (SJSA) की शुरुआत की।
यह रॉक चेक डैम लेह से 44 किमी दूर 11,400 फीट की ऊंचाई पर सिंधु नदी पर बना है। इसके निर्माण में नदी के पाट से निकाले गए पत्थरों का उपयोग किया गया है - सीमेंट या कंक्रीट का उपयोग नहीं किया गया, जिससे यह पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल परियोजना है।
उपशी का रॉक चेक डैम लगभग 200 फीट लंबा है, नदी के पाट पर इसकी आधार चौड़ाई 30 फीट और शीर्ष पर 15 फीट है। यह नदी तल से 5 फीट ऊंचा है। इसका निर्माण मात्र 7 दिनों में (12-18 मई 2026) पूरा किया गया। उपराज्यपाल ने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को प्रायोगिक आधार पर 3 और ऐसे चेक डैम बनाने का निर्देश दिया है।
पृष्ठभूमि: लद्दाख अपने उच्च-ऊंचाई वाले रेगिस्तानी भूभाग के कारण गंभीर मौसमी जल संकट का सामना करता है। कई स्थानों पर सिंधु नदी इतनी उथली हो जाती है कि मानक पंप पानी को ऊपर खेतों तक नहीं पहुंचा पाते। पारंपरिक कंक्रीट चेक डैम नदी के प्राकृतिक स्वरूप को स्थायी रूप से बदल देते हैं। यह नया रॉक चेक डैम मॉडल नदी के पाट से निकाले गए पत्थरों का उपयोग करके एक अर्ध-स्थायी अवरोध बनाता है जो पानी के प्रवाह को धीमा करता है और सिंचाई के लिए पानी जमा करता है। यह पहल LG सक्सेना की पहले से शुरू की गई परियोजना "हिम सरोवर" (कृत्रिम ग्लेशियर निर्माण) का विस्तार है।
खबर में क्यों: यह भारत का पहला रॉक चेक डैम है - एक उल्लेखनीय "पहली" उपलब्धि जो SSC CGL, बैंकिंग, रेलवे और UPSC परीक्षाओं में पूछी जाएगी। यह विषय पर्यावरण, बुनियादी ढांचे और सरकारी योजनाओं को जोड़ता है। परीक्षाओं में स्थान (उपशी, लेह), नदी (सिंधु), ऊंचाई (11,400 फीट), योजना का नाम (SJSA), उद्घाटनकर्ता (LG विनय कुमार सक्सेना), निर्माण अवधि (7 दिन) और पर्यावरण-अनुकूल प्रकृति पर प्रश्न आ सकते हैं।
याद रखने योग्य बिंदु:
- भारत का पहला रॉक चेक डैम: उपशी, लेह जिला, लद्दाख में उद्घाटित
- स्थान: सिंधु नदी पर, लेह से 44 किमी दूर
- ऊंचाई: 11,400 फीट (समुद्र तल से)
- उद्घाटनकर्ता: लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना
- योजना का नाम: सिंधु जल समृद्धि अभियान (SJSA)
- निर्माण अवधि: मात्र 7 दिन (12-18 मई 2026)
- लंबाई: लगभग 200 फीट; आधार चौड़ाई: 30 फीट; शीर्ष चौड़ाई: 15 फीट; ऊंचाई: 5 फीट
- सीमेंट या कंक्रीट का उपयोग नहीं - पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल
- उद्देश्य: सिंचाई सुधार, जल सुरक्षा और टिकाऊ कृषि को समर्थन
- वर्तमान सिंधु प्रवाह: 25 क्यूसेक; जुलाई-अगस्त में बढ़कर 200 क्यूसेक
- 3 और रॉक चेक डैम प्रायोगिक आधार पर बनाने का निर्देश दिया गया
- इससे पहले प्रोजेक्ट हिम सरोवर - LG सक्सेना की एक और जल संरक्षण पहल
- स्पितुक गांव, लेह में 800 एकड़ बंजर भूमि पुनः उद्धार कार्य भी साथ में जारी
संबंधित स्टेटिक GK:
- लद्दाख: 31 अक्टूबर 2019 से केंद्रशासित प्रदेश (J&K पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत J&K से अलग हुआ)
- लद्दाख उपराज्यपाल: विनय कुमार सक्सेना
- लद्दाख जिले: लेह और कारगिल (2 जिले)
- सिंधु नदी: तिब्बत (मानसरोवर झील के पास) से निकलती है; लद्दाख से भारत में प्रवेश; कुल लंबाई 3,180 किमी; एशिया की सबसे लंबी नदियों में से एक
- सिंधु जल संधि: 1960, भारत-पाकिस्तान के बीच; विश्व बैंक ने मध्यस्थता की; भारत को - रावी, ब्यास, सतलज; पाकिस्तान को - सिंधु, झेलम, चिनाब
- प्रोजेक्ट हिम सरोवर: लद्दाख में कृत्रिम ग्लेशियर निर्माण की पहल; LG सक्सेना द्वारा शुरू
- क्यूसेक: जल प्रवाह की इकाई = क्यूबिक फीट प्रति सेकंड
- चेक डैम: नाले, खड्ड या चैनल पर बना छोटा बांध जो पानी की गति कम करता है और मिट्टी का कटाव रोकता है
- लद्दाख की प्रमुख नदियां: सिंधु, श्योक, ज़ांस्कर, नुब्रा