भारत और साइप्रस ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया
भारत और साइप्रस ने 22 मई 2026 को अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के साथ व्यापक वार्ता की। दोनों देशों ने बुनियादी ढाँचे, शिपिंग, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक संयुक्त कार्यबल (Joint Task Force) की स्थापना का भी निर्णय लिया।
पृष्ठभूमि: साइप्रस पूर्वी भूमध्यसागर का एक छोटा द्वीपीय देश है और यूरोपीय संघ का सदस्य है। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश केंद्र रहा है और पिछले एक दशक में साइप्रस से भारत में निवेश लगभग दोगुना हो चुका है।
खबर में क्यों: राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स की तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदला, जो रक्षा, अर्थव्यवस्था और कूटनीति में दीर्घकालिक सहयोग की दिशा तय करता है।
मुख्य बिंदु:
- घटना: भारत–साइप्रस संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में उन्नत किया गया
- तिथि: 22 मई 2026
- भारत के प्रधानमंत्री: नरेंद्र मोदी
- साइप्रस के राष्ट्रपति: निकोस क्रिस्टोडूलाइड्स
- स्थान: हैदराबाद हाउस, नई दिल्ली
- नया निकाय: बुनियादी ढाँचा और शिपिंग सहयोग के लिए संयुक्त कार्यबल (Joint Task Force)
- अन्य सहयोग के क्षेत्र: साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग
- निवेश लक्ष्य: अगले 5 वर्षों में द्विपक्षीय निवेश को दोगुना करना
- मुख्य पहल:
- IMEC — इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर
- IPOI — इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव
- वैश्विक मुद्दे जिन पर चर्चा हुई:
- यूक्रेन संघर्ष
- पश्चिम एशिया संकट
- भारत का रुख: सभी चल रहे संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान
- महत्व: 2027 में साइप्रस EU Council की अध्यक्षता करेगा, जिससे भारत–EU संबंध और मजबूत होंगे।
संबंधित स्थैतिक सामान्य ज्ञान:
- साइप्रस की राजधानी: निकोसिया
- साइप्रस की मुद्रा: यूरो
- साइप्रस की सदस्यता: वर्ष 2004 से यूरोपीय संघ (EU) का सदस्य
- भारत के विदेश मंत्री: S. Jaishankar
- IMEC: इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर — भारत को मध्य पूर्व के माध्यम से यूरोप से जोड़ने वाली कनेक्टिविटी परियोजना
- भारत–EU रणनीतिक साझेदारी: जनवरी 2026 में हस्ताक्षरित
- भारत की विदेश नीति का सिद्धांत: “वसुधैव कुटुम्बकम्” — अर्थात “पूरा विश्व एक परिवार है”